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Mahendragarh-Narnaul News: साइबर अपराध मामले में आरोपी की जमानत खारिज
Wed, 12 Aug 2026 11:51 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 12 Aug 2026 11:51 PM IST
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नारनौल। साइबर अपराध के एक मामले में एडीजे हर्षाली चौधरी ने आरोपी आदित्य की दूसरी जमानत याचिका भी खारिज कर दी है। इससे पहले भी आरोपी की 11 मार्च को याचिका खारिज की जा चुकी है। उक्त मामला 26 दिसंबर 2025 को साइबर थाना में दर्ज किया गया था।
नारनौल-नांगल चौधरी रोड पर स्थित पेट्रोल पंप के प्रोपराइटर ने शिकायत दी थी कि 24 दिसंबर को सह आरोपी नवीन पेट्रोल पंप पर आया। वह 780 रुपये का तेल भरवाया और 35 हजार नकद की मांग की। उसने आश्वासन दिया कि वह यह राशि पेट्रोल पंप के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर देगा।
आरोपी ने क्यू आर कोड के जरिये 15 और 20 हजार रुपये के दो ऑनलाइन ट्रांसफर दिखाए। इसके बाद सेल्समैन ने 35 हजार नकद दे दिए। बाद में शिकायतकर्ता को पता चला कि उसके साथ 35,780 रुपये की धोखाधड़ी हुई है।
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जांच के दौरान पाया गया कि जिस खाते से पैसे ट्रांसफर किए गए थे, वह सह आरोपी कृष्ण कुमार का था। आरोपी आदित्य ने सह आरोपियों जतिन, मनोज, नवीन और युवराज के साथ बिचौलिए के रूप में काम किया था। इस मामले में 5 मोबाइल और एक वाहन जब्त किया गया है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने माना कि केवल चालान पेश होना परिस्थितियों में ऐसा बदलाव नहीं है जो जमानत का आधार बने, खासकर तब जब हाई कोर्ट पहले ही मामले के गुणों-दोषों पर विचार कर चुका है। आरोपी पर साइबर सिंडिकेट में बिचौलिए का काम करने और बैंक खाते उपलब्ध कराने का गंभीर आरोप है और आरोपी जमानत का हकदार नहीं है।
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नारनौल-नांगल चौधरी रोड पर स्थित पेट्रोल पंप के प्रोपराइटर ने शिकायत दी थी कि 24 दिसंबर को सह आरोपी नवीन पेट्रोल पंप पर आया। वह 780 रुपये का तेल भरवाया और 35 हजार नकद की मांग की। उसने आश्वासन दिया कि वह यह राशि पेट्रोल पंप के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर देगा।
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आरोपी ने क्यू आर कोड के जरिये 15 और 20 हजार रुपये के दो ऑनलाइन ट्रांसफर दिखाए। इसके बाद सेल्समैन ने 35 हजार नकद दे दिए। बाद में शिकायतकर्ता को पता चला कि उसके साथ 35,780 रुपये की धोखाधड़ी हुई है।
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जांच के दौरान पाया गया कि जिस खाते से पैसे ट्रांसफर किए गए थे, वह सह आरोपी कृष्ण कुमार का था। आरोपी आदित्य ने सह आरोपियों जतिन, मनोज, नवीन और युवराज के साथ बिचौलिए के रूप में काम किया था। इस मामले में 5 मोबाइल और एक वाहन जब्त किया गया है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने माना कि केवल चालान पेश होना परिस्थितियों में ऐसा बदलाव नहीं है जो जमानत का आधार बने, खासकर तब जब हाई कोर्ट पहले ही मामले के गुणों-दोषों पर विचार कर चुका है। आरोपी पर साइबर सिंडिकेट में बिचौलिए का काम करने और बैंक खाते उपलब्ध कराने का गंभीर आरोप है और आरोपी जमानत का हकदार नहीं है।