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Mahendragarh-Narnaul News: मिट्टी की बिगड़ी सेहत...उर्वर क्षमता हो रही कम, विशेषज्ञ बोले-फसल चक्र अपनाएं
Wed, 12 Aug 2026 11:59 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 12 Aug 2026 11:59 PM IST
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फोटो 4लैब में मिट्टी की जांच करते कर्मचारी मोनू व अन्य।संवाद
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नारनौल। जिले में भूमि की मिट्टी की उर्वर क्षमता खत्म होती जा रही है। हालात इतने गंभीर हैं कि नारनौल स्थित मिट्टी एवं जल जांच प्रयोगशाला में पहुंच रहे अधिकांश नमूनों में ऑर्गेनिक कार्बन का स्तर सामान्य मानक के एक-तिहाई से भी कम मिला है। वहीं सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी के करीब 10 प्रतिशत नमूने खेती के लिए अनुपयुक्त पाए गए हैं। इससे निजात पाने के लिए विशेषज्ञों ने किसानों से फसल चक्र अपनाने की अपील की है।
अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में फसल उत्पादन घटने के साथ खेती की लागत और किसानों की मुश्किलें दोनों बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी और उपजाऊ मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा 0.75 प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए, लेकिन जांच के लिए पहुंच रहे अधिकांश नमूनों में यह 0.20 प्रतिशत से भी कम दर्ज की गई।
मिट्टी में जैविक कार्बन की कमी का सीधा असर उसकी उर्वरता, नमी बनाए रखने की क्षमता और पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने की क्षमता पर पड़ता है। इसके साथ ही अधिकांश नमूनों में जिंक का स्तर भी 0.6 पीपीएम से कम मिला, जो फसलों की बढ़वार और उत्पादन के लिए चिंता का विषय है।
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सिंचाई के पानी की जांच ने भी खतरे की घंटी बजाई है। वर्ष 2025-26 में 240 और 2026-27 में अब तक 136 पानी के नमूनों की जांच की गई। इनमें करीब 10 प्रतिशत नमूने खेती के लिए अनुपयुक्त मिले। जांच में पानी में खारापन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और क्लोराइड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई। ऐसे पानी का लंबे समय तक उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता को और खराब कर सकता है।
जिले में ऐसा नहीं है कि जैविक खेती की तरफ किसानों का रुझान नहीं है। 2025-26 में 375 किसान जैविक खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी की जांच करवाने लैब में पहुंचे। वहीं 2026-27 में अब तक 125 किसान जांच करवाने पहुंच चुके हैं।
लैब में मिट्टी व पानी की निशुल्क होती है जांच
किसानों के लिए नारनौल स्थित प्रयोगशाला में मिट्टी और पानी की निशुल्क जांच की सुविधा उपलब्ध है। किसान नमूना जमा कराने के सात दिन बाद रिपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं। जनवरी से मार्च के दौरान 438 मिट्टी के नमूनों की जांच हुई, जबकि 1 अप्रैल से 6 अगस्त तक 202 किसानों ने अपनी मिट्टी की जांच करवाई।
जैविक खाद के कम उपयोग से पैदा हुआ संकट
विशेषज्ञों का कहना है कि नहरी पानी की उपलब्धता बढ़ने से भूजल की गुणवत्ता में पहले की तुलना में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन रासायनिक उर्वरकों पर बढ़ती निर्भरता और जैविक खाद के कम उपयोग से मिट्टी की सेहत लगातार बिगड़ रही है। कृषि विभाग किसानों से जांच रिपोर्ट के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करने और जैविक खाद का इस्तेमाल बढ़ाने की अपील कर रहा है। अगर समय रहते इस दिशा में गंभीर कदम नहीं उठाए गए तो जिले की उपजाऊ जमीन की सेहत पर संकट और गहरा सकता है।
वर्जन:
मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखने के लिए किसानों को फसल चक्र अपनाना होगा। वहीं खेतों में गोबर खाद और फसल अवशेष भी जरूरी है ताकि जमीन का उपजाऊपन बना रहे। जिले में ग्वार, चना की खेती का उत्पादन भी बहुत कम हो गया है।-डॉ. राजपाल यादव, कृषि विशेषज्ञ।
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अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में फसल उत्पादन घटने के साथ खेती की लागत और किसानों की मुश्किलें दोनों बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी और उपजाऊ मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा 0.75 प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए, लेकिन जांच के लिए पहुंच रहे अधिकांश नमूनों में यह 0.20 प्रतिशत से भी कम दर्ज की गई।
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मिट्टी में जैविक कार्बन की कमी का सीधा असर उसकी उर्वरता, नमी बनाए रखने की क्षमता और पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने की क्षमता पर पड़ता है। इसके साथ ही अधिकांश नमूनों में जिंक का स्तर भी 0.6 पीपीएम से कम मिला, जो फसलों की बढ़वार और उत्पादन के लिए चिंता का विषय है।
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सिंचाई के पानी की जांच ने भी खतरे की घंटी बजाई है। वर्ष 2025-26 में 240 और 2026-27 में अब तक 136 पानी के नमूनों की जांच की गई। इनमें करीब 10 प्रतिशत नमूने खेती के लिए अनुपयुक्त मिले। जांच में पानी में खारापन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और क्लोराइड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई। ऐसे पानी का लंबे समय तक उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता को और खराब कर सकता है।
जिले में ऐसा नहीं है कि जैविक खेती की तरफ किसानों का रुझान नहीं है। 2025-26 में 375 किसान जैविक खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी की जांच करवाने लैब में पहुंचे। वहीं 2026-27 में अब तक 125 किसान जांच करवाने पहुंच चुके हैं।
लैब में मिट्टी व पानी की निशुल्क होती है जांच
किसानों के लिए नारनौल स्थित प्रयोगशाला में मिट्टी और पानी की निशुल्क जांच की सुविधा उपलब्ध है। किसान नमूना जमा कराने के सात दिन बाद रिपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं। जनवरी से मार्च के दौरान 438 मिट्टी के नमूनों की जांच हुई, जबकि 1 अप्रैल से 6 अगस्त तक 202 किसानों ने अपनी मिट्टी की जांच करवाई।
जैविक खाद के कम उपयोग से पैदा हुआ संकट
विशेषज्ञों का कहना है कि नहरी पानी की उपलब्धता बढ़ने से भूजल की गुणवत्ता में पहले की तुलना में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन रासायनिक उर्वरकों पर बढ़ती निर्भरता और जैविक खाद के कम उपयोग से मिट्टी की सेहत लगातार बिगड़ रही है। कृषि विभाग किसानों से जांच रिपोर्ट के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करने और जैविक खाद का इस्तेमाल बढ़ाने की अपील कर रहा है। अगर समय रहते इस दिशा में गंभीर कदम नहीं उठाए गए तो जिले की उपजाऊ जमीन की सेहत पर संकट और गहरा सकता है।
वर्जन:
मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखने के लिए किसानों को फसल चक्र अपनाना होगा। वहीं खेतों में गोबर खाद और फसल अवशेष भी जरूरी है ताकि जमीन का उपजाऊपन बना रहे। जिले में ग्वार, चना की खेती का उत्पादन भी बहुत कम हो गया है।-डॉ. राजपाल यादव, कृषि विशेषज्ञ।