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Mahendragarh-Narnaul News: नगर परिषद में शामिल होने के चार साल बाद भी नीरपुर गांव में नहीं हुआ प्रॉपर्टी सर्वे

Wed, 12 Aug 2026 11:54 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Wed, 12 Aug 2026 11:54 PM IST
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Even four years after being included in the City Council, a property survey has not been conducted in Neerpur village.
नारनौल। शहर के साथ लगते गांव नीरपुर को वर्ष 2022 में नगर परिषद क्षेत्र में शामिल किया गया। इसके चार साल बाद भी गांव में प्रॉपर्टी सर्वे नहीं करवाया गया। न ही संपत्तियों की प्रॉपर्टी आईडी बनाई गई है। इसके चलते उनके निर्माण कार्यों पर नगर परिषद की ओर से नोटिस दिए जा रहे हैं। इस संबंध में ग्रामीणों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंप कर सर्वे करवाने व नगर परिषद की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।
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वार्ड पार्षद आशा देवी ने बताया कि नगर परिषद क्षेत्र में शामिल किए जाने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि प्रशासन की ओर से जल्द ही गांव की सभी संपत्तियों का सर्वे करवाकर प्रत्येक संपत्ति को प्रॉपर्टी आईडी दी जाएगी। साथ ही एप्रूव्ड और नॉन-एप्रूव्ड क्षेत्र की स्थिति भी स्पष्ट की जाएगी। लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
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इस संबंध में ग्रामीणों ने जिला उपायुक्त अनुपमा अंजलि को ज्ञापन देकर पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीणों ने मांग की है कि नीरपुर में जल्द से जल्द प्रॉपर्टी सर्वे करवाकर प्रत्येक संपत्ति की प्रॉपर्टी आईडी बनाई जाए। साथ ही एप्रूव्ड और नॉन-एप्रूव्ड क्षेत्र की स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जाए ताकि लोगों को भवन निर्माण, मरम्मत और विस्तार संबंधी नियमों की जानकारी मिल सके।
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ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक प्रॉपर्टी सर्वे और प्रॉपर्टी आईडी की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक सामान्य आवश्यक मरम्मत एवं आवासीय कार्यों को लेकर उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।
इसके लिए नगर परिषद अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है। उपायुक्त वार्ड पार्षद आशा देवी, नीरपुर नंबरदार असीम यादव, कप्तान सिंह, आशीष, अभिषेक, मनोज ने हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन सौंपा।

एप्रूव्ड और नॉन-एप्रूव्ड क्षेत्र को लेकर भी असमंजस
नीरपुर में ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्हें स्पष्ट रूप से जानकारी नहीं है कि गांव का कौन-सा क्षेत्र एप्रूव्ड है और कौन-सा नॉन-एप्रूव्ड। ग्रामीणों के अनुसार गांव का लाल डोरा क्षेत्र करीब 70 वर्ष से भी पुराना है। समय के साथ गांव की आबादी और परिवारों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में लोग अपनी आवासीय जरूरतों के अनुसार पुराने मकानों की मरम्मत, विस्तार अथवा आवश्यक निर्माण कार्य करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक प्रशासन द्वारा क्षेत्र का स्पष्ट सर्वे और सीमांकन नहीं किया गया है तथा संपत्तियों की प्रॉपर्टी आईडी नहीं बनाई गई है, तब तक लोगों के लिए यह समझना मुश्किल है कि किस क्षेत्र में किस प्रकार का निर्माण नियम लागू है।


बिना प्रॉपर्टी आईडी के निर्माण पर नोटिस से नाराजगी
ग्रामीणों में सबसे अधिक नाराजगी इस बात को लेकर है कि नगर परिषद की ओर से आवश्यक निर्माण या मरम्मत कार्य करवाने वाले लोगों को नोटिस दिए जा रहे हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि जब नगर परिषद में शामिल किए जाने के बाद भी गांव का प्रॉपर्टी सर्वे नहीं हुआ, संपत्तियों की प्रॉपर्टी आईडी नहीं बनी और एप्रूव्ड-नॉन-एप्रूव्ड क्षेत्र की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो आम ग्रामीणों को निर्माण संबंधी नियमों की जानकारी किस आधार पर होगी।
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