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Mahendragarh-Narnaul News: मीसा के तहत 18 महीने जेल में रहे गोविंद भारद्वाज, कैद में ही दी एमए परीक्षा
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नारनौल। आपातकाल के दौर की यादें आज भी कई लोगों के दिलों में ताजा हैं। शहर के गोविंद भारद्वाज (76) ने आपबीती साझा करते हुए बताया कि उन्हें 1 सितंबर 1975 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर बस स्टैंड से गिरफ्तार किया गया था। उस समय वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक प्रो. राजेंद्र सिंह रज्जू भैया के साथ हापुड़ जाने की तैयारी में थे। बाद में उन्हें मीसा कानून के तहत बंदी बनाकर जेल भेज दिया गया।
गोविंद भारद्वाज ने बताया कि सूचना लीक होने के कारण उनकी योजना बदल दी गई थी लेकिन कुछ समय बाद ही पुलिस और सीआईडी ने बस स्टैंड पर उन्हें घेरकर गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के दौरान उन पर पेन-पिस्टल रखने का संदेह जताया गया और पूछताछ के लिए पहले एलआईयू कार्यालय और फिर कोतवाली ले जाया गया। इसके बाद उन्हें मीसा के तहत हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया जहां वे 23 मार्च 1977 तक यानी लगभग 18 माह 23 दिन तक बंद रहे।
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उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी की खबर फैलते ही कई परिवारों में उस रात चूल्हा तक नहीं जला। पहली पेशी के दौरान 27 परिवारों ने उनके लिए भोजन के टिफिन भेजे जिन्हें उन्होंने पुलिसकर्मियों के साथ बैठकर खाया।
जेल जीवन के दौरान उन्होंने हार नहीं मानी और राजनीति शास्त्र में एमए करने का निर्णय लिया। हालांकि, प्रशासन ने उन्हें बाहर परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी, लेकिन मेरठ विश्वविद्यालय ने विशेष व्यवस्था करते हुए बुलंदशहर जेल को डीएवी कॉलेज का उप परीक्षा केंद्र घोषित किया। इसके बाद उन्होंने जेल परिसर में ही परीक्षा दी।
वर्तमान में गोविंद भारद्वाज लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में सक्रिय हैं और पहले हरियाणा कृषि उद्योग निगम के चेयरमैन भी रह चुके हैं।
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गोविंद भारद्वाज ने बताया कि सूचना लीक होने के कारण उनकी योजना बदल दी गई थी लेकिन कुछ समय बाद ही पुलिस और सीआईडी ने बस स्टैंड पर उन्हें घेरकर गिरफ्तार कर लिया।
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गिरफ्तारी के दौरान उन पर पेन-पिस्टल रखने का संदेह जताया गया और पूछताछ के लिए पहले एलआईयू कार्यालय और फिर कोतवाली ले जाया गया। इसके बाद उन्हें मीसा के तहत हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया जहां वे 23 मार्च 1977 तक यानी लगभग 18 माह 23 दिन तक बंद रहे।
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उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी की खबर फैलते ही कई परिवारों में उस रात चूल्हा तक नहीं जला। पहली पेशी के दौरान 27 परिवारों ने उनके लिए भोजन के टिफिन भेजे जिन्हें उन्होंने पुलिसकर्मियों के साथ बैठकर खाया।
जेल जीवन के दौरान उन्होंने हार नहीं मानी और राजनीति शास्त्र में एमए करने का निर्णय लिया। हालांकि, प्रशासन ने उन्हें बाहर परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी, लेकिन मेरठ विश्वविद्यालय ने विशेष व्यवस्था करते हुए बुलंदशहर जेल को डीएवी कॉलेज का उप परीक्षा केंद्र घोषित किया। इसके बाद उन्होंने जेल परिसर में ही परीक्षा दी।
वर्तमान में गोविंद भारद्वाज लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में सक्रिय हैं और पहले हरियाणा कृषि उद्योग निगम के चेयरमैन भी रह चुके हैं।