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इंतकाल के लिए नहीं जाना पड़ेगा राजस्व विभाग, स्वत: इंतकाल प्रणाली लागू
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 23 Jun 2026 11:33 PM IST
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नारनौल। नागरिकों को अब इंतकाल के लिए राजस्व विभाग नहीं जाना पड़ेगा। रजिस्ट्री होने के बाद इंतकाल अपने आप दर्ज हो जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को वर्चुअल माध्यम से राजस्व विभाग से जुड़ी इन सेवाओं का लोकार्पण किया।
उपायुक्त अनुपमा अंजली ने बताया कि पहले रजिस्ट्री होने के बाद भी कई मामलों में इंतकाल दर्ज होने में देरी होती थी। विभाग ने ऐसे मामलों की पहचान की, जिनमें रजिस्ट्री के बावजूद इंतकाल दर्ज नहीं हुआ था।
इसके समाधान के लिए ऑटो म्यूटेशन प्रणाली को एक माह तक पायलट आधार पर चलाया गया और सुझावों के आधार पर इसे और प्रभावी बनाया गया। प्रारंभिक चरण में करीब 50 हजार इंतकाल स्वत: दर्ज किए जा चुके हैं।
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डीसी ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री होते ही स्वत: इंतकाल दर्ज हो जाएगा तथा रजिस्ट्री के समय ही इंतकाल नंबर उपलब्ध हो जाएगा। जिन मामलों में खेवट विभाजन की आवश्यकता नहीं होगी, उनमें 24 घंटे के भीतर इंतकाल स्वीकृत हो जाएगा, जबकि खेवट विभाजन वाले मामलों का निपटान अधिकतम 10 दिनों में किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि विरासत, पारिवारिक बंटवारे तथा न्यायालय की डिक्री आधारित इंतकाल भी अधिकतम 10 दिनों में निपटाए जाएंगे। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन एवं पारदर्शी होगी।
उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाकर सभी लंबित इंतकालों का निपटान किया जाएगा तथा आगामी 15 दिनों के भीतर शेष लंबित मामलों के समाधान का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि अब पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 लागू किया जा रहा है। नई प्रणाली में आवेदन फॉर्म को सरल बनाया गया है तथा प्रथम और द्वितीय पक्ष की आधार आधारित ई-केवाईसी अनिवार्य की गई है। कंपनियों एवं एनआरआई को अधिकृत व्यक्ति नियुक्त करने की सुविधा दी गई है।
डीड को नागरिक स्वयं, डीड राइटर, अधिवक्ता अथवा हेल्पडेस्क के माध्यम से भर सकेंगे। इसके अलावा पूर्ण डिजिटल हस्ताक्षर एवं बायोमेट्रिक प्रक्रिया, ऑनलाइन स्टे सत्यापन, अतिरिक्त दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा, क्यूआर कोड आधारित सत्यापन तथा अपॉइंटमेंट को तत्काल श्रेणी में परिवर्तित करने जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं।
उपायुक्त अनुपमा अंजली ने बताया कि पहले रजिस्ट्री होने के बाद भी कई मामलों में इंतकाल दर्ज होने में देरी होती थी। विभाग ने ऐसे मामलों की पहचान की, जिनमें रजिस्ट्री के बावजूद इंतकाल दर्ज नहीं हुआ था।
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इसके समाधान के लिए ऑटो म्यूटेशन प्रणाली को एक माह तक पायलट आधार पर चलाया गया और सुझावों के आधार पर इसे और प्रभावी बनाया गया। प्रारंभिक चरण में करीब 50 हजार इंतकाल स्वत: दर्ज किए जा चुके हैं।
डीसी ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री होते ही स्वत: इंतकाल दर्ज हो जाएगा तथा रजिस्ट्री के समय ही इंतकाल नंबर उपलब्ध हो जाएगा। जिन मामलों में खेवट विभाजन की आवश्यकता नहीं होगी, उनमें 24 घंटे के भीतर इंतकाल स्वीकृत हो जाएगा, जबकि खेवट विभाजन वाले मामलों का निपटान अधिकतम 10 दिनों में किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि विरासत, पारिवारिक बंटवारे तथा न्यायालय की डिक्री आधारित इंतकाल भी अधिकतम 10 दिनों में निपटाए जाएंगे। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन एवं पारदर्शी होगी।
उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाकर सभी लंबित इंतकालों का निपटान किया जाएगा तथा आगामी 15 दिनों के भीतर शेष लंबित मामलों के समाधान का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि अब पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 लागू किया जा रहा है। नई प्रणाली में आवेदन फॉर्म को सरल बनाया गया है तथा प्रथम और द्वितीय पक्ष की आधार आधारित ई-केवाईसी अनिवार्य की गई है। कंपनियों एवं एनआरआई को अधिकृत व्यक्ति नियुक्त करने की सुविधा दी गई है।
डीड को नागरिक स्वयं, डीड राइटर, अधिवक्ता अथवा हेल्पडेस्क के माध्यम से भर सकेंगे। इसके अलावा पूर्ण डिजिटल हस्ताक्षर एवं बायोमेट्रिक प्रक्रिया, ऑनलाइन स्टे सत्यापन, अतिरिक्त दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा, क्यूआर कोड आधारित सत्यापन तथा अपॉइंटमेंट को तत्काल श्रेणी में परिवर्तित करने जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं।