{"_id":"6a6e34d0447bc6091d006261","slug":"promote-water-conservation-by-cultivating-cotton-with-paddy-palwal-news-c-24-1-pal1008-126582-2026-08-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Palwal News: धान के साथ कपास की खेती कर जल संरक्षण को दें बढ़ावा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Palwal News: धान के साथ कपास की खेती कर जल संरक्षण को दें बढ़ावा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोट में हुआ किसान मेले का आयोजन, सात गांवों के सैकड़ों किसानों ने लिया हिस्सा
संवाद न्यूज एजेेंसी
हथीन। हरियाणा सरकार की जल संरक्षण एवं फसल विविधीकरण नीति को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा गांव कोट में किसान मेले का आयोजन किया गया। मेले में क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने भाग लेकर कपास उत्पादन, आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल संरक्षण तथा विभिन्न कृषि कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
उप-मंडल कृषि अधिकारी सुनील दत्त ने किसानों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे धान के साथ-साथ कपास जैसी कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को अपनाकर जल संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होने के साथ-साथ किसानों की आय में भी वृद्धि संभव है।
उप-मंडल कृषि अधिकारी ने किसानों से मेरी फसल मेरा ब्योरा, मेरा पानी मेरी विरासत, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना सहित कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने के लिए समय पर ऑनलाइन पंजीकरण कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि विभाग की अधिकांश योजनाओं का लाभ कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण के आधार पर ही प्रदान किया जाता है।
विज्ञापन
कपास की खेती और पराली प्रबंधन की दी जानकारी
खंड कृषि अधिकारी प्रदीप मलिक ने किसानों को कपास की फसल में लगने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों की पहचान, रोकथाम और वैज्ञानिक उपचार की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भविष्य में जल संरक्षण को देखते हुए किसानों को कम पानी वाली फसलों की ओर बढ़ना होगा। कपास की खेती धान की तुलना में कम पानी और कम लागत में बेहतर उत्पादन देती है। उन्होंने किसानों को पराली प्रबंधन अपनाने की अपील करते हुए बताया कि सरकार कृषि यंत्रों पर अनुदान के साथ इन-सीटू और एक्स-सीटू पराली प्रबंधन अपनाने वाले किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि भी दे रही है।
कार्यक्रम में गांव कोट, बुराका, हथीन, आलीमेव, नांगल जाट, बहीन तथा उटावड़ सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों किसानों ने भाग लिया। किसानों ने विभाग द्वारा आयोजित किसान मेले की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम आधुनिक खेती, नई कृषि तकनीकों तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेेंसी
हथीन। हरियाणा सरकार की जल संरक्षण एवं फसल विविधीकरण नीति को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा गांव कोट में किसान मेले का आयोजन किया गया। मेले में क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने भाग लेकर कपास उत्पादन, आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल संरक्षण तथा विभिन्न कृषि कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
उप-मंडल कृषि अधिकारी सुनील दत्त ने किसानों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे धान के साथ-साथ कपास जैसी कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को अपनाकर जल संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होने के साथ-साथ किसानों की आय में भी वृद्धि संभव है।
विज्ञापन
उप-मंडल कृषि अधिकारी ने किसानों से मेरी फसल मेरा ब्योरा, मेरा पानी मेरी विरासत, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना सहित कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने के लिए समय पर ऑनलाइन पंजीकरण कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि विभाग की अधिकांश योजनाओं का लाभ कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण के आधार पर ही प्रदान किया जाता है।
विज्ञापन
कपास की खेती और पराली प्रबंधन की दी जानकारी
खंड कृषि अधिकारी प्रदीप मलिक ने किसानों को कपास की फसल में लगने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों की पहचान, रोकथाम और वैज्ञानिक उपचार की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भविष्य में जल संरक्षण को देखते हुए किसानों को कम पानी वाली फसलों की ओर बढ़ना होगा। कपास की खेती धान की तुलना में कम पानी और कम लागत में बेहतर उत्पादन देती है। उन्होंने किसानों को पराली प्रबंधन अपनाने की अपील करते हुए बताया कि सरकार कृषि यंत्रों पर अनुदान के साथ इन-सीटू और एक्स-सीटू पराली प्रबंधन अपनाने वाले किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि भी दे रही है।
कार्यक्रम में गांव कोट, बुराका, हथीन, आलीमेव, नांगल जाट, बहीन तथा उटावड़ सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों किसानों ने भाग लिया। किसानों ने विभाग द्वारा आयोजित किसान मेले की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम आधुनिक खेती, नई कृषि तकनीकों तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं।