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Panchkula News: कांग्रेस ने सुधा भारद्वाज पर खेला दांव, चंद्रमोहन के वीटो से कटी रावल की टिकट

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 20 Apr 2026 02:09 AM IST
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Congress bets on Sudha Bharadwaj, Chandramohan's veto cuts Rawal's ticket
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पंचकूला नगर निगम चुनाव : रावल की दावेदारी पर विधायक का विरोध पड़ा भारी
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सैलजा का समर्थन मिला; महिला कार्ड के साथ समीकरण साधने की चुनौती
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। हरियाणा में आगामी नगर निगम चुनावों के लिए सियासी पारा चढ़ गया है। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पंचकूला नगर निगम के मेयर पद के लिए अपने पत्ते खोलते हुए सुधा भारद्वाज के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी है। रविवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता और हरियाणा मामलों के प्रभारी बीके हरिप्रसाद की संस्तुति के बाद प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र ने उनके नाम की औपचारिक घोषणा की। इस घोषणा के साथ ही शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है क्योंकि यह टिकट वितरण किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं रहा।

विधायक का समर्थन
मेयर की टिकट के लिए कांग्रेस के भीतर दो गुटों में शह-मात का खेल चला। एक तरफ पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष रविंद्र रावल थे जिनके पक्ष में पंजाबी समुदाय के करीब 50 हजार वोटों का गणित और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का आशीर्वाद था। दूसरी तरफ ब्राह्मण समुदाय से आने वाली सुधा भारद्वाज थीं। जिनके समुदाय की वोट संख्या करीब 15 हजार है। चुनाव कमेटी की बैठक में जब 12 नामों पर मंथन शुरू हुआ तो स्थानीय विधायक चंद्रमोहन ने रविंद्र रावल की दावेदारी पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने रावल को जारी कारण बताओ नोटिस का हवाला देते हुए उनकी पात्रता पर सवाल खड़े किए। चंद्रमोहन के वीटो को सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा का भी साथ मिला जिससे पासा सुधा भारद्वाज के पक्ष में पलट गया।
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जानिये कौन हैं सुधा भारद्वाज
-सुधा भारद्वाज कांग्रेस की जमीनी और अनुभवी नेत्री मानी जाती हैं।
-संगठनात्मक अनुभव, महिला कांग्रेस में वरिष्ठ उपाध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्ष के पदों पर रह चुकी हैं।
-पारिवारिक पृष्ठभूमि, प्रदेश कांग्रेस के मीडिया इंचार्ज संजीव भारद्वाज की पत्नी हैं।
-सियासी समीकरण, हुड्डा विरोधी खेमे का करीबी माना जाता है।
रणनीतिक दांव या बड़ी चुनौती
-पार्टी ने सुधा भारद्वाज को उतारकर महिला कार्ड तो खेला है लेकिन राह कांटों भरी भी हो सकती है।


अब सामने आएंगी ये चुनौतियां
-जातिगत समीकरण, 50 हजार पंजाबी वोटों की तुलना में 15 हजार ब्राह्मण वोटों वाले आधार पर दांव लगाना कितना सही होगा? क्या चंद्रमोहन का साथ दिलाएगा जीत।
-भीतरी गुटबाजी, क्या हुड्डा समर्थक और रावल खेमा इस फैसले को दिल से स्वीकार करेगा?
-एकजुटता, चुनाव में टिकट कटने से नाराज धड़े को साधना सुधा भारद्वाज के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।ेे
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