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590 करोड़ के स्कैम में खुलासा: 90 दिनों तक चला ट्रांजेक्शन, सिग्नेचर अपडेट की सूचना पर भी नहीं रूका लेन-देन

दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला Published by: Nivedita Updated Fri, 27 Feb 2026 07:52 AM IST
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सार

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में जांच तेज हो गई है। विजिलेंस टीम लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है।  

₹590 crore scam Transactions lasted for 90 days not stopped even after signature update notification
बैंक फ्राड में पकड़े गए आरोपी - फोटो : संवाद
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विस्तार

हरियाणा के सरकारी खातों से करीब 590 करोड़ रुपये की हेराफेरी का खेल अक्तूबर से दिसंबर 2025 के बीच करीब 90 दिनों तक चलता रहा। फरवरी 2026 में विभाग को इस धोखाधड़ी का पता चला, जिसके बाद विजिलेंस जांच शुरू की गई।

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जांच में सामने आया है कि 10 दिसंबर 2025 को हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग ने बैंक को सिग्नेचर अपडेट करने के लिए पत्र भेजा था, जो 12 दिसंबर को बैंक को प्राप्त हो गया था। इसके बावजूद पुराने और कथित जाली हस्ताक्षरों तथा डेबिट नोट के आधार पर ट्रांजेक्शन जारी रहे।
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विजिलेंस के अनुसार, सरकारी खातों से फर्जी हस्ताक्षरों और जाली बैंक स्टेटमेंट्स के जरिए करोड़ों रुपये ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट’ नामक फर्म के खातों में ट्रांसफर किए गए।

दस्तावेजों से छेड़छाड़ के आरोप

जांच में पंचकूला निवासी ऋषभ ऋषि, चंडीगढ़ निवासी अभय कुमार, स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि इन्होंने बैंक रिकॉर्ड और अपनी फर्म के दस्तावेजों में छेड़छाड़ की। सीडीआर विश्लेषण में यह भी पाया गया कि गिरफ्तारी से पहले आरोपियों ने कई लोगों से संपर्क किया। डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट करने की आशंका के चलते साइबर विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

जीएसटी वेंडर वेरिफिकेशन पर सवाल

सरकारी नियमों के अनुसार, बड़े भुगतान से पहले जीएसटी वेरिफिकेशन और वेंडर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। जांच एजेंसियां यह भी पड़ताल कर रही हैं कि ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट’ को किस प्रक्रिया के तहत वेंडर के रूप में पंजीकृत किया गया। यदि पंजीकरण में अनियमितता पाई जाती है, तो विभाग के आईटी सेल और लेखा शाखा की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

सेक्टर-32 चंडीगढ़ कनेक्शन

जांच में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, सेक्टर-32 चंडीगढ़ के एक खाते का उल्लेख सामने आया है, जहां से राशि ज्वेलर्स तक पहुंचने की बात कही गई है। विजिलेंस ट्राईसिटी (पंचकूला-चंडीगढ़-मोहाली) कनेक्शन की भी जांच कर रही है।

एयू स्माॅल फाइनांस बैंक पर रिकॉर्ड न देने का आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, नोटिस जारी किए जाने के बावजूद एयू स्माॅल फाइनांस बैंक की ओर से आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए। विजिलेंस अब बैंक अधिकारियों को भी जांच में शामिल कर सकती है।

जांच के अहम सवाल

विभाग के अधिकृत मोबाइल नंबरों पर ट्रांजेक्शन के एसएमएस और ईमेल अलर्ट क्यों नहीं पहुंचे?
विभाग को दिए गए कथित जाली बैंक स्टेटमेंट किस माध्यम से तैयार किए गए?
यदि विभाग ने चेक जारी नहीं किए, तो बैंक के पास वे चेक कैसे पहुंचे?
क्या गिरफ्तार पूर्व बैंक कर्मी केवल क्रियान्वयन कर रहे थे? इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड कौन है?

गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई

16 फरवरी 2026 को जांच समिति गठित की गई और 24 फरवरी को एसआईटी ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने बताया कि मामले की बहुआयामी जांच जारी है। आरोपियों की चल-अचल संपत्ति, बैंक खातों और लॉकरों की भी जांच की जा रही है। विजिलेंस की त्वरित कार्रवाई के बाद अब यह जांच इस दिशा में आगे बढ़ रही है कि क्या यह केवल वित्तीय अनियमितता है या सरकारी तंत्र में किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा।

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