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Panchkula News: मासूम से छेड़छाड़ करने वाले बुजुर्ग को 5 साल की कैद

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 02 May 2026 02:25 AM IST
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Elderly Man Sentenced to 5 Years in Prison for Molesting a Child
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पॉक्सो कोर्ट का सख्त फैसला, भरोसे का फायदा उठाकर 5 वर्षीय बच्ची से की थी अश्लील हरकत
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। जिला पंचकूला की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने मासूम बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को कड़ा संदेश देते हुए 63 वर्षीय बुजुर्ग को 5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अदालत के इस फैसले को बच्चों की सुरक्षा और समाज में बढ़ते अपराधों पर सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनीष दुआ की अदालत ने वर्ष 2024 में दर्ज पॉक्सो एक्ट के मामले में त्वरित सुनवाई करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने माना कि आरोपी ने भरोसे का गलत फायदा उठाते हुए मासूम बच्ची के साथ अश्लील हरकतें की थीं। कोर्ट ने कहा कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध किसी भी सभ्य समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं और ऐसे मामलों में नरमी की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती।
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यह मामला 18 जनवरी 2024 को पिंजौर थाना क्षेत्र में सामने आया था। पीड़िता के माता-पिता दोनों कामकाजी हैं। जिस व्यक्ति से उन्होंने मकान खरीदा था, वह उसी मकान के एक हिस्से में रहता था। लंबे समय से जान-पहचान होने और भरोसा होने के कारण दंपती अपनी 5 वर्षीय बच्ची को आरोपी के पास छोड़कर काम पर चले जाते थे।

आरोप है कि आरोपी ने इसी भरोसे का फायदा उठाया। उसने बच्ची को टॉफी का लालच देकर अपने पास बुलाया और उसके साथ अश्लील हरकतें कीं। शाम को जब माता-पिता घर लौटे तो बच्ची डरी-सहमी दिखाई दी। पूछने पर उसने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई, जिसके बाद तुरंत पुलिस में शिकायत दी गई।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था। जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता और परिजनों के बयान दर्ज किए तथा मेडिकल और अन्य साक्ष्यों को अदालत में पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ मजबूत सबूत पेश किए, जिसके आधार पर अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में त्वरित सुनवाई और सख्त सजा से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है। इससे बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों में कानून का डर बढ़ेगा और पीड़ित परिवारों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत होगा।
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