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रावल बंधुओं की नाराजगी दूर : दीपेंद्र हुड्डा और चंद्रमोहन ने घर पहुंचकर मनाया
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नगर निगम चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपनी अंदरूनी गुटबाजी को सुलझाया, पंजाबी वोट बैंक पर नजरें
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। नगर निगम चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपनी आंतरिक गुटबाजी को सुलझाते हुए सियासी बढ़त हासिल की है। टिकट न मिलने से नाराज चल रहे नगर परिषद के पूर्व प्रधान रविंद्र रावल और उनके भाई पूर्व पार्षद नरेश रावल को मनाने के लिए रविवार को कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा उनके निवास पर लगा रहा। राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद वरुण चौधरी, कर्मवीर बौद्ध और पांच बार के विधायक व पूर्व डिप्टी सीएम चंद्रमोहन ने खुद रावल बंधुओं के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्य रूप से जिला प्रधान संजय चौहान, संजीव भारद्वाज, विजय शर्मा और दिव्यांशु बुद्धिराजा सहित कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता उपस्थित रहे।
सियासी समीकरण : 55 हजार वोटरों का प्रभाव
मेयर पद का टिकट न मिलने से रविंद्र रावल खासे नाराज थे। पंजाबी एकता मंच के प्रधान होने के नाते पंचकूला की राजनीति में उनका खासा प्रभाव है। गौरतलब है कि पंचकूला विधानसभा क्षेत्र में पंजाबी समुदाय के करीब 55,000 मतदाता हैं जो किसी भी उम्मीदवार की हार-जीत तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
चंद्रमोहन के बदले सुर, अब नया सवेरा है
पिछले दिनों प्रेस कॉन्फ्रेंस में रविंद्र रावल के साथ मतभेद की बात स्वीकार करने वाले चंद्रमोहन के सुर रविवार को बदले हुए नजर आए। उन्होंने कहा कि हमारे बीच कोई मतभेद नहीं थे। पुरानी बातों को पीछे छोड़कर अब हमें आगे बढ़ना चाहिए। अब एक नया सवेरा निकल आया है। रविंद्र रावल मेयर पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे थे। उनकी नाराजगी दूर होना कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार में संजीवनी साबित हो सकता है।
कांग्रेस एकजुट, भाजपा को दी चुनौती
रावल बंधुओं ने सभी सांसदों और विधायकों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। इस मुलाकात के बाद रविंद्र रावल ने स्पष्ट किया कि अब पूरी कांग्रेस एकजुट है और नगर निगम चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी भाजपा के सामने मजबूत चुनौती पेश करेंगे।
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। नगर निगम चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपनी आंतरिक गुटबाजी को सुलझाते हुए सियासी बढ़त हासिल की है। टिकट न मिलने से नाराज चल रहे नगर परिषद के पूर्व प्रधान रविंद्र रावल और उनके भाई पूर्व पार्षद नरेश रावल को मनाने के लिए रविवार को कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा उनके निवास पर लगा रहा। राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद वरुण चौधरी, कर्मवीर बौद्ध और पांच बार के विधायक व पूर्व डिप्टी सीएम चंद्रमोहन ने खुद रावल बंधुओं के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्य रूप से जिला प्रधान संजय चौहान, संजीव भारद्वाज, विजय शर्मा और दिव्यांशु बुद्धिराजा सहित कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता उपस्थित रहे।
सियासी समीकरण : 55 हजार वोटरों का प्रभाव
मेयर पद का टिकट न मिलने से रविंद्र रावल खासे नाराज थे। पंजाबी एकता मंच के प्रधान होने के नाते पंचकूला की राजनीति में उनका खासा प्रभाव है। गौरतलब है कि पंचकूला विधानसभा क्षेत्र में पंजाबी समुदाय के करीब 55,000 मतदाता हैं जो किसी भी उम्मीदवार की हार-जीत तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
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चंद्रमोहन के बदले सुर, अब नया सवेरा है
पिछले दिनों प्रेस कॉन्फ्रेंस में रविंद्र रावल के साथ मतभेद की बात स्वीकार करने वाले चंद्रमोहन के सुर रविवार को बदले हुए नजर आए। उन्होंने कहा कि हमारे बीच कोई मतभेद नहीं थे। पुरानी बातों को पीछे छोड़कर अब हमें आगे बढ़ना चाहिए। अब एक नया सवेरा निकल आया है। रविंद्र रावल मेयर पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे थे। उनकी नाराजगी दूर होना कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार में संजीवनी साबित हो सकता है।
कांग्रेस एकजुट, भाजपा को दी चुनौती
रावल बंधुओं ने सभी सांसदों और विधायकों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। इस मुलाकात के बाद रविंद्र रावल ने स्पष्ट किया कि अब पूरी कांग्रेस एकजुट है और नगर निगम चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी भाजपा के सामने मजबूत चुनौती पेश करेंगे।
