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Panchkula News: पलासरा में पहाड़ दरका, मलबे में फंसी स्कूल बस<bha>;</bha> ढाई घंटे सहमे रहे बच्चे
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मोरनी-रायपुर रानी मार्ग की बदहाली पर फिर उठे सवाल, दो साल से स्थायी समाधान नहीं होने का खामियाजा भुगत रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
मोरनी। मोरनी-रायपुर रानी मार्ग पर मंगलवार को बड़ा हादसा टल गया। पलासरा गांव के पास पहाड़ से भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आ गिरा, जिससे मार्ग पूरी तरह बंद हो गया और बच्चों से भरी एक स्कूल बस बीच रास्ते में फंस गई। बस में सवार बच्चे करीब ढाई घंटे तक सड़क खुलने का इंतजार करते रहे। दूसरी ओर बच्चों के परिजन चिंता में फोन कर उनकी कुशलक्षेम पूछते रहे। कई अभिभावक निजी वाहनों से मौके की ओर निकल पड़े, लेकिन खराब सड़क और मलबे के कारण आगे बढ़ना भी मुश्किल हो गया।
लगातार बारिश के बाद मोरनी-रायपुर रानी मार्ग पर करीब आधा दर्जन स्थानों पर मलबा गिरने से यातायात प्रभावित रहा। सबसे गंभीर स्थिति पलासरा के पास बनी, जहां पहाड़ का बड़ा हिस्सा सड़क पर आ गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्कूली बस के फंसने की घटना ने एक बार फिर इस मार्ग की जर्जर हालत और प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सड़क नहीं, दलदल से गुजर रहे लोग
बारिश के कारण बंगार गांव के पास सड़क पर डाली गई मिट्टी दलदल में तब्दील हो गई है। वाहन फिसल रहे हैं और कई स्थानों पर सड़क की हालत इतनी खराब है कि लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि रोजाना विद्यार्थी, कर्मचारी, किसान और मजदूर इसी मार्ग से आवाजाही करते हैं, लेकिन सड़क की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।
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किसानों और कारोबारियों की बढ़ी चिंता
मोरनी क्षेत्र की 20 से अधिक पंचायतों से हर दिन बड़ी मात्रा में सब्जियां रायपुररानी और अन्य मंडियों तक पहुंचती हैं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश से आने-जाने वाले सैकड़ों वाहन भी इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। सड़क बाधित होने से किसानों, व्यापारियों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समय पर सब्जियां मंडियों तक नहीं पहुंच पाने से आर्थिक नुकसान की आशंका भी बढ़ गई है।
स्थायी समाधान नहीं, हर बारिश में संकट
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से सड़क की बदहाली को लेकर लगातार शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। बरसात के हर सीजन में मलबा गिरने, सड़क धंसने और यातायात बाधित होने की स्थिति बन जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों को दफ्तरों में बैठकर रिपोर्ट लेने के बजाय मौके पर पहुंचकर हालात देखने चाहिए। मंगलवार को स्कूल बस के ढाई घंटे तक फंसे रहने की घटना ने विभागीय कार्यप्रणाली और सड़क रखरखाव की पोल खोल दी है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोरनी। मोरनी-रायपुर रानी मार्ग पर मंगलवार को बड़ा हादसा टल गया। पलासरा गांव के पास पहाड़ से भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आ गिरा, जिससे मार्ग पूरी तरह बंद हो गया और बच्चों से भरी एक स्कूल बस बीच रास्ते में फंस गई। बस में सवार बच्चे करीब ढाई घंटे तक सड़क खुलने का इंतजार करते रहे। दूसरी ओर बच्चों के परिजन चिंता में फोन कर उनकी कुशलक्षेम पूछते रहे। कई अभिभावक निजी वाहनों से मौके की ओर निकल पड़े, लेकिन खराब सड़क और मलबे के कारण आगे बढ़ना भी मुश्किल हो गया।
लगातार बारिश के बाद मोरनी-रायपुर रानी मार्ग पर करीब आधा दर्जन स्थानों पर मलबा गिरने से यातायात प्रभावित रहा। सबसे गंभीर स्थिति पलासरा के पास बनी, जहां पहाड़ का बड़ा हिस्सा सड़क पर आ गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्कूली बस के फंसने की घटना ने एक बार फिर इस मार्ग की जर्जर हालत और प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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सड़क नहीं, दलदल से गुजर रहे लोग
बारिश के कारण बंगार गांव के पास सड़क पर डाली गई मिट्टी दलदल में तब्दील हो गई है। वाहन फिसल रहे हैं और कई स्थानों पर सड़क की हालत इतनी खराब है कि लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि रोजाना विद्यार्थी, कर्मचारी, किसान और मजदूर इसी मार्ग से आवाजाही करते हैं, लेकिन सड़क की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।
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किसानों और कारोबारियों की बढ़ी चिंता
मोरनी क्षेत्र की 20 से अधिक पंचायतों से हर दिन बड़ी मात्रा में सब्जियां रायपुररानी और अन्य मंडियों तक पहुंचती हैं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश से आने-जाने वाले सैकड़ों वाहन भी इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। सड़क बाधित होने से किसानों, व्यापारियों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समय पर सब्जियां मंडियों तक नहीं पहुंच पाने से आर्थिक नुकसान की आशंका भी बढ़ गई है।
स्थायी समाधान नहीं, हर बारिश में संकट
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से सड़क की बदहाली को लेकर लगातार शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। बरसात के हर सीजन में मलबा गिरने, सड़क धंसने और यातायात बाधित होने की स्थिति बन जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों को दफ्तरों में बैठकर रिपोर्ट लेने के बजाय मौके पर पहुंचकर हालात देखने चाहिए। मंगलवार को स्कूल बस के ढाई घंटे तक फंसे रहने की घटना ने विभागीय कार्यप्रणाली और सड़क रखरखाव की पोल खोल दी है।