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Panchkula News: ग्रीन कॉरिडोर बनाकर दिल्ली और चंडीगढ़ भेजे गए अंग
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बेटियों के प्रोत्साहन से लेफ्टिनेंट कर्नल ने पत्नी का किया अंगदान, ब्रेन डेड घोषित होने के बाद लिया फैसला
योगेंद्र त्रिपाठी
पंचकूला। मेरी दोनों बेटियों ने मुझे अंगदान के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मां हमेशा दयालु और मददगार स्वभाव की रही हैं, इसलिए उनका अंगदान कई लोगों को नया जीवन दे सकता है। यह भावुक शब्द लेफ्टिनेंट कर्नल हीरा सिंह के हैं, जिन्होंने अपनी पत्नी सुदेशना सिंह के ब्रेन डेड घोषित होने के बाद उनके अंगदान की अनुमति दी।
लेफ्टिनेंट कर्नल हीरा सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी सुदेशना सिंह (40) के दिमाग की नस फट गई थी। उन्हें कमांड अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। उन्होंने बताया कि उस कठिन समय में उनकी बेटियां नायशा सिंह और माहिरा सिंह, जो आर्मी पब्लिक स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं, ने उन्हें अंगदान के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि बेटियों ने उन्हें याद दिलाया कि उनकी मां हमेशा दूसरों की मदद करने में विश्वास रखती थीं। इसी भावना के साथ परिवार ने अंगदान का फैसला लिया।
दिल्ली और चंडीगढ़ भेजे गए अंग
लेफ्टिनेंट कर्नल ने बताया कि एक किडनी कमांड अस्पताल में ही एक मरीज को प्रत्यारोपित की गई। इसके अलावा दूसरी किडनी और पैंक्रियाज पीजीआई चंडीगढ़ भेजे गए। हार्ट को मोहाली एयरपोर्ट के रास्ते अपोलो अस्पताल दिल्ली पहुंचाया गया, जबकि लीवर सेना के अस्पताल में भेजा गया।
पंचकूला पुलिस ने बनाया ग्रीन कॉरिडोर
अंगों को समय पर अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए पंचकूला ट्रैफिक पुलिस ने विशेष ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया। ट्रैफिक इंस्पेक्टर वरिंदर कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने अलग-अलग रूटों पर एंबुलेंस को निर्बाध रास्ता उपलब्ध कराया।
ऑपरेशन की शुरुआत दोपहर 2:30 बजे हुई, जब अपोलो अस्पताल की टीम को एयरपोर्ट से कमांड अस्पताल पहुंचाया गया। इसके बाद शाम 5 बजे से 8 बजे के बीच अंगों को विभिन्न अस्पतालों के लिए रवाना किया गया। पीसीआर-9 ने मोहाली एयरपोर्ट तक, पीसीआर-8 ने टेक्निकल एयरपोर्ट चंडीगढ़ तक और पीसीआर-3 ने पीजीआई चंडीगढ़ तक एंबुलेंस को सुरक्षित पहुंचाने में मदद की। इस दौरान ट्रैफिक पुलिस ने कई स्थानों पर वाहनों को रोककर एंबुलेंस के लिए ग्रीन सिग्नल सुनिश्चित किया, ताकि अंगों को निर्धारित ‘इस्केमिक टाइम’ के भीतर अस्पतालों तक पहुंचाया जा सके।
अंगदान महादान है : डीसीपी
डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने कहा कि अंगदान महादान है और इसमें हर सेकंड की अहमियत होती है। उन्होंने कहा कि एक साथ तीन अलग-अलग दिशाओं में ग्रीन कॉरिडोर बनाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन पुलिस टीम ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ इस कार्य को सफल बनाया।दिशाओं में ग्रीन कॉरिडोर बनाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन पुलिस टीम ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ इस कार्य को सफल बनाया।
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योगेंद्र त्रिपाठी
पंचकूला। मेरी दोनों बेटियों ने मुझे अंगदान के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मां हमेशा दयालु और मददगार स्वभाव की रही हैं, इसलिए उनका अंगदान कई लोगों को नया जीवन दे सकता है। यह भावुक शब्द लेफ्टिनेंट कर्नल हीरा सिंह के हैं, जिन्होंने अपनी पत्नी सुदेशना सिंह के ब्रेन डेड घोषित होने के बाद उनके अंगदान की अनुमति दी।
लेफ्टिनेंट कर्नल हीरा सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी सुदेशना सिंह (40) के दिमाग की नस फट गई थी। उन्हें कमांड अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। उन्होंने बताया कि उस कठिन समय में उनकी बेटियां नायशा सिंह और माहिरा सिंह, जो आर्मी पब्लिक स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं, ने उन्हें अंगदान के लिए प्रोत्साहित किया।
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उन्होंने कहा कि बेटियों ने उन्हें याद दिलाया कि उनकी मां हमेशा दूसरों की मदद करने में विश्वास रखती थीं। इसी भावना के साथ परिवार ने अंगदान का फैसला लिया।
दिल्ली और चंडीगढ़ भेजे गए अंग
लेफ्टिनेंट कर्नल ने बताया कि एक किडनी कमांड अस्पताल में ही एक मरीज को प्रत्यारोपित की गई। इसके अलावा दूसरी किडनी और पैंक्रियाज पीजीआई चंडीगढ़ भेजे गए। हार्ट को मोहाली एयरपोर्ट के रास्ते अपोलो अस्पताल दिल्ली पहुंचाया गया, जबकि लीवर सेना के अस्पताल में भेजा गया।
पंचकूला पुलिस ने बनाया ग्रीन कॉरिडोर
अंगों को समय पर अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए पंचकूला ट्रैफिक पुलिस ने विशेष ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया। ट्रैफिक इंस्पेक्टर वरिंदर कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने अलग-अलग रूटों पर एंबुलेंस को निर्बाध रास्ता उपलब्ध कराया।
ऑपरेशन की शुरुआत दोपहर 2:30 बजे हुई, जब अपोलो अस्पताल की टीम को एयरपोर्ट से कमांड अस्पताल पहुंचाया गया। इसके बाद शाम 5 बजे से 8 बजे के बीच अंगों को विभिन्न अस्पतालों के लिए रवाना किया गया। पीसीआर-9 ने मोहाली एयरपोर्ट तक, पीसीआर-8 ने टेक्निकल एयरपोर्ट चंडीगढ़ तक और पीसीआर-3 ने पीजीआई चंडीगढ़ तक एंबुलेंस को सुरक्षित पहुंचाने में मदद की। इस दौरान ट्रैफिक पुलिस ने कई स्थानों पर वाहनों को रोककर एंबुलेंस के लिए ग्रीन सिग्नल सुनिश्चित किया, ताकि अंगों को निर्धारित ‘इस्केमिक टाइम’ के भीतर अस्पतालों तक पहुंचाया जा सके।
अंगदान महादान है : डीसीपी
डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने कहा कि अंगदान महादान है और इसमें हर सेकंड की अहमियत होती है। उन्होंने कहा कि एक साथ तीन अलग-अलग दिशाओं में ग्रीन कॉरिडोर बनाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन पुलिस टीम ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ इस कार्य को सफल बनाया।दिशाओं में ग्रीन कॉरिडोर बनाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन पुलिस टीम ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ इस कार्य को सफल बनाया।
