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Panchkula News: पंचकूला में अब नहीं डूबेंगी सड़कें, 45 साल पुरानी ड्रेनों की मरम्मत शुरू
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पीएमडीए ने तीन चरणों में तैयार किया प्लान, बिना ट्रैफिक बाधित किए बढ़ाई जाएगी जल निकासी क्षमता
गीता चौक-टाउन पार्क पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद शहरभर में शुरू हुआ अभियान
5.50 करोड़ रुपये का पहला प्रोजेक्ट सफल; अब इंडस्ट्रियल एरिया से सेक्टरों तक होगा विस्तार
आदित्य शर्मा
पंचकूला। हर मानसून में सड़कों पर जलभराव, निचले इलाकों में पानी घुसने और कमजोर पड़ चुके अंडरग्राउंड ड्रेनेज नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे पंचकूला को अब स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है। पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएमडीए) ने शहर के करीब 45 साल पुराने ड्रेनेज नेटवर्क को बिना खुदाई के आधुनिक तकनीक से पुनर्जीवित करने का बड़ा अभियान शुरू किया है। गीता चौक से टाउन पार्क तक 5.50 करोड़ रुपये की लागत से किए गए पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब इस तकनीक को शहर के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि इससे बारिश के दौरान जल निकासी क्षमता बढ़ेगी, जलभराव की समस्या कम होगी और ड्रेनेज नेटवर्क की उम्र भी लंबी होगी।
शहर का अधिकांश अंडरग्राउंड ड्रेनेज नेटवर्क चार दशक से अधिक पुराना हो चुका है। समय के साथ इनमें दरारें पड़ गई हैं, कई स्थानों पर संरचनात्मक क्षति हुई है और ड्रेनों के बैठने से पानी की निकासी प्रभावित होने लगी है। इसके कारण बरसात के दौरान कई क्षेत्रों में पानी जमा होने की समस्या सामने आती रही है। कुछ स्थानों पर ड्रेनों की खराब स्थिति के चलते हाई टेंशन बिजली के खंभों, बड़े पेड़ों और अन्य सार्वजनिक उपयोगिताओं की सुरक्षा को भी खतरा पैदा हो गया है।
इसी चुनौती से निपटने के लिए पीएमडीए ने पहले पूरे ड्रेनेज नेटवर्क का तकनीकी सर्वे कराया। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मरम्मत और क्षमता बढ़ाने की योजना तैयार की गई। इसके तहत गीता चौक से टाउन पार्क तक 900 एमएम व्यास की ड्रेन पर मशीन वाउंड स्पाइरल लाइनिंग (एमएसडब्ल्यूएल) तकनीक का प्रयोग करते हुए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया। 5.50 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हुआ यह प्रोजेक्ट सफल रहा, जिसके बाद बड़े स्तर पर काम शुरू कर दिया गया।
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पीएमडीए के एक्सईएन गुरमीत सिंह के अनुसार शहर में अब एमएसडब्ल्यूएल तकनीक के माध्यम से ड्रेनेज सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से मजबूत किया जा रहा है। इस तकनीक में पुरानी नाली को तोड़ने या सड़क की खुदाई करने की जरूरत नहीं पड़ती। मशीन के माध्यम से विशेष प्लास्टिक स्ट्रिप को पुरानी ड्रेन के भीतर घुमाकर नई आंतरिक परत तैयार की जाती है, जिससे ड्रेन की मजबूती और जल निकासी क्षमता दोनों बढ़ जाती हैं।
ट्रैफिक भी नहीं रुकेगा, सड़कें भी नहीं टूटेंगी
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ड्रेनों की मरम्मत के लिए सड़कें नहीं खोदी जाएंगी। इससे न तो लंबे समय तक ट्रैफिक प्रभावित होगा और न ही नागरिकों को निर्माण कार्य के कारण परेशानी उठानी पड़ेगी। परंपरागत तरीके से ड्रेनेज मरम्मत में जहां सड़कें तोड़नी पड़ती हैं, वहीं इस तकनीक से भूमिगत नेटवर्क को भीतर से ही नया जीवन दिया जा सकता है। इससे परियोजना का समय भी कम होगा और सार्वजनिक ढांचे को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा।
फेज-1 का टेंडर जारी, कई क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
पीएमडीए ने इस महत्वाकांक्षी योजना को तीन चरणों में पूरा करने का खाका तैयार किया है। पहले चरण में इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में भगवान परशुराम चौक से सिंह नाला चौक तक ड्रेनेज नेटवर्क की मरम्मत की जाएगी। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जल्द कार्य आरंभ होने की संभावना है। इसके अलावा सेक्टर-20/21 को जोड़ने वाली सड़क और सेक्टर-15 स्थित बेल फैक्ट्री से भगवान परशुराम चौक तक की ड्रेनों की मरम्मत के लिए भी प्रस्ताव तैयार किया गया है। शेष हिस्सों के लिए अगस्त 2026 तक विस्तृत एस्टीमेट तैयार किए जा रहे हैं, ताकि पूरे शहर के पुराने ड्रेनेज नेटवर्क को चरणबद्ध तरीके से दुरुस्त किया जा सके।
आने वाले वर्षों के लिए तैयार होगा ड्रेनेज सिस्टम
अधिकारियों का मानना है कि एमएसडब्ल्यूएल तकनीक के माध्यम से पुरानी ड्रेनों को बिना तोड़-फोड़ के मजबूत किया जा सकेगा। इससे जल निकासी व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी, रखरखाव की लागत कम होगी और भविष्य में भारी बारिश के दौरान भी शहर का ड्रेनेज सिस्टम बेहतर ढंग से काम करेगा। लंबे समय से उपेक्षित भूमिगत नेटवर्क को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करने की यह पहल पंचकूला के शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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गीता चौक-टाउन पार्क पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद शहरभर में शुरू हुआ अभियान
5.50 करोड़ रुपये का पहला प्रोजेक्ट सफल
आदित्य शर्मा
पंचकूला। हर मानसून में सड़कों पर जलभराव, निचले इलाकों में पानी घुसने और कमजोर पड़ चुके अंडरग्राउंड ड्रेनेज नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे पंचकूला को अब स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है। पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएमडीए) ने शहर के करीब 45 साल पुराने ड्रेनेज नेटवर्क को बिना खुदाई के आधुनिक तकनीक से पुनर्जीवित करने का बड़ा अभियान शुरू किया है। गीता चौक से टाउन पार्क तक 5.50 करोड़ रुपये की लागत से किए गए पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब इस तकनीक को शहर के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि इससे बारिश के दौरान जल निकासी क्षमता बढ़ेगी, जलभराव की समस्या कम होगी और ड्रेनेज नेटवर्क की उम्र भी लंबी होगी।
शहर का अधिकांश अंडरग्राउंड ड्रेनेज नेटवर्क चार दशक से अधिक पुराना हो चुका है। समय के साथ इनमें दरारें पड़ गई हैं, कई स्थानों पर संरचनात्मक क्षति हुई है और ड्रेनों के बैठने से पानी की निकासी प्रभावित होने लगी है। इसके कारण बरसात के दौरान कई क्षेत्रों में पानी जमा होने की समस्या सामने आती रही है। कुछ स्थानों पर ड्रेनों की खराब स्थिति के चलते हाई टेंशन बिजली के खंभों, बड़े पेड़ों और अन्य सार्वजनिक उपयोगिताओं की सुरक्षा को भी खतरा पैदा हो गया है।
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इसी चुनौती से निपटने के लिए पीएमडीए ने पहले पूरे ड्रेनेज नेटवर्क का तकनीकी सर्वे कराया। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मरम्मत और क्षमता बढ़ाने की योजना तैयार की गई। इसके तहत गीता चौक से टाउन पार्क तक 900 एमएम व्यास की ड्रेन पर मशीन वाउंड स्पाइरल लाइनिंग (एमएसडब्ल्यूएल) तकनीक का प्रयोग करते हुए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया। 5.50 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हुआ यह प्रोजेक्ट सफल रहा, जिसके बाद बड़े स्तर पर काम शुरू कर दिया गया।
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पीएमडीए के एक्सईएन गुरमीत सिंह के अनुसार शहर में अब एमएसडब्ल्यूएल तकनीक के माध्यम से ड्रेनेज सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से मजबूत किया जा रहा है। इस तकनीक में पुरानी नाली को तोड़ने या सड़क की खुदाई करने की जरूरत नहीं पड़ती। मशीन के माध्यम से विशेष प्लास्टिक स्ट्रिप को पुरानी ड्रेन के भीतर घुमाकर नई आंतरिक परत तैयार की जाती है, जिससे ड्रेन की मजबूती और जल निकासी क्षमता दोनों बढ़ जाती हैं।
ट्रैफिक भी नहीं रुकेगा, सड़कें भी नहीं टूटेंगी
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ड्रेनों की मरम्मत के लिए सड़कें नहीं खोदी जाएंगी। इससे न तो लंबे समय तक ट्रैफिक प्रभावित होगा और न ही नागरिकों को निर्माण कार्य के कारण परेशानी उठानी पड़ेगी। परंपरागत तरीके से ड्रेनेज मरम्मत में जहां सड़कें तोड़नी पड़ती हैं, वहीं इस तकनीक से भूमिगत नेटवर्क को भीतर से ही नया जीवन दिया जा सकता है। इससे परियोजना का समय भी कम होगा और सार्वजनिक ढांचे को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा।
फेज-1 का टेंडर जारी, कई क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
पीएमडीए ने इस महत्वाकांक्षी योजना को तीन चरणों में पूरा करने का खाका तैयार किया है। पहले चरण में इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में भगवान परशुराम चौक से सिंह नाला चौक तक ड्रेनेज नेटवर्क की मरम्मत की जाएगी। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जल्द कार्य आरंभ होने की संभावना है। इसके अलावा सेक्टर-20/21 को जोड़ने वाली सड़क और सेक्टर-15 स्थित बेल फैक्ट्री से भगवान परशुराम चौक तक की ड्रेनों की मरम्मत के लिए भी प्रस्ताव तैयार किया गया है। शेष हिस्सों के लिए अगस्त 2026 तक विस्तृत एस्टीमेट तैयार किए जा रहे हैं, ताकि पूरे शहर के पुराने ड्रेनेज नेटवर्क को चरणबद्ध तरीके से दुरुस्त किया जा सके।
आने वाले वर्षों के लिए तैयार होगा ड्रेनेज सिस्टम
अधिकारियों का मानना है कि एमएसडब्ल्यूएल तकनीक के माध्यम से पुरानी ड्रेनों को बिना तोड़-फोड़ के मजबूत किया जा सकेगा। इससे जल निकासी व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी, रखरखाव की लागत कम होगी और भविष्य में भारी बारिश के दौरान भी शहर का ड्रेनेज सिस्टम बेहतर ढंग से काम करेगा। लंबे समय से उपेक्षित भूमिगत नेटवर्क को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करने की यह पहल पंचकूला के शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।