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Panipat News: जिला सचिवालय का स्तनपान कक्ष बना स्टोर, पड़ताल में खुली पोल
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जिला सचिवालय में बना स्तनपान केंद्र पर लगा ताला। संवाद
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। औद्योगिक नगरी के प्रमुख सार्वजनिक और प्रशासनिक स्थलों पर शिशुओं को स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। जिला सचिवालय में महिलाओं की सुविधा के लिए बनाया गया फीडिंग रूम स्टोर रूम में तब्दील हो चुका है। वहीं रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर स्तनपान कक्ष की व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में छोटे बच्चों के साथ आने वाली महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एक अगस्त से शुरू हो रहे विश्व स्तनपान सप्ताह से पहले शुक्रवार को जिला सचिवालय, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड की पड़ताल की गई। इस दौरान माताओं के लिए जरूरी सुविधाओं की अनदेखी साफ नजर आई।
रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर नहीं है स्तनपान कक्ष : पानीपत रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन करीब 125 ट्रेनों का संचालन होता है और 15 से 20 हजार यात्री सफर करते हैं। इसके बावजूद रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड परिसर में माताओं के लिए कोई स्तनपान कक्ष या फीडिंग बूथ उपलब्ध नहीं है।
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समालखा निवासी सीमा ने बताया कि सफर के दौरान छोटे बच्चे को संभालना आसान नहीं होता। रेलवे स्टेशन पर कोई अलग कमरा या गोपनीय स्थान नहीं होने से भीड़ के बीच बच्चे को दूध पिलाना बेहद असहज लगता है।
सुमन ने कहा कि बस स्टैंड पर कई बार घंटों बस का इंतजार करना पड़ता है। यदि वहां फीडिंग रूम की व्यवस्था हो तो माताएं आराम से बच्चों की देखभाल कर सकती हैं, लेकिन इस ओर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
स्टोर में रखा था कबाड़ और फालतू सामान
जिला सचिवालय में करीब 15 विभागों के कार्यालय संचालित होते हैं। यहां सरल केंद्र के सामने बेबी केयर एवं फीडिंग रूम का बोर्ड तो लगा है, लेकिन अंदर फालतू सामान और कबाड़ रखा हुआ है।
जिला सचिवालय पहुंचीं सुनीता ने बताया कि फीडिंग रूम होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है, क्योंकि उसमें सामान भरा हुआ है। ऐसे में महिलाओं को आड़ लेकर किसी कोने में बैठकर बच्चे को दूध पिलाना पड़ता है। पूनम ने कहा कि प्रशासनिक भवन में इस तरह की अनदेखी चिंताजनक है। यदि फीडिंग रूम बनाया गया है तो उसे साफ-सुथरा भी रखा जाना चाहिए।
विश्व स्तनपान सप्ताह
हर साल 1 से 7 अगस्त के बीच विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए स्तनपान के महत्व के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना है। इस वर्ष की थीम का नाम है- स्तनपान की प्राथमिकता, सहयोग की स्थायी संरचना।
मामला संज्ञान में आया है। जिला सचिवालय स्थित फीडिंग रूम से तुरंत सामान हटवाकर उसे महिलाओं के लिए सुचारू किया जाएगा। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भी बूथ निर्माण को लेकर संबंधित अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। -मनदीप कुमार, उप जिलाधिकारी, पानीपत।
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पानीपत। औद्योगिक नगरी के प्रमुख सार्वजनिक और प्रशासनिक स्थलों पर शिशुओं को स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। जिला सचिवालय में महिलाओं की सुविधा के लिए बनाया गया फीडिंग रूम स्टोर रूम में तब्दील हो चुका है। वहीं रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर स्तनपान कक्ष की व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में छोटे बच्चों के साथ आने वाली महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एक अगस्त से शुरू हो रहे विश्व स्तनपान सप्ताह से पहले शुक्रवार को जिला सचिवालय, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड की पड़ताल की गई। इस दौरान माताओं के लिए जरूरी सुविधाओं की अनदेखी साफ नजर आई।
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रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर नहीं है स्तनपान कक्ष : पानीपत रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन करीब 125 ट्रेनों का संचालन होता है और 15 से 20 हजार यात्री सफर करते हैं। इसके बावजूद रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड परिसर में माताओं के लिए कोई स्तनपान कक्ष या फीडिंग बूथ उपलब्ध नहीं है।
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समालखा निवासी सीमा ने बताया कि सफर के दौरान छोटे बच्चे को संभालना आसान नहीं होता। रेलवे स्टेशन पर कोई अलग कमरा या गोपनीय स्थान नहीं होने से भीड़ के बीच बच्चे को दूध पिलाना बेहद असहज लगता है।
सुमन ने कहा कि बस स्टैंड पर कई बार घंटों बस का इंतजार करना पड़ता है। यदि वहां फीडिंग रूम की व्यवस्था हो तो माताएं आराम से बच्चों की देखभाल कर सकती हैं, लेकिन इस ओर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
स्टोर में रखा था कबाड़ और फालतू सामान
जिला सचिवालय में करीब 15 विभागों के कार्यालय संचालित होते हैं। यहां सरल केंद्र के सामने बेबी केयर एवं फीडिंग रूम का बोर्ड तो लगा है, लेकिन अंदर फालतू सामान और कबाड़ रखा हुआ है।
जिला सचिवालय पहुंचीं सुनीता ने बताया कि फीडिंग रूम होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है, क्योंकि उसमें सामान भरा हुआ है। ऐसे में महिलाओं को आड़ लेकर किसी कोने में बैठकर बच्चे को दूध पिलाना पड़ता है। पूनम ने कहा कि प्रशासनिक भवन में इस तरह की अनदेखी चिंताजनक है। यदि फीडिंग रूम बनाया गया है तो उसे साफ-सुथरा भी रखा जाना चाहिए।
विश्व स्तनपान सप्ताह
हर साल 1 से 7 अगस्त के बीच विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए स्तनपान के महत्व के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना है। इस वर्ष की थीम का नाम है- स्तनपान की प्राथमिकता, सहयोग की स्थायी संरचना।
मामला संज्ञान में आया है। जिला सचिवालय स्थित फीडिंग रूम से तुरंत सामान हटवाकर उसे महिलाओं के लिए सुचारू किया जाएगा। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भी बूथ निर्माण को लेकर संबंधित अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। -मनदीप कुमार, उप जिलाधिकारी, पानीपत।