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Panipat News: उद्यमी बोले- सीपीसीबी के निरीक्षण से भय, सरकार की नीति स्पष्ट नहीं
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मंत्री महिपाल ढांडा को अपनी मांगों के लिए ज्ञापन सौंपते प्रधान नितिन अरोड़ा। संवाद
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पानीपत। पानीपत डायर्स एसोसिएशन और दूसरे औद्योगिक संगठन सीपीसीबी (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) और एचएसपीसीबी (हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) की प्रदूषण फैलाने के नाम पर लगातार की जा रही कार्रवाई के विरोध में एकजुट होकर आगे आ गए हैं। उद्यमियों ने वीरवार को सेक्टर-29-टू के अमीरा बैंक्वेट हाल में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के साथ बैठक की।
उद्यमियों ने कहा कि अमेरिका के टैरिफ वार और फिर पश्चिमी एशिया के देशों में तनाव से उद्योग बंद होने के कगार पर हैं। उद्योगों के लिए सरकार के पास भी कोई स्पष्ट नीति नहीं हैं। प्रदूषण के नाम पर उद्योगों को सील तक किया जा रहा है। एक ही झटके में बिजली कनेक्शन तक काट दिए जाते हैं। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने उद्यमियों को इस समस्या में साथ खड़े होने का भरोसा दिया और दो या तीन दिन में मुख्यमंत्री के साथ बैठक कराने की बात कही।
उद्यमियों और शिक्षा मंत्री की बैठक वीरवार सायं चार बजे शुरू की और करीब एक घंटे तक चली। पानीपत डायर्स एसोसिएशन के प्रधान नितिन अरोड़ा ने सेक्टर-29 पार्ट-एक, दो व सेक्टर 25 में एचएसआईआईडीसी द्वारा लगभग 13.50 करोड़ रुपये की लागत से सड़क बनाए जाने पर मंत्री का आभार जताया। इसके साथ सेक्टर-29 पार्ट 2 में 123.40 करोड़ की लागत से 21 एमएलडी का सीईटीपी निर्माण जल्द शुरू कराने की मांग की।
उन्होंने बताया कि इसका टेंडर लग चुका है। एचएसवीपी द्वारा लगभग 5.30 करोड़ रुपये की लागत से ट्यूबवेल और पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। कृष्णा लॉन के नजदीक पार्क निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस मौके पर सेक्टर-29-वन के प्रधान श्रीभगवान अग्रवाल, सेक्टर-25-एक के प्रधान एचएस धम्मू, कारपेट एसोसिएशन के प्रधान अनिल मित्तल, डाइज एंड केमिकल के प्रधान अशोक बठला, कुराड़ एसोसिएशन के प्रधान नवीन बंसल, फरीदपुर एसोसिएशन प्रधान पुनीत जैन, बरसत रोड गोशाला के प्रधान राजीव जैन, 25-2 माइक्रो के प्रधान प्रमोद शर्मा, बलदेव लखीन, अंकुर गुप्ता, पुरुषोत्तम शर्मा, भारत बांगा, मनीष नंदवानी , डॉ अनिल, अजय मालिक, राजपाल, अंकित तायल, नरेंद्र नरूला, दीपक बजाज, रमेश माटा व मनोज गुप्ता मौजूद रहे।
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उद्यमी और किसान पर्यावरण संरक्षण कर रहे
नितिन अरोड़ा ने कहा कि रंगाई उद्योग टेक्सटाइल सेक्टर की रीढ़ है। पानीपत का हथकरघा उद्योग विश्व मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना चुका है। निर्यात व घरेलू बाजार में आगे हैं। उद्योग पर्यावरण विरोधी नहीं है। वे प्रदूषण को कम करने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध हैं। पौधरोपण जैसे कार्य निरंतर कर रहे हैं। डाई उद्योग एग्रीकल्चर वेस्ट का प्रयोग कर रहे हैं। किसान भी अब इससे आमदनी कर रहे हैं। इससे प्रदूषण पहले की अपेक्षा कम हुआ है। उन्होंने कहा कि रंगाई के चलते उद्योगों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
हरियाणा पर्यावरण प्रबंधन सोसायटी के प्रधान भीम राणा ने बताया कि सीपीसीबी, सीएक्यूएम और एचएसपीसीबी दिल्ली एनसीआर में लगातार नए नियम लागू कर रहा है। बार-बार निरीक्षण व थर्ड पार्टी जांच की जा रही है। इससे उद्योगों में भय का माहौल बना हुआ है। उद्यमी राजेश जैन ने बताया कि कई यूनिट को क्लोजर नोटिस जारी कर दिए गए हैं। उनका बिजली कनेक्शन भी तुरंत काट दिया जाता है। इसके लिए स्पष्ट नीति की कमी साफ तौर पर नजर आती है। सरकार का स्पष्ट रोडमैप न होने से परेशानी आ रही है।
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नियमों के नाम पर उद्योगों पर लगातार डाला जा रहा बोझ
नितिन अरोड़ा ने बताया कि उद्योगों पर नियमों के नाम पर लगातार बोझ डाला जा रहा है। पहले पेट कोक बंद किया। अड़ानी कौल का प्रयोग शुरू किया। फिर बायो फ्यूल, वेस्ट स्क्रब लगाने की कही गई। अब ओसीईएम इंस्टॉल और बैग फिल्टर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। हर बदलाव से उद्योग पर अतिरिक्त खर्च डाला जा रहा है। छोटे उद्योगों के लिए यह बदलाव कर पाना काफी मुश्किल है। शिव मल्होत्रा ने बताया कि एपीएम मानक की समस्या गंभीर बन गई है। पहले एसपीएम सीमा 800 थी, फिर 250, इसके बाद 80 और अब 50 कर दी गई है। वर्तमान परिस्थितियों में 50 एसपीएम प्राप्त करना उद्योगों के लिए लगभग असंभव है। इससे कई यूनिट बंद होने की कगार पर हैं। सरकार का नारा एक देश-एक कानून है, परंतु यह सख्ती केवल एनसीआर में ही लागू हो रही है। विकास चाचड़ा ने बताया कि प्रदूषण में उद्योगों की भागीदारी लगभग आठ प्रतिशत मानी जाती है। कई बार उद्योग 10-15 दिन बंद रहते हैं। इसके बाद एक्यूआई में कोई विशेष सुधार नहीं होता। इससे स्पष्ट है कि प्रदूषण के मुख्य कारण यातायात या धूल का उड़ना भी है।
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उद्यमियों ने समस्या के साथ समाधान पर की चर्चा
उद्यमियों ने शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के सामने समाधान पर भी चर्चा की। उन्हाेंने कहा कि छोटे, लघु व अति लघु उद्योगों को इन नियमों से आंशिक छूट दी जाए। इसमें तीन के बॉयलर तक छूट होनी चाहिए। बड़े उद्योगों को नए नियम लागू करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। सीईटीपी होने पर दूषित पानी पर अलग से ओसीईएमएस लगाने की अनिवार्यता समाप्त की जाए। वर्ल्ड बैंक ने हरियाणा के लिए पर्यावरण संरक्षण के लिय हरियाणा क्लीन एयर प्रोजेक्ट फॉर सस्टेंबल डेवलेपमेंट (एचसीएपीएसडी) के तहत 300 मिलियन डॉलर की पंजी प्रदान की है। पिछले कई वर्षों से लंबित जेडएलडी परियोजना को शीघ्र लागू किया जाएं। कुराड़, फरीदपुर, आसन व मूनक में भी सीईटीपी स्थापित किया जाए। एसपीएम की सीमा को पुनः 80 पर निर्धारित किया जाए। सीवरेज के बिल कई वर्षों के इकट्ठे बना दिए हैं। इनको कम किया जाएं।
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उद्यमियों ने कहा कि अमेरिका के टैरिफ वार और फिर पश्चिमी एशिया के देशों में तनाव से उद्योग बंद होने के कगार पर हैं। उद्योगों के लिए सरकार के पास भी कोई स्पष्ट नीति नहीं हैं। प्रदूषण के नाम पर उद्योगों को सील तक किया जा रहा है। एक ही झटके में बिजली कनेक्शन तक काट दिए जाते हैं। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने उद्यमियों को इस समस्या में साथ खड़े होने का भरोसा दिया और दो या तीन दिन में मुख्यमंत्री के साथ बैठक कराने की बात कही।
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उद्यमियों और शिक्षा मंत्री की बैठक वीरवार सायं चार बजे शुरू की और करीब एक घंटे तक चली। पानीपत डायर्स एसोसिएशन के प्रधान नितिन अरोड़ा ने सेक्टर-29 पार्ट-एक, दो व सेक्टर 25 में एचएसआईआईडीसी द्वारा लगभग 13.50 करोड़ रुपये की लागत से सड़क बनाए जाने पर मंत्री का आभार जताया। इसके साथ सेक्टर-29 पार्ट 2 में 123.40 करोड़ की लागत से 21 एमएलडी का सीईटीपी निर्माण जल्द शुरू कराने की मांग की।
उन्होंने बताया कि इसका टेंडर लग चुका है। एचएसवीपी द्वारा लगभग 5.30 करोड़ रुपये की लागत से ट्यूबवेल और पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। कृष्णा लॉन के नजदीक पार्क निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस मौके पर सेक्टर-29-वन के प्रधान श्रीभगवान अग्रवाल, सेक्टर-25-एक के प्रधान एचएस धम्मू, कारपेट एसोसिएशन के प्रधान अनिल मित्तल, डाइज एंड केमिकल के प्रधान अशोक बठला, कुराड़ एसोसिएशन के प्रधान नवीन बंसल, फरीदपुर एसोसिएशन प्रधान पुनीत जैन, बरसत रोड गोशाला के प्रधान राजीव जैन, 25-2 माइक्रो के प्रधान प्रमोद शर्मा, बलदेव लखीन, अंकुर गुप्ता, पुरुषोत्तम शर्मा, भारत बांगा, मनीष नंदवानी , डॉ अनिल, अजय मालिक, राजपाल, अंकित तायल, नरेंद्र नरूला, दीपक बजाज, रमेश माटा व मनोज गुप्ता मौजूद रहे।
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उद्यमी और किसान पर्यावरण संरक्षण कर रहे
नितिन अरोड़ा ने कहा कि रंगाई उद्योग टेक्सटाइल सेक्टर की रीढ़ है। पानीपत का हथकरघा उद्योग विश्व मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना चुका है। निर्यात व घरेलू बाजार में आगे हैं। उद्योग पर्यावरण विरोधी नहीं है। वे प्रदूषण को कम करने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध हैं। पौधरोपण जैसे कार्य निरंतर कर रहे हैं। डाई उद्योग एग्रीकल्चर वेस्ट का प्रयोग कर रहे हैं। किसान भी अब इससे आमदनी कर रहे हैं। इससे प्रदूषण पहले की अपेक्षा कम हुआ है। उन्होंने कहा कि रंगाई के चलते उद्योगों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
हरियाणा पर्यावरण प्रबंधन सोसायटी के प्रधान भीम राणा ने बताया कि सीपीसीबी, सीएक्यूएम और एचएसपीसीबी दिल्ली एनसीआर में लगातार नए नियम लागू कर रहा है। बार-बार निरीक्षण व थर्ड पार्टी जांच की जा रही है। इससे उद्योगों में भय का माहौल बना हुआ है। उद्यमी राजेश जैन ने बताया कि कई यूनिट को क्लोजर नोटिस जारी कर दिए गए हैं। उनका बिजली कनेक्शन भी तुरंत काट दिया जाता है। इसके लिए स्पष्ट नीति की कमी साफ तौर पर नजर आती है। सरकार का स्पष्ट रोडमैप न होने से परेशानी आ रही है।
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नियमों के नाम पर उद्योगों पर लगातार डाला जा रहा बोझ
नितिन अरोड़ा ने बताया कि उद्योगों पर नियमों के नाम पर लगातार बोझ डाला जा रहा है। पहले पेट कोक बंद किया। अड़ानी कौल का प्रयोग शुरू किया। फिर बायो फ्यूल, वेस्ट स्क्रब लगाने की कही गई। अब ओसीईएम इंस्टॉल और बैग फिल्टर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। हर बदलाव से उद्योग पर अतिरिक्त खर्च डाला जा रहा है। छोटे उद्योगों के लिए यह बदलाव कर पाना काफी मुश्किल है। शिव मल्होत्रा ने बताया कि एपीएम मानक की समस्या गंभीर बन गई है। पहले एसपीएम सीमा 800 थी, फिर 250, इसके बाद 80 और अब 50 कर दी गई है। वर्तमान परिस्थितियों में 50 एसपीएम प्राप्त करना उद्योगों के लिए लगभग असंभव है। इससे कई यूनिट बंद होने की कगार पर हैं। सरकार का नारा एक देश-एक कानून है, परंतु यह सख्ती केवल एनसीआर में ही लागू हो रही है। विकास चाचड़ा ने बताया कि प्रदूषण में उद्योगों की भागीदारी लगभग आठ प्रतिशत मानी जाती है। कई बार उद्योग 10-15 दिन बंद रहते हैं। इसके बाद एक्यूआई में कोई विशेष सुधार नहीं होता। इससे स्पष्ट है कि प्रदूषण के मुख्य कारण यातायात या धूल का उड़ना भी है।
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उद्यमियों ने समस्या के साथ समाधान पर की चर्चा
उद्यमियों ने शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के सामने समाधान पर भी चर्चा की। उन्हाेंने कहा कि छोटे, लघु व अति लघु उद्योगों को इन नियमों से आंशिक छूट दी जाए। इसमें तीन के बॉयलर तक छूट होनी चाहिए। बड़े उद्योगों को नए नियम लागू करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। सीईटीपी होने पर दूषित पानी पर अलग से ओसीईएमएस लगाने की अनिवार्यता समाप्त की जाए। वर्ल्ड बैंक ने हरियाणा के लिए पर्यावरण संरक्षण के लिय हरियाणा क्लीन एयर प्रोजेक्ट फॉर सस्टेंबल डेवलेपमेंट (एचसीएपीएसडी) के तहत 300 मिलियन डॉलर की पंजी प्रदान की है। पिछले कई वर्षों से लंबित जेडएलडी परियोजना को शीघ्र लागू किया जाएं। कुराड़, फरीदपुर, आसन व मूनक में भी सीईटीपी स्थापित किया जाए। एसपीएम की सीमा को पुनः 80 पर निर्धारित किया जाए। सीवरेज के बिल कई वर्षों के इकट्ठे बना दिए हैं। इनको कम किया जाएं।

मंत्री महिपाल ढांडा को अपनी मांगों के लिए ज्ञापन सौंपते प्रधान नितिन अरोड़ा। संवाद
