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Panipat News: समूह से जुड़कर संगीता महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा, कॉस्मेटिक की दुकान से संभाली आर्थिक जिम्मेदारी
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संगीता।
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पानीपत। जिले के खोजकीपुर गांव की संगीता ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपनी जिंदगी में बड़ा बदलाव लाया है। कभी घर के कामकाज तक सीमित रहने वाली संगीता आज आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया बल्कि गांव की दूसरी महिलाओं को भी जागरूक करने का काम शुरू किया है।
संगीता ने बताया कि करीब चार साल पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया। शुरुआत में उन्हें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी लेकिन गांव की अन्य महिलाओं के कहने पर उन्होंने समूह की बैठकों में जाना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्हें समझ आने लगा कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं के लिए आर्थिक रूप से मजबूत बनने का एक अच्छा माध्यम है। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत करना सीखा।
पहले उनका पूरा समय घर के कामकाज में ही निकल जाता था। परिवार की आय सीमित होने के कारण कई बार आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। ऐसे समय में स्वयं सहायता समूह ने उन्हें नई दिशा दिखाई। उन्होंने सोचा कि अगर छोटा व्यवसाय शुरू किया जाए तो परिवार की आय बढ़ सकती है। करीब दो साल पहले समूह से थोड़े-थोड़े पैसे लेकर गांव में अपनी कॉस्मेटिक की दुकान शुरू की। शुरुआत में दुकान छोटी थी और सामान भी कम रखा गया था। धीरे-धीरे गांव की महिलाओं ने उनकी दुकान से सामान खरीदना शुरू किया।
परिवार का सहयोग और समूह की महिलाओं का समर्थन उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा। धीरे-धीरे दुकान की आय बढ़ी और अब वे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी योगदान दे रही हैं। वह मनरेगा योजना के बारे में भी गांव की महिलाओं को जागरूक करती हैं। महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के फायदे भी समझाती हैं।
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संगीता ने बताया कि करीब चार साल पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया। शुरुआत में उन्हें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी लेकिन गांव की अन्य महिलाओं के कहने पर उन्होंने समूह की बैठकों में जाना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्हें समझ आने लगा कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं के लिए आर्थिक रूप से मजबूत बनने का एक अच्छा माध्यम है। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत करना सीखा।
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पहले उनका पूरा समय घर के कामकाज में ही निकल जाता था। परिवार की आय सीमित होने के कारण कई बार आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। ऐसे समय में स्वयं सहायता समूह ने उन्हें नई दिशा दिखाई। उन्होंने सोचा कि अगर छोटा व्यवसाय शुरू किया जाए तो परिवार की आय बढ़ सकती है। करीब दो साल पहले समूह से थोड़े-थोड़े पैसे लेकर गांव में अपनी कॉस्मेटिक की दुकान शुरू की। शुरुआत में दुकान छोटी थी और सामान भी कम रखा गया था। धीरे-धीरे गांव की महिलाओं ने उनकी दुकान से सामान खरीदना शुरू किया।
परिवार का सहयोग और समूह की महिलाओं का समर्थन उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा। धीरे-धीरे दुकान की आय बढ़ी और अब वे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी योगदान दे रही हैं। वह मनरेगा योजना के बारे में भी गांव की महिलाओं को जागरूक करती हैं। महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के फायदे भी समझाती हैं।

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