सनौली। सरकार हर घर तक पीने के पानी पहुंचाने का दावा कर रही है लेकिन, धरातल पर इसकी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। झांबा गांव की महात्मा गांधी ग्रामीण बस्तीवासियों को पीने के पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
महिलाओं को सिर पर मटके रख जलालपुर गांव के खेतों से सबर्मिसेबल से पीने का पानी लाना पड़ रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद भी उनकी समस्या का हल नहीं हुआ। सनौली खंड के झांबा गांव में वर्ष 2009 में महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत करीब 90 पात्र लोगों को मुफ्त सौ गज के प्लाट मिले थे। योजना के तहत मिले प्लॉटों की रजिस्ट्री होने के बाद लोगों ने अपने प्लॉटों में कच्चे-पक्के मकान पिछले वर्ष बनाने का काम शुरू कर दिया। बस्ती लगभग आबाद हो चुकी है लेकिन अब भी बस्ती में मूलभूत सुविधाओं की कमी लोगों को खल रही है। पीने का पानी, न ही बिजली और तो और सभी गलियां भी कच्ची पड़ी हैं।
बिमला देवी, सावित्री, हुसन, बबली, सीमा, सीला, सरजो, मंजू, राजपति व सतपाल ने बताया कि सरकार ने गरीब लोगों को प्लॉट तो दे दिए है लेकिन बस्ती में उन्हें पीने के पानी तक भी सुविधा मुहैया नहीं करवाई जा रही। संवाद
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