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Panipat News: किसान भवन का विवाद गहराया, ट्रस्ट गठन पर उठे सवाल
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माई सिटी रिपोर्टरपानीपत। करीब 40 वर्षों के संघर्ष और किसानों के सहयोग से बने किसान भवन का विवाद गहरा गया है। किसान भवन के उप प्रधान अनिल कादियान सहित कई किसान नेताओं ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने गुपचुप तरीके से निजी ट्रस्ट बना भवन पर नियंत्रण करने की कोशिश की है। इससे किसानों में नाराजगी है।
वीरवार को किसान भवन में हुई बैठक में उप प्रधान अनिल कादियान ने 12 जुलाई को प्रस्तावित किसान महापंचायत की तैयारियों पर चर्चा की। कादियान ने आरोप लगाया कि मार्च में हुई गुप्त बैठक के बाद मई में भारतीय किसान भवन ट्रस्ट का गठन किया गया। बैठक में युवा किसान नेता सुधीर जाखड़ और पूर्व प्रधान सुरेश दहिया भी मौजूद रहे।
पदों के वितरण पर भी सवाल : किसान नेताओं का आरोप है कि किसान भवन पर पूरे जिले के किसानों का अधिकार है, लेकिन ट्रस्ट गठन में नियमों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि ट्रस्ट के प्रमुख पदों पर एक ही ब्लॉक के लोगों को जगह दी गई, जबकि समालखा, बापौली और सनौली जैसे क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
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उन्होंने आरोप लगाया कि किसान भवन का उपयोग किसानों की समस्याओं के समाधान के बजाय अन्य गतिविधियों के लिए करने की योजना है। साथ ही इसे कोल्ड स्टोरेज और व्यापारिक केंद्र
के रूप में विकसित करने की तैयारी का भी दावा किया।
धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराने की चेतावनी
युवा किसान नेता सुधीर जाखड़ ने कहा कि यदि ट्रस्ट गठन की प्रक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई और संबंधित लोगों ने किसानों के सामने अपना पक्ष नहीं रखा तो धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया जाएगा। अनिल कादियान ने कहा कि किसान भवन किसी व्यक्ति विशेष की निजी संपत्ति नहीं है और इसे निजी नियंत्रण में नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने पूर्व कार्यकाल को लेकर उठ रहे सवालों पर स्वतंत्र ऑडिट कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि ट्रस्ट के सात सदस्य किसान भवन के लिए अपनी एक-एक एकड़ जमीन देने को तैयार हों तो वह भवन निर्माण के लिए 11 लाख रुपये सहयोग देने को तैयार हैं। किसान नेताओं का दावा है कि कई गांवों में पंचायतें हो चुकी हैं और किसान भवन बचाओ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
इसी प्रकार उप प्रधान अनिल कादियान का दावा है कि ट्रस्ट के जरिए सात लोगों ने भवन की संपत्ति के प्रबंधन का अधिकार अपने पास ले लिया, जबकि इसकी जानकारी उप प्रधान, युवा प्रधान और ब्लॉक प्रधानों को नहीं दी गई।
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वीरवार को किसान भवन में हुई बैठक में उप प्रधान अनिल कादियान ने 12 जुलाई को प्रस्तावित किसान महापंचायत की तैयारियों पर चर्चा की। कादियान ने आरोप लगाया कि मार्च में हुई गुप्त बैठक के बाद मई में भारतीय किसान भवन ट्रस्ट का गठन किया गया। बैठक में युवा किसान नेता सुधीर जाखड़ और पूर्व प्रधान सुरेश दहिया भी मौजूद रहे।
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पदों के वितरण पर भी सवाल : किसान नेताओं का आरोप है कि किसान भवन पर पूरे जिले के किसानों का अधिकार है, लेकिन ट्रस्ट गठन में नियमों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि ट्रस्ट के प्रमुख पदों पर एक ही ब्लॉक के लोगों को जगह दी गई, जबकि समालखा, बापौली और सनौली जैसे क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
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उन्होंने आरोप लगाया कि किसान भवन का उपयोग किसानों की समस्याओं के समाधान के बजाय अन्य गतिविधियों के लिए करने की योजना है। साथ ही इसे कोल्ड स्टोरेज और व्यापारिक केंद्र
के रूप में विकसित करने की तैयारी का भी दावा किया।
धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराने की चेतावनी
युवा किसान नेता सुधीर जाखड़ ने कहा कि यदि ट्रस्ट गठन की प्रक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई और संबंधित लोगों ने किसानों के सामने अपना पक्ष नहीं रखा तो धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया जाएगा। अनिल कादियान ने कहा कि किसान भवन किसी व्यक्ति विशेष की निजी संपत्ति नहीं है और इसे निजी नियंत्रण में नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने पूर्व कार्यकाल को लेकर उठ रहे सवालों पर स्वतंत्र ऑडिट कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि ट्रस्ट के सात सदस्य किसान भवन के लिए अपनी एक-एक एकड़ जमीन देने को तैयार हों तो वह भवन निर्माण के लिए 11 लाख रुपये सहयोग देने को तैयार हैं। किसान नेताओं का दावा है कि कई गांवों में पंचायतें हो चुकी हैं और किसान भवन बचाओ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
इसी प्रकार उप प्रधान अनिल कादियान का दावा है कि ट्रस्ट के जरिए सात लोगों ने भवन की संपत्ति के प्रबंधन का अधिकार अपने पास ले लिया, जबकि इसकी जानकारी उप प्रधान, युवा प्रधान और ब्लॉक प्रधानों को नहीं दी गई।