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Panipat News: एसबीआई के सेवानिवृत्त कर्मी से 27.40 लाख रुपये की ठगी
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माई सिटी रिपोर्टर पानीपत। साइबर ठगों ने एसबीआई के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को क्रेडिट कार्ड बंद कराने का डर दिखाकर 27.40 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने पाकिस्तानी नंबर से कॉल कर खुद को एसबीआई का कस्टमर केयर अधिकारी बताया और पीड़ित को विश्वास में लेकर अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से रकम जमा करा ली।
मामले में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सेक्टर-6 निवासी सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 17 जून को उनके मोबाइल पर एक कॉल आई।
कॉल करने वाले ने स्वयं को एसबीआई का कस्टमर केयर अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड पर आईसीआईसीआई बैंक का एक क्रेडिट कार्ड संचालित है। जब उन्होंने ऐसे किसी कार्ड की जानकारी होने से इन्कार किया तो कॉलर ने इसे फर्जी कार्ड बताते हुए तुरंत बंद कराने की सलाह दी। आरोप है कि ठगों ने कार्ड बंद कराने की प्रक्रिया के नाम पर उन्हें अपने झांसे में लिया और अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा कराने के लिए कहा।
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इसके तहत पीड़ित ने 18 जून को इंडियन बैंक के खाते में आठ लाख रुपये, 19 जून को सेंट्रल बैंक के खाते में 10 लाख रुपये, 24 जून को रत्नाकर बैंक के खाते में 4.40 लाख रुपये तथा दो जुलाई को उसी बैंक के दूसरे खाते में पांच लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से जमा करा दिए। इसके बाद भी जब ठगों ने और रुपये की मांग की तो पीड़ित को संदेह हुआ। उन्होंने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और साइबर क्राइम थाने में लिखित शिकायत दी।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी दीपक ने बताया कि शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है।
n डबल ओटीपी सिस्टम के कारण अपनाया आरटीजीएस का तरीका
वरिष्ठ नागरिकों के खातों से ऑनलाइन लेनदेन के लिए डबल ओटीपी सुरक्षा प्रणाली लागू होने के कारण ठग ऑनलाइन ट्रांसफर नहीं करा सके। इसके बजाय उन्होंने पीड़ित से बैंक जाकर आरटीजीएस के माध्यम से अपने खातों में रकम जमा करवाई।
सेवानिवृत्त बैंककर्मी बन रहे निशाना
पुलिस के अनुसार हाल के दिनों में साइबर ठग विशेष रूप से सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारियों को निशाना बना रहे हैं। पानीपत में आठ दिन के भीतर यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले एक सेवानिवृत्त महिला बैंककर्मी से पेंशन अपडेट कराने के नाम पर 5.60 लाख रुपये की साइबर ठगी की गई थी।
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मामले में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सेक्टर-6 निवासी सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 17 जून को उनके मोबाइल पर एक कॉल आई।
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कॉल करने वाले ने स्वयं को एसबीआई का कस्टमर केयर अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड पर आईसीआईसीआई बैंक का एक क्रेडिट कार्ड संचालित है। जब उन्होंने ऐसे किसी कार्ड की जानकारी होने से इन्कार किया तो कॉलर ने इसे फर्जी कार्ड बताते हुए तुरंत बंद कराने की सलाह दी। आरोप है कि ठगों ने कार्ड बंद कराने की प्रक्रिया के नाम पर उन्हें अपने झांसे में लिया और अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा कराने के लिए कहा।
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इसके तहत पीड़ित ने 18 जून को इंडियन बैंक के खाते में आठ लाख रुपये, 19 जून को सेंट्रल बैंक के खाते में 10 लाख रुपये, 24 जून को रत्नाकर बैंक के खाते में 4.40 लाख रुपये तथा दो जुलाई को उसी बैंक के दूसरे खाते में पांच लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से जमा करा दिए। इसके बाद भी जब ठगों ने और रुपये की मांग की तो पीड़ित को संदेह हुआ। उन्होंने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और साइबर क्राइम थाने में लिखित शिकायत दी।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी दीपक ने बताया कि शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है।
n डबल ओटीपी सिस्टम के कारण अपनाया आरटीजीएस का तरीका
वरिष्ठ नागरिकों के खातों से ऑनलाइन लेनदेन के लिए डबल ओटीपी सुरक्षा प्रणाली लागू होने के कारण ठग ऑनलाइन ट्रांसफर नहीं करा सके। इसके बजाय उन्होंने पीड़ित से बैंक जाकर आरटीजीएस के माध्यम से अपने खातों में रकम जमा करवाई।
सेवानिवृत्त बैंककर्मी बन रहे निशाना
पुलिस के अनुसार हाल के दिनों में साइबर ठग विशेष रूप से सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारियों को निशाना बना रहे हैं। पानीपत में आठ दिन के भीतर यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले एक सेवानिवृत्त महिला बैंककर्मी से पेंशन अपडेट कराने के नाम पर 5.60 लाख रुपये की साइबर ठगी की गई थी।