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Panipat News: कागजों में उजाला, शहर में अंधेरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jul 2026 06:04 AM IST
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Light on paper, darkness in the city.
पानीपत। नगर निगम के शहर को दूधिया रोशनी से चमकाने के तमाम दावे धरातल पर प्रभावी नजर नहीं आ रहे हैं। सच्चाई यह है कि निगम के कागजों में शहर पूरी तरह जगमग हो रहा है, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और है। सूरज ढलते ही शहर के मुख्य मार्गों से लेकर रिहायशी कॉलोनियों तक में अंधेरा छा जाता है।
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नगर निगम की करीब 30 हजार स्ट्रीट लाइटें शहर में हैं। अमर उजाला ने शहर की हकीकत को जाने के लिए चार मुख्य सड़कों की पड़ताल की। शहर में करीब पांच हजार स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं। निगम के पास स्ट्रीट लाइटों की हर रोज 70 से 80 शिकायत आ रही हैं।
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पार्षद भी लाइटों को ठीक कराने की मांग सदन की बैठकों से लेकर अधिकारियों के कार्यालयों तक कई बार उठा चुके हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। स्ट्रीट लाइटों के समय पर ठीक न होने के कारण अब शहरवासियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। अंधेरे का फायदा उठाकर झपटमारी और चोरी जैसी वारदातें बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
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बाॅक्स
स्थान जहां पसरा रहता हैं अंधेरा
सड़क1- असंध रोड और हाली पार्क मार्ग
असंध रोड के साथ लगती कई मुख्य और संपर्क सड़कों पर लाइटें बंद होने से अंधेरा पसरा हुआ है। प्रभाकर अस्पताल के सामने वाली गली में तो स्थिति इतनी बदतर है कि रात के समय पैदल निकल पाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। स्थानीय निवासी सुभाष और दीपक ने बताया कि हाली पार्क की तरफ जाने वाली मुख्य सड़क पर भी लाइटें बंद हैं, जिससे पार्क में टहलने आने वाले बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानी होती है।

सड़क2 - सड़क पर रात के समय सफर करने में लगता है डर

ड्रेन नंबर-1 के साथ बनी सड़क इन दिनों पूरी तरह अंधेरे के आगोश में है। बबैल रोड के रहने वाले राजेंद्र और विवेक ने बताया कि इस मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें न जलने के कारण रात के समय वाहन चलाना बेहद खतरनाक हो गया है। ड्रेन किनारे अंधेरा होने से असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे राहगीर इस सड़क पर रात को अकेले निकलने में खौफ खाते हैं। कई बार शिकायतों के बाद भी इस संवेदनशील मार्ग की सुध नहीं ली गई।

सड़क 3-: पॉश इलाका सेक्टर-11-12 आंतरिक सड़कें लावारिस

शहर के मुख्य सेक्टर में शुमार होने वाले सेक्टर-11 और 12 की हालत भी कोई बेहतर नहीं है। कहने को तो यह वीआईपी एरिया है, लेकिन दोनों सेक्टर की कई आंतरिक और मुख्य सड़कों पर लगी स्ट्रीट लाइटें हफ्तों से बंद पड़ी हैं। स्थानीय निवासी सतीश और हरेंद्र ने रोष जताते हुए कहा कि भारी-भरकम टैक्स देने के बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। शाम होते ही यहां वॉक करना भी असुरक्षित हो जाता है।

सड़क 4-: बिशनस्वरूप कॉलोनी कोचिंग और लाइब्रेरी के छात्र परेशान

बिशनस्वरूप कॉलोनी शहर का प्रमुख शैक्षणिक हब बन चुकी है, जहां दर्जनों कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी संचालित हैं। देर रात तक इन लाइब्रेरियों में छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते हैं। छात्रों ने बताया कि जैसे ही शाम होती है, पूरी कॉलोनी में अंधेरा छा जाता है। पढ़ाई पूरी कर रात को घर लौटने वाले विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को अंधेरी सड़कों से गुजरते समय भारी असुरक्षा और डर का सामना करना पड़ता है।


वर्जन :
निगम में स्ट्रीट लाइट से संबंधित हर रोज 70 से 80 शिकायतें आ रही हैं। इसके लिए एचकेआरएम के अंतर्गत 30 से 32 कर्मचारी काम कर रहे हैं। इनको तुरंत ठीक करा दिया जाता है। कई बार एक से अधिक बार भी खराब हो जाती हैं। नगर निगम ने नई स्ट्रीट लाइटों का टेंडर लगा दिया है। इसके बाद प्राथमिकता के आधार पर सभी वार्डों की खराब लाइटों को बदला जाएगा।
देवेंद्र कुमार शर्मा, एसडीओ, नगर निगम।
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