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Panipat News: सावन में अनोखी कांवड़ों से सजी पानीपत की सड़कें
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पानीपत-हरिद्वार स्टेट हाईवे पर अंधेरे में आते कांवड़िए। संवाद
- फोटो : Samvad
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। सावन के पवित्र महीने में हर तरफ शिवभक्ति का रंग नजर आ रहा है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे शिवभक्तों की आस्था इस बार अनोखी कांवड़ों के रूप में सड़कों पर दिखाई दे रही है। कोई बग्गी कांवड़ लेकर चल रहा है तो कोई पालकी और खड़ी कांवड़ के साथ भोलेनाथ की भक्ति में लीन है। कांवड़ यात्रा के इस कठिन सफर में न थकान उनके कदम रोक पा रही है और न ही रास्तों की मुश्किलें।
900 किलो की बग्गी, 365 लीटर गंगाजल
पानीपत के गांव नारा निवासी सतनाम शनिवार को बग्गी कांवड़ के साथ शहर पहुंचे। सतनाम ने बताया कि वह छठी बार कांवड़ ला रहे हैं। इनमें बग्गी कांवड़ उनकी दूसरी कांवड़ है। वह 27 जुलाई को बग्गी लेकर हरिद्वार के लिए रवाना हुए थे और 30 जुलाई को उसमें 365 लीटर गंगाजल लेकर वापस लौटने की यात्रा शुरू की।
सतनाम के अनुसार, बग्गी, गंगाजल और राशन-पानी समेत कांवड़ का कुल वजन करीब 900 किलोग्राम है। भारी-भरकम बग्गी के साथ वह रोजाना औसतन 23 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भोलेनाथ की कृपा से इतनी भारी बग्गी खींचने के बावजूद उन्हें थकान महसूस नहीं होती।
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अर्धनारीश्वर रूपी कांवड़ बनी आकर्षण का केंद्र
रोहतक जिले का एक युवा शिवभक्त इस बार कंधों पर अर्धनारीश्वर रूपी कांवड़ लेकर चल रहा है। उसने बताया कि इस बार कुछ अलग कांवड़ लाने की इच्छा थी। इसके लिए उसने हरिद्वार के बाजारों में दो दिन तक कांवड़ की तलाश की। इसके बाद उसे अर्धनारीश्वर रूपी कांवड़ पसंद आई।
शिवभक्त ने बताया कि शुरुआत में कांवड़ का वजन उठाने में थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन भगवान शिव का ध्यान करने से यात्रा आसान होती चली गई।
मोटरसाइकिल को दिया नंदी का स्वरूप
एक बुजुर्ग शिवभक्त अपनी मोटरसाइकिल को भगवान शिव के वाहन नंदी का स्वरूप देकर कांवड़ यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने मोटरसाइकिल को नंदी की आकृति और धार्मिक सजावट से तैयार किया है।
श्रद्धालु ने बताया कि भोले बाबा को नंदी प्रिय हैं। इसी भावना के साथ उन्होंने गंगाजल के साथ नंदी स्वरूप वाहन को भी यात्रा में शामिल किया है। अनोखी कांवड़ों और सजे हुए वाहनों को देखने के लिए रास्ते में लोगों की भीड़ जुट रही है।
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पानीपत। सावन के पवित्र महीने में हर तरफ शिवभक्ति का रंग नजर आ रहा है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे शिवभक्तों की आस्था इस बार अनोखी कांवड़ों के रूप में सड़कों पर दिखाई दे रही है। कोई बग्गी कांवड़ लेकर चल रहा है तो कोई पालकी और खड़ी कांवड़ के साथ भोलेनाथ की भक्ति में लीन है। कांवड़ यात्रा के इस कठिन सफर में न थकान उनके कदम रोक पा रही है और न ही रास्तों की मुश्किलें।
900 किलो की बग्गी, 365 लीटर गंगाजल
पानीपत के गांव नारा निवासी सतनाम शनिवार को बग्गी कांवड़ के साथ शहर पहुंचे। सतनाम ने बताया कि वह छठी बार कांवड़ ला रहे हैं। इनमें बग्गी कांवड़ उनकी दूसरी कांवड़ है। वह 27 जुलाई को बग्गी लेकर हरिद्वार के लिए रवाना हुए थे और 30 जुलाई को उसमें 365 लीटर गंगाजल लेकर वापस लौटने की यात्रा शुरू की।
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सतनाम के अनुसार, बग्गी, गंगाजल और राशन-पानी समेत कांवड़ का कुल वजन करीब 900 किलोग्राम है। भारी-भरकम बग्गी के साथ वह रोजाना औसतन 23 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भोलेनाथ की कृपा से इतनी भारी बग्गी खींचने के बावजूद उन्हें थकान महसूस नहीं होती।
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अर्धनारीश्वर रूपी कांवड़ बनी आकर्षण का केंद्र
रोहतक जिले का एक युवा शिवभक्त इस बार कंधों पर अर्धनारीश्वर रूपी कांवड़ लेकर चल रहा है। उसने बताया कि इस बार कुछ अलग कांवड़ लाने की इच्छा थी। इसके लिए उसने हरिद्वार के बाजारों में दो दिन तक कांवड़ की तलाश की। इसके बाद उसे अर्धनारीश्वर रूपी कांवड़ पसंद आई।
शिवभक्त ने बताया कि शुरुआत में कांवड़ का वजन उठाने में थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन भगवान शिव का ध्यान करने से यात्रा आसान होती चली गई।
मोटरसाइकिल को दिया नंदी का स्वरूप
एक बुजुर्ग शिवभक्त अपनी मोटरसाइकिल को भगवान शिव के वाहन नंदी का स्वरूप देकर कांवड़ यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने मोटरसाइकिल को नंदी की आकृति और धार्मिक सजावट से तैयार किया है।
श्रद्धालु ने बताया कि भोले बाबा को नंदी प्रिय हैं। इसी भावना के साथ उन्होंने गंगाजल के साथ नंदी स्वरूप वाहन को भी यात्रा में शामिल किया है। अनोखी कांवड़ों और सजे हुए वाहनों को देखने के लिए रास्ते में लोगों की भीड़ जुट रही है।

पानीपत-हरिद्वार स्टेट हाईवे पर अंधेरे में आते कांवड़िए। संवाद- फोटो : Samvad

पानीपत-हरिद्वार स्टेट हाईवे पर अंधेरे में आते कांवड़िए। संवाद- फोटो : Samvad

पानीपत-हरिद्वार स्टेट हाईवे पर अंधेरे में आते कांवड़िए। संवाद- फोटो : Samvad