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Panipat News: प्रोडक्ट पासपोर्ट से मिलेगी एमएसएमई को नई पहचान
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माई सिटी रिपोर्टरपानीपत। डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट (डीपीपी) एमएसएमई के लिए वैश्विक बाजार में नई पहचान बनाने का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। इसके जरिए उत्पाद की पूरी जानकारी और निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होने से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा। साथ ही पानीपत के रीसाइक्लिंग टेक्सटाइल उद्योग के लिए निर्यात के नए अवसर भी खुलेंगे।
यह बात डेज होटल में आयोजित डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट विषयक कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कही। कार्यशाला में बताया गया कि वैश्विक व्यापार में अब केवल उत्पाद की गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी कीमत और समय पर आपूर्ति ही पर्याप्त नहीं है। अंतरराष्ट्रीय खरीदार यह भी जानना चाहते हैं कि उत्पाद कहां बना, उसमें किस प्रकार का कच्चा माल इस्तेमाल हुआ और उसके निर्माण का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा। इसी आवश्यकता को देखते हुए डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
माइक्रो इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के प्रधान प्रमोद गुप्ता ने कहा कि डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट को केवल यूरोपीय संघ (ईयू) के नियामकीय अनुपालन तक सीमित नहीं समझना चाहिए। यह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए बड़ा व्यावसायिक अवसर है। डीपीपी के माध्यम से उद्योग ग्राहक विश्वास मजबूत कर सकते हैं, सप्लाई चेन में पारदर्शिता ला सकते हैं और परिचालन क्षमता बढ़ाकर वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल कर सकते हैं।
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टेक्सटाइल उत्पादों की बढ़ेगी विश्वसनीयता
विश्व स्तर पर पुनर्चक्रित (रीसाइक्ल्ड) वस्त्रों के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान बना चुके पानीपत टेक्सटाइल क्लस्टर के लिए डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। डीपीपी अपनाने से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच पानीपत के टेक्सटाइल उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और निर्यात के नए अवसर उपलब्ध होंगे। प्रमोद गुप्ता ने उद्यमियों से आह्वान किया कि वे डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट को अतिरिक्त बाध्यता नहीं, बल्कि अपने व्यवसाय को भविष्य के अनुरूप बनाने वाले प्रभावी उपकरण के रूप में अपनाएं। कार्यशाला के दौरान उद्यमियों ने अपने अनुभव, सवाल और सुझाव भी साझा किए। विशेषज्ञों ने उद्योग की व्यावहारिक जरूरतों के अनुरूप प्रभावी प्रणालियां विकसित करने पर जोर दिया।
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यह बात डेज होटल में आयोजित डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट विषयक कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कही। कार्यशाला में बताया गया कि वैश्विक व्यापार में अब केवल उत्पाद की गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी कीमत और समय पर आपूर्ति ही पर्याप्त नहीं है। अंतरराष्ट्रीय खरीदार यह भी जानना चाहते हैं कि उत्पाद कहां बना, उसमें किस प्रकार का कच्चा माल इस्तेमाल हुआ और उसके निर्माण का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा। इसी आवश्यकता को देखते हुए डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
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माइक्रो इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के प्रधान प्रमोद गुप्ता ने कहा कि डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट को केवल यूरोपीय संघ (ईयू) के नियामकीय अनुपालन तक सीमित नहीं समझना चाहिए। यह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए बड़ा व्यावसायिक अवसर है। डीपीपी के माध्यम से उद्योग ग्राहक विश्वास मजबूत कर सकते हैं, सप्लाई चेन में पारदर्शिता ला सकते हैं और परिचालन क्षमता बढ़ाकर वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल कर सकते हैं।
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टेक्सटाइल उत्पादों की बढ़ेगी विश्वसनीयता
विश्व स्तर पर पुनर्चक्रित (रीसाइक्ल्ड) वस्त्रों के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान बना चुके पानीपत टेक्सटाइल क्लस्टर के लिए डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। डीपीपी अपनाने से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच पानीपत के टेक्सटाइल उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और निर्यात के नए अवसर उपलब्ध होंगे। प्रमोद गुप्ता ने उद्यमियों से आह्वान किया कि वे डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट को अतिरिक्त बाध्यता नहीं, बल्कि अपने व्यवसाय को भविष्य के अनुरूप बनाने वाले प्रभावी उपकरण के रूप में अपनाएं। कार्यशाला के दौरान उद्यमियों ने अपने अनुभव, सवाल और सुझाव भी साझा किए। विशेषज्ञों ने उद्योग की व्यावहारिक जरूरतों के अनुरूप प्रभावी प्रणालियां विकसित करने पर जोर दिया।