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Panipat News: हेपेटाइटिस-सी का खतरा बढ़ा तीन माह में मिले 289 मरीज
Wed, 29 Jul 2026 02:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Wed, 29 Jul 2026 02:49 AM IST
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जिला नागरिक अस्पताल में पंजीकरण के लिए लाइन में लगे मरीज। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। औद्योगिक नगरी पानीपत में हेपेटाइटिस-सी का संक्रमण तेजी से पांव पसार रहा है। बीते तीन महीनों (अप्रैल से जून) में ही जिला नागरिक अस्पताल में हेपेटाइटिस-सी के 289 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि इसी दौरान हेपेटाइटिस-बी के 36 मरीज सामने
आए हैं।
बीमारी के बढ़ते खतरे के बीच मंगलवार को विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर अस्पताल में विशेष जांच अभियान और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मंगलवार को की गई जांच के दौरान 45 संदिग्धों में से 5 लोगों में हेपेटाइटिस-सी की पुष्टि हुई है।
जिला नागरिक अस्पताल में मंगलवार को विश्व हैपेटाइटिस दिवस जागरूकता कार्यक्रम किया गया। नोडल अधिकारी डॉ. बिजेंद्र सिंह ने बताया कि हेपेटाइटिस पांच प्रकार (ए, बी, सी, डी और ई) का होता है। इनमें हेपेटाइटिस-बी और सी सबसे घातक हैं, जो संक्रमित रक्त, नशा करने वालों द्वारा एक ही सिरिंज का बार-बार इस्तेमाल, मानव शरीर के तरल पदार्थों (ह्यूमन फ्लूइड) और अधिक अल्कोहल के सेवन से फैलते हैं।
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वहीं हेपेटाइटिस-ए, डी और ई दूषित पानी व दूषित खानपान से फैलते हैं। हेपेटाइटिस-ए और ई सामान्यतः 10-15 दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन हेपेटाइटिस-सी इलाज न मिलने पर जानलेवा हो सकता है। उन्होंने मरीजों को अंधविश्वास छोड़ तुरंत इलाज शुरू कराने की सलाह दी। इस मौके पर एसएमओ डॉ. शशि लता, डॉ. केतन, डॉ. अमित पोरिया, डॉ. जैसमिन, डॉ. रजत, मधु और एचआई सुरेंद्र मौजूद रहे।
अस्पताल में जांच के लिए उपलब्ध हैं विशेष किट
स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी की रोकथाम के लिए जांच और इलाज तेज कर दिया है। अस्पताल में जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली एक किट की कीमत करीब 95 हजार रुपये है, जिससे 500 लोगों का टेस्ट होता है। वर्तमान में जिला नागरिक अस्पताल में हेपेटाइटिस-बी की दो और सी की तीन किट उपलब्ध हैं। इसके अलावा शुरुआती जांच के लिए छह हजार विशेष कार्ड हैं। डॉक्टरों ने नागरिकों से अपील की है कि लक्षण दिखते ही तुरंत जांच कराएं।
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पानीपत। औद्योगिक नगरी पानीपत में हेपेटाइटिस-सी का संक्रमण तेजी से पांव पसार रहा है। बीते तीन महीनों (अप्रैल से जून) में ही जिला नागरिक अस्पताल में हेपेटाइटिस-सी के 289 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि इसी दौरान हेपेटाइटिस-बी के 36 मरीज सामने
आए हैं।
बीमारी के बढ़ते खतरे के बीच मंगलवार को विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर अस्पताल में विशेष जांच अभियान और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मंगलवार को की गई जांच के दौरान 45 संदिग्धों में से 5 लोगों में हेपेटाइटिस-सी की पुष्टि हुई है।
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जिला नागरिक अस्पताल में मंगलवार को विश्व हैपेटाइटिस दिवस जागरूकता कार्यक्रम किया गया। नोडल अधिकारी डॉ. बिजेंद्र सिंह ने बताया कि हेपेटाइटिस पांच प्रकार (ए, बी, सी, डी और ई) का होता है। इनमें हेपेटाइटिस-बी और सी सबसे घातक हैं, जो संक्रमित रक्त, नशा करने वालों द्वारा एक ही सिरिंज का बार-बार इस्तेमाल, मानव शरीर के तरल पदार्थों (ह्यूमन फ्लूइड) और अधिक अल्कोहल के सेवन से फैलते हैं।
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वहीं हेपेटाइटिस-ए, डी और ई दूषित पानी व दूषित खानपान से फैलते हैं। हेपेटाइटिस-ए और ई सामान्यतः 10-15 दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन हेपेटाइटिस-सी इलाज न मिलने पर जानलेवा हो सकता है। उन्होंने मरीजों को अंधविश्वास छोड़ तुरंत इलाज शुरू कराने की सलाह दी। इस मौके पर एसएमओ डॉ. शशि लता, डॉ. केतन, डॉ. अमित पोरिया, डॉ. जैसमिन, डॉ. रजत, मधु और एचआई सुरेंद्र मौजूद रहे।
अस्पताल में जांच के लिए उपलब्ध हैं विशेष किट
स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी की रोकथाम के लिए जांच और इलाज तेज कर दिया है। अस्पताल में जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली एक किट की कीमत करीब 95 हजार रुपये है, जिससे 500 लोगों का टेस्ट होता है। वर्तमान में जिला नागरिक अस्पताल में हेपेटाइटिस-बी की दो और सी की तीन किट उपलब्ध हैं। इसके अलावा शुरुआती जांच के लिए छह हजार विशेष कार्ड हैं। डॉक्टरों ने नागरिकों से अपील की है कि लक्षण दिखते ही तुरंत जांच कराएं।