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Panipat News: कलश यात्रा के साथ शुरू हुई शिव महापुराण कथा
Tue, 18 Aug 2026 02:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Tue, 18 Aug 2026 02:35 AM IST
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शिव महापुराण कथा करते आचार्य लालमणि पांडेय। स्रोत : मंदिर
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। प्राचीन सिद्ध देवी मंदिर में सोमवार से साप्ताहिक श्री शिव महापुराण कथामृत का शुभारंभ किया। पहले दिन कलश यात्रा निकालने के साथ कथा शुरू की। कथावाचक मंदिर के आचार्य लालमणि पांडेय रहे। इनके साथ मुरथल से स्वामी दयानंद सरस्वती महाराज, हरिद्वार से महामंडलेश्वर स्वामी अरुण दास महाराज और प्रेम मंदिर से कांता देवी महाराज के सानिध्य मिला। कार्यक्रम में मुख्य यजमान नरेश सिंगला और सुशील सिंगला रहे।
आचार्य लालमणि पांडेय बताया कि ऋषियों ने कहा कि हमें कथा न सुनाएं, हमें कथा का सार सुनाएं। जो शिव की प्राप्ति हो सके। तब उन्होंने शिव कथा का सार सुनाया। यह सार अंतरात्मा को शुद्ध करने वाला है, इस शिव पुराण का श्रवण पापों से मुक्त करने वाला, संसार के सभी सुख देने वाला, मनोकामना पूर्ण करने वाला है, अंत में परम पद को प्राप्त कराने वाला है। जो निरंतर इस शिव पुराण का पूजन करते हैं या सत्कार करते हैं उन्हें सभी प्रकार के धर्म और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
शिव पुराण के पहले दिन महात्म्य में लिखा है कि देवराज नाम के एक ब्राह्मण थे। वे दूसरों का धन ले लेते थे। अंत में देवराज वेश्यावृत्ति भी करने लगे थे। एक बार वे घूमते हुए प्रयागराज पहुंचे। वहां एक ब्राह्मण शिव पुराण की कथा सुन रहे थे। उनके भी कानों में शिव पुराण की कथा पड़ी। कथा सुनने मात्र से उनका मन शांत हो गया और वे शिव की भक्ति में लीन रहने लगे।
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मंदिर के प्रधान पवन बंसल ने बताया कि कथा के पहले दिन आचार्य ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन माह में शिव पुराण सुनने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। भक्तों को शांति, सुख-शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है और शिव भक्ति की प्राप्ति होती है। कार्यक्रम के बाद महिलाओं ने भजन-कीर्तन किया और आरती कर समापन पर सभी को प्रसाद वितरित किया गया।
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पानीपत। प्राचीन सिद्ध देवी मंदिर में सोमवार से साप्ताहिक श्री शिव महापुराण कथामृत का शुभारंभ किया। पहले दिन कलश यात्रा निकालने के साथ कथा शुरू की। कथावाचक मंदिर के आचार्य लालमणि पांडेय रहे। इनके साथ मुरथल से स्वामी दयानंद सरस्वती महाराज, हरिद्वार से महामंडलेश्वर स्वामी अरुण दास महाराज और प्रेम मंदिर से कांता देवी महाराज के सानिध्य मिला। कार्यक्रम में मुख्य यजमान नरेश सिंगला और सुशील सिंगला रहे।
आचार्य लालमणि पांडेय बताया कि ऋषियों ने कहा कि हमें कथा न सुनाएं, हमें कथा का सार सुनाएं। जो शिव की प्राप्ति हो सके। तब उन्होंने शिव कथा का सार सुनाया। यह सार अंतरात्मा को शुद्ध करने वाला है, इस शिव पुराण का श्रवण पापों से मुक्त करने वाला, संसार के सभी सुख देने वाला, मनोकामना पूर्ण करने वाला है, अंत में परम पद को प्राप्त कराने वाला है। जो निरंतर इस शिव पुराण का पूजन करते हैं या सत्कार करते हैं उन्हें सभी प्रकार के धर्म और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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शिव पुराण के पहले दिन महात्म्य में लिखा है कि देवराज नाम के एक ब्राह्मण थे। वे दूसरों का धन ले लेते थे। अंत में देवराज वेश्यावृत्ति भी करने लगे थे। एक बार वे घूमते हुए प्रयागराज पहुंचे। वहां एक ब्राह्मण शिव पुराण की कथा सुन रहे थे। उनके भी कानों में शिव पुराण की कथा पड़ी। कथा सुनने मात्र से उनका मन शांत हो गया और वे शिव की भक्ति में लीन रहने लगे।
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मंदिर के प्रधान पवन बंसल ने बताया कि कथा के पहले दिन आचार्य ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन माह में शिव पुराण सुनने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। भक्तों को शांति, सुख-शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है और शिव भक्ति की प्राप्ति होती है। कार्यक्रम के बाद महिलाओं ने भजन-कीर्तन किया और आरती कर समापन पर सभी को प्रसाद वितरित किया गया।

शिव महापुराण कथा करते आचार्य लालमणि पांडेय। स्रोत : मंदिर