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Panipat News: कंस का साम्राज्य समाप्त करने को विष्णु ने लिया बालकृष्ण रूप
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कुरुक्षेत्र। सेक्टर-9 लोटस ग्रीन सिटी में मंगलवार को श्रीमद्भागवत कथा के दौरान प्रवचनों की अद्भुत श्रृंखला चलती रही। कथावाचक अनिल शास्त्री ने रोचक प्रसंग सुनाकर भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। कथा के बीच में कर्णप्रिय संतीमयी धुनों पर श्रद्धालु मस्ती में झूमते रहे।
शास्त्री ने कहा कि भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र दिन बुधवार की अंधेरी रात में भगवान कृष्ण ने देवकी के आठवें संतान के रूप में जन्म लिया। श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही कोठरी प्रकाशमय हो गई। तब तक आकाशवाणी हुई कि विष्णुजी ने कृष्ण जी के अवतार में देवकी के कोख में जन्म लिया है। श्रीकृष्ण को गोकुल में बाबा नंद के पास छोड़ आएं और उनके घर एक कन्या जन्मी है, उसे मथुरा ला कर कंस को सौंप दें। भगवान विष्णु के आदेश से वासुदेव जी भगवान कृष्ण को अपने सिर पर रखकर नंद जी के घर की ओर चल दिए।
भगवान विष्णु की माया से सभी पहरेदार सो गए, कारागार के दरवाजे खुल गए। आकाशवाणी सुनते ही वासुदेव के हाथों की हथकड़ी खुल गई। वासुदेव जी ने सूप में बाल गोपाल को रखकर सिर पर रख लिया और गोकुल की ओर चल पड़े। वासुदेव भगवान कृष्ण को लेकर नंद जी के यहां सकुशल पहुंच गए और वहां से उनकी नवजात कन्या को लेकर वापस आ गए। जब कंस को देवकी की आठवीं संतान के जन्म की सूचना मिली। वह तत्काल कारागार में आया और उस कन्या को छीनकर पृथ्वी पर पटकना चाहा, लेकिन वह कन्या उसके हाथ से निकल कर आसमान में चली गई। फिर कन्या ने कहा- ‘हे मूर्ख कंस, तूझे मारने वाला जन्म ले चुका है और वह वृंदावन पहुंच गया है।
वह कन्या कोई और नहीं, योग माया थी। बाबा नंद और उनकी पत्नी मां यशोदा ने कृष्णजी का पालन-पोषण किया। राजा कंस ने कृष्णजी का पता लगाकर उन्हें मारने की खूब कोशिश की, लेकिन विफल हुई। अंत में श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया। राजा उग्रसेन को फिर मथुरा की राजगद्दी सौंप दी। इस अवसर पर आचार्य रंगनाथ शास्त्री, डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ हिमांशु जैन, बलवान गुज्जर, अजय गोयल, डॉ. आनंद सिंह, जयप्रकाश शास्त्री, डॉ. छाया सिंह, मीरा सिंह, भावना शर्मा, सरिता शर्मा और सर्वजीत देवी एवं अन्य महिला श्रद्धालुओं ने कथा का आनंद लिया।
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ज्ञानयज्ञ के उपलक्ष्य में निकाली कलश यात्रा के साथ कथा शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र।
श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञानयज्ञ के उपलक्ष्य में शहर में कलश यात्रा निकाली गई, जिसके साथ कथा भी शुरू हुई। महिलाओं ने सिर पर कलश रख जय-जयकार करती यात्रा का भारतीय परंपरा का धार्मिक एवं सांस्कृतिक संदेश दिया। अगुवाई कथाव्यास पंडित आचार्य राजेश वत्स ने की। परिक्रमा दुर्गा नगर, लक्ष्मण कालोनी, रामनगर, दक्षिणमुखी श्री हनुमान मंदिर से होकर नाम संकीर्तन कर भगवान का गुणगान करते हुए कथास्थल साधु फार्म नरकातारी रोड आजाद नगर में मुख्य यजमान सुरेंद्र शर्मा बारना के निवास पर पहुंची।
रामलाल, श्यामलाल, भगवान दास, अमन भार्गव, दिनेश, पंकज, एमसी नरेंद्र शर्मा, कृष्णपाल बारना ने कलश यात्रा का स्वागत किया। आचार्य वत्स ने कथा में बताया कि भगवान ने हर स्थिति में अपने भक्त को संभाला है। आराधना करके मनुष्य ने परमात्मा तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की। ईश्वर के प्रति आस्थावान रहते हुए जनकल्याण के कार्य करने चाहिए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे।
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शास्त्री ने कहा कि भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र दिन बुधवार की अंधेरी रात में भगवान कृष्ण ने देवकी के आठवें संतान के रूप में जन्म लिया। श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही कोठरी प्रकाशमय हो गई। तब तक आकाशवाणी हुई कि विष्णुजी ने कृष्ण जी के अवतार में देवकी के कोख में जन्म लिया है। श्रीकृष्ण को गोकुल में बाबा नंद के पास छोड़ आएं और उनके घर एक कन्या जन्मी है, उसे मथुरा ला कर कंस को सौंप दें। भगवान विष्णु के आदेश से वासुदेव जी भगवान कृष्ण को अपने सिर पर रखकर नंद जी के घर की ओर चल दिए।
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भगवान विष्णु की माया से सभी पहरेदार सो गए, कारागार के दरवाजे खुल गए। आकाशवाणी सुनते ही वासुदेव के हाथों की हथकड़ी खुल गई। वासुदेव जी ने सूप में बाल गोपाल को रखकर सिर पर रख लिया और गोकुल की ओर चल पड़े। वासुदेव भगवान कृष्ण को लेकर नंद जी के यहां सकुशल पहुंच गए और वहां से उनकी नवजात कन्या को लेकर वापस आ गए। जब कंस को देवकी की आठवीं संतान के जन्म की सूचना मिली। वह तत्काल कारागार में आया और उस कन्या को छीनकर पृथ्वी पर पटकना चाहा, लेकिन वह कन्या उसके हाथ से निकल कर आसमान में चली गई। फिर कन्या ने कहा- ‘हे मूर्ख कंस, तूझे मारने वाला जन्म ले चुका है और वह वृंदावन पहुंच गया है।
वह कन्या कोई और नहीं, योग माया थी। बाबा नंद और उनकी पत्नी मां यशोदा ने कृष्णजी का पालन-पोषण किया। राजा कंस ने कृष्णजी का पता लगाकर उन्हें मारने की खूब कोशिश की, लेकिन विफल हुई। अंत में श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया। राजा उग्रसेन को फिर मथुरा की राजगद्दी सौंप दी। इस अवसर पर आचार्य रंगनाथ शास्त्री, डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ हिमांशु जैन, बलवान गुज्जर, अजय गोयल, डॉ. आनंद सिंह, जयप्रकाश शास्त्री, डॉ. छाया सिंह, मीरा सिंह, भावना शर्मा, सरिता शर्मा और सर्वजीत देवी एवं अन्य महिला श्रद्धालुओं ने कथा का आनंद लिया।
ज्ञानयज्ञ के उपलक्ष्य में निकाली कलश यात्रा के साथ कथा शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र।
श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञानयज्ञ के उपलक्ष्य में शहर में कलश यात्रा निकाली गई, जिसके साथ कथा भी शुरू हुई। महिलाओं ने सिर पर कलश रख जय-जयकार करती यात्रा का भारतीय परंपरा का धार्मिक एवं सांस्कृतिक संदेश दिया। अगुवाई कथाव्यास पंडित आचार्य राजेश वत्स ने की। परिक्रमा दुर्गा नगर, लक्ष्मण कालोनी, रामनगर, दक्षिणमुखी श्री हनुमान मंदिर से होकर नाम संकीर्तन कर भगवान का गुणगान करते हुए कथास्थल साधु फार्म नरकातारी रोड आजाद नगर में मुख्य यजमान सुरेंद्र शर्मा बारना के निवास पर पहुंची।
रामलाल, श्यामलाल, भगवान दास, अमन भार्गव, दिनेश, पंकज, एमसी नरेंद्र शर्मा, कृष्णपाल बारना ने कलश यात्रा का स्वागत किया। आचार्य वत्स ने कथा में बताया कि भगवान ने हर स्थिति में अपने भक्त को संभाला है। आराधना करके मनुष्य ने परमात्मा तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की। ईश्वर के प्रति आस्थावान रहते हुए जनकल्याण के कार्य करने चाहिए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे।