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Rewari News: 10 कुष्ठ रोगियों का चल रहा इलाज, कमरा नंबर 211 में कराएं जांच

संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sat, 31 Jan 2026 12:04 AM IST
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10 leprosy patients are undergoing treatment, get tested in room number 211
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रेवाड़ी। जिले में वर्तमान में 10 कुष्ठ रोगियों का इलाज स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में चल रहा है। इन सभी मरीजों को नागरिक अस्पताल में निशुल्क जांच, उपचार और दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कुष्ठ रोग का इलाज आमतौर पर लगभग एक वर्ष तक चलता है। इस दौरान मरीज को नियमित रूप से दवाइयां दी जाती हैं, जिनका कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होता।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कुष्ठ की दवाइयां सुरक्षित हैं और डॉक्टरों की निगरानी में दी जाती हैं, इसलिए मरीजों को इलाज से डरने या झिझकने की जरूरत नहीं है।
हाथ-पैरों की उंगलियों में सुन्नपन, ऐसे घाव जिनमें दर्द महसूस नहीं होता, त्वचा पर गांठें, कोहनी और घुटनों की नसों का मोटा होना कुष्ठ के लक्षण हैं। रोग से प्रभावित व्यक्ति के शरीर पर तेलिया या तांबिया रंग के निशान उभर आते हैं, जिनमें संवेदना नहीं रहती।
विभाग की ओर से अपील की गई है कि यदि किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो वह तुरंत नागरिक अस्पताल के कमरा नंबर 211 में पहुंचकर निशुल्क जांच कराए। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जांच के बाद आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं।
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कुष्ठ रोगियों से घृणा न करें : डॉ. सुरेंद्र
सिविल सर्जन डॉ. नरेंद्र दहिया ने बताया कि इस वर्ष विश्व कुष्ठ रोग दिवस की थीम भेदभाव का अंत, गरिमा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोगियों की जांच, उपचार व दवाइयों की सुविधा नागरिक अस्पताल में निशुल्क उपलब्ध है। प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेंद्र यादव ने बताया कि कुष्ठ रोग का इलाज सामान्यतः लगभग एक वर्ष तक चलता है और इसकी दवाइयों का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। उन्होंने आमजन से अपील की है कि कुष्ठ रोगियों से घृणा न करें और उनके साथ सामान्य व्यवहार करें। इस अवसर पर मरीजों को फलहार भी वितरित किया गया।
समय पर पहचान और इलाज जरूरी
नोडल अधिकारी लेप्रोसी डॉ. विक्रम ने बताया कि कुष्ठ रोग कोई वंशानुगत बीमारी नहीं है और न ही यह छूने भर से फैलता है। समय पर पहचान और इलाज से इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। यदि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए तो आगे चलकर नसों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे हाथ-पैरों में कमजोरी या विकृति भी आ सकती है। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अनु जैन ने बताया कि कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्ति के शरीर पर तेलिया व तांबिया रंग के निशान हो जाते हैं, जिनमें छूने पर संवेदना नहीं रहती।
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