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Rewari News: मशीन में फंसा श्रमिक का हाथ, पौने घंटे तक मदद को तरसता रहा
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रेवाड़ी। फाॅयल पेपर बनाने वाली जीएलएस कंपनी की फैक्टरी में काम करते समय श्रमिक का हाथ मशीन में फंस गया जिससे पंजा क्षतिग्रस्त हो गया। आरोप है कि पौने घंटे तक श्रमिक मदद के लिए चिल्लाता रहा लेकिन कोई कर्मचारी या सुरक्षा गार्ड सहायता के लिए नहीं पहुंचा। बाद में पास की यूनिट में काम कर रहे श्रमिकों ने आवाज सुनकर उसे मशीन से बाहर निकाला।
गांव रोहड़ाई निवासी झाबर सिंह ने बताया कि वह पिछले करीब तीन वर्षों से फाॅयल पेपर बनाने वाली जीएलएस कंपनी में ठेकेदार के अधीन काम कर रहे थे। 8 मार्च की रात वह अपनी यूनिट में अकेले काम कर रहे थे। इसी दौरान मशीन पर काम करते समय अचानक उसका हाथ मशीन में फंस गया।
झाबर सिंह के अनुसार वह करीब पौने घंटे तक दर्द से चिल्लाते रहे लेकिन बचाने के लिए न तो कोई सिक्योरिटी गार्ड आया और न ही कोई सुपरवाइजर। बाद में दूसरी यूनिट में काम कर रहे दो श्रमिकों ने उनकी चीख सुनी और मौके पर पहुंचकर किसी तरह मशीन बंद कर उसका हाथ बाहर निकाला। उस समय वह अर्ध बेहोशी की हालत में थे।
हादसे के बाद कंपनी प्रबंधन ने एंबुलेंस की बजाय मोटरसाइकिल से अस्पताल पहुंचाया। वहां ऑपरेशन करवाने के नाम पर कोरे कागजों पर अंगूठा लगवा लिया गया। बाद में उसे पता चला कि उन कागजों में लिखा गया था कि यह हादसा लापरवाही से हुआ है।
कई बार सुपरवाइजर को मशीन ठीक कराने के लिए कहा था : झाबर सिंह
झाबर सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि जिस मशीन पर वह काम कर रहे थे उसकी स्पॉट कई दिनों से टूटी हुई थी। उसने कई बार सुपरवाइजर को मशीन ठीक करवाने के लिए कहा था लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। इसके अलावा कंपनी में सुरक्षा उपकरणों की भी कमी है और श्रमिकों को दस्ताने व जूते भी कई बार दूसरों के इस्तेमाल किए हुए पहनने पड़ते हैं। इस हादसे में झाबर सिंह के एक हाथ का पंजा बुरी तरह नष्ट हो गया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुट चुकी है।
वर्जन
पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले में अभी जांच की जा रही है। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। -विद्यासागर, प्रभारी, थाना रोहडाई
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गांव रोहड़ाई निवासी झाबर सिंह ने बताया कि वह पिछले करीब तीन वर्षों से फाॅयल पेपर बनाने वाली जीएलएस कंपनी में ठेकेदार के अधीन काम कर रहे थे। 8 मार्च की रात वह अपनी यूनिट में अकेले काम कर रहे थे। इसी दौरान मशीन पर काम करते समय अचानक उसका हाथ मशीन में फंस गया।
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झाबर सिंह के अनुसार वह करीब पौने घंटे तक दर्द से चिल्लाते रहे लेकिन बचाने के लिए न तो कोई सिक्योरिटी गार्ड आया और न ही कोई सुपरवाइजर। बाद में दूसरी यूनिट में काम कर रहे दो श्रमिकों ने उनकी चीख सुनी और मौके पर पहुंचकर किसी तरह मशीन बंद कर उसका हाथ बाहर निकाला। उस समय वह अर्ध बेहोशी की हालत में थे।
हादसे के बाद कंपनी प्रबंधन ने एंबुलेंस की बजाय मोटरसाइकिल से अस्पताल पहुंचाया। वहां ऑपरेशन करवाने के नाम पर कोरे कागजों पर अंगूठा लगवा लिया गया। बाद में उसे पता चला कि उन कागजों में लिखा गया था कि यह हादसा लापरवाही से हुआ है।
कई बार सुपरवाइजर को मशीन ठीक कराने के लिए कहा था : झाबर सिंह
झाबर सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि जिस मशीन पर वह काम कर रहे थे उसकी स्पॉट कई दिनों से टूटी हुई थी। उसने कई बार सुपरवाइजर को मशीन ठीक करवाने के लिए कहा था लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। इसके अलावा कंपनी में सुरक्षा उपकरणों की भी कमी है और श्रमिकों को दस्ताने व जूते भी कई बार दूसरों के इस्तेमाल किए हुए पहनने पड़ते हैं। इस हादसे में झाबर सिंह के एक हाथ का पंजा बुरी तरह नष्ट हो गया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुट चुकी है।
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पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले में अभी जांच की जा रही है। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। -विद्यासागर, प्रभारी, थाना रोहडाई