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Rewari News: एवरेस्ट फतह करने वाली आशा अब निशानेबाजी में दिखाएंगी दम, रचा इतिहास
Wed, 15 Jul 2026 11:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 15 Jul 2026 11:56 PM IST
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माउंट एवरेस्ट विजेता आशा ।
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रेवाड़ी। विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8,848 मीटर) पर भारत का तिरंगा फहराने वाली आशा को अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड सम्मान से नवाजा गया है। अब आशा रेवाड़ी शूटिंग अकादमी में अंतरराष्ट्रीय पिस्टल शूटिंग कोच विजय कुमार के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज के रूप में नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
आशा के पति हरियाणा पुलिस में उपनिरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। वह वर्तमान में अपने परिवार के साथ रेवाड़ी पुलिस लाइन में रह रही हैं। राजस्थान में स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत आशा ने हाल ही में माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी। हाई रेंज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से उनको पहली भारतीय सरकारी स्टाफ नर्स के रूप में माउंट एवरेस्ट फतह करने के लिए सम्मानित किया गया है।
रेवाड़ी शूटिंग अकादमी के निदेशक एवं अंतरराष्ट्रीय कोच विजय कुमार ने आशा को बधाई देते हुए कहा कि किसी भी संस्था के लिए यह गौरव की बात है कि उसके साथ जुड़ा खिलाड़ी पहले ही देश का नाम रोशन कर चुका हो। उन्होंने कहा कि आशा ने जिस तरह पर्वतारोहण में इतिहास रचा है, उसी तरह निशानेबाजी में भी वह देश का गौरव बढ़ाएंगी।
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आशा की उपलब्धियां देश की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्होंने साबित किया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और मेहनत के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
22 मई 2017 को रचा था इतिहास
22 मई 2017 को आशा ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर भारत का तिरंगा फहराया था। बर्फीले तूफान, कम ऑक्सीजन और बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने मजबूत इरादों और आत्मविश्वास के बल पर यह उपलब्धि हासिल की। स्टाफ नर्स के रूप में लोगों की सेवा करने के साथ ही उन्होंने खेलों में भी अपनी अलग पहचान बनाई है।
अब निशानेबाजी में मुकाम हासिल करने का लक्ष्य
माउंट एवरेस्ट फतह करने के बाद आशा ने अपने खेल जीवन को नई दिशा दी है। वह रेवाड़ी शूटिंग अकादमी से जुड़कर पिस्टल निशानेबाजी का प्रशिक्षण ले रही हैं। उनका लक्ष्य राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है। आशा का मानना है कि पर्वतारोहण और निशानेबाजी दोनों में मानसिक मजबूती, अनुशासन, धैर्य और एकाग्रता की आवश्यकता होती है। एवरेस्ट अभियान के दौरान मिली सीख अब उन्हें शूटिंग रेंज में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है।
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आशा के पति हरियाणा पुलिस में उपनिरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। वह वर्तमान में अपने परिवार के साथ रेवाड़ी पुलिस लाइन में रह रही हैं। राजस्थान में स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत आशा ने हाल ही में माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी। हाई रेंज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से उनको पहली भारतीय सरकारी स्टाफ नर्स के रूप में माउंट एवरेस्ट फतह करने के लिए सम्मानित किया गया है।
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रेवाड़ी शूटिंग अकादमी के निदेशक एवं अंतरराष्ट्रीय कोच विजय कुमार ने आशा को बधाई देते हुए कहा कि किसी भी संस्था के लिए यह गौरव की बात है कि उसके साथ जुड़ा खिलाड़ी पहले ही देश का नाम रोशन कर चुका हो। उन्होंने कहा कि आशा ने जिस तरह पर्वतारोहण में इतिहास रचा है, उसी तरह निशानेबाजी में भी वह देश का गौरव बढ़ाएंगी।
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आशा की उपलब्धियां देश की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्होंने साबित किया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और मेहनत के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
22 मई 2017 को रचा था इतिहास
22 मई 2017 को आशा ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर भारत का तिरंगा फहराया था। बर्फीले तूफान, कम ऑक्सीजन और बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने मजबूत इरादों और आत्मविश्वास के बल पर यह उपलब्धि हासिल की। स्टाफ नर्स के रूप में लोगों की सेवा करने के साथ ही उन्होंने खेलों में भी अपनी अलग पहचान बनाई है।
अब निशानेबाजी में मुकाम हासिल करने का लक्ष्य
माउंट एवरेस्ट फतह करने के बाद आशा ने अपने खेल जीवन को नई दिशा दी है। वह रेवाड़ी शूटिंग अकादमी से जुड़कर पिस्टल निशानेबाजी का प्रशिक्षण ले रही हैं। उनका लक्ष्य राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है। आशा का मानना है कि पर्वतारोहण और निशानेबाजी दोनों में मानसिक मजबूती, अनुशासन, धैर्य और एकाग्रता की आवश्यकता होती है। एवरेस्ट अभियान के दौरान मिली सीख अब उन्हें शूटिंग रेंज में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है।