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Rewari News: यूजीसी विनियम 2026 के समर्थन में पिछड़ा वर्ग कल्याण सभा ने सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 25 Feb 2026 12:59 AM IST
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रेवाड़ी। यूजीसी विनियम 2026 के समर्थन में रेवाड़ी विधायक लक्ष्मण सिंह यादव के कार्यालय पर ज्ञाप
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रेवाड़ी। पिछड़ा वर्ग कल्याण सभा ने रामेश्वर दयाल जांगिड़ के नेतृत्व में राष्ट्रपति और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन के नाम जिला रेवाड़ी के तीनों विधायकों के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में यूजीसी द्वारा 13 जनवरी को अधिसूचित विनियम 2026 का समर्थन किया गया।
इस अवसर पर रामेश्वर दयाल जांगिड़ ने कहा कि यह विनियम उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और समावेशिता को बढ़ावा देने वाला है और यह किसी भी वर्ग के हितों के विरुद्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि अब तक उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव की शिकायतें सामने आती रही हैं।
नया विनियम ऐसे भेदभाव को समाप्त कर सभी वर्गों को समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यह नियम केवल एससी-एसटी तक सीमित नहीं है बल्कि महिलाओं, दिव्यांगजनों एवं धर्म के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकने का भी प्रावधान करता है। ऐसे में इसे किसी एक वर्ग विशेष तक सीमित बताना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं है।
महिलाओं और दिव्यांगजनों में सभी वर्गों के लोग शामिल हैं। इसलिए यह विनियम व्यापक सामाजिक न्याय की भावना को मजबूत करता है। सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि भारत एक पंथनिरपेक्ष राष्ट्र है और शिक्षा संस्थानों में सम्मानजनक, निष्पक्ष व समावेशी वातावरण का निर्माण समय की आवश्यकता है। हर विद्यार्थी को उसकी पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर आगे बढ़ने और सफल होने का समान अवसर मिलना चाहिए। अंत में सभा ने केंद्र सरकार से मांग की कि विनियम 2026 को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए तथा किसी भी दबाव में आकर इसे कमजोर न किया जाए।
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इस अवसर पर रामेश्वर दयाल जांगिड़ ने कहा कि यह विनियम उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और समावेशिता को बढ़ावा देने वाला है और यह किसी भी वर्ग के हितों के विरुद्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि अब तक उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव की शिकायतें सामने आती रही हैं।
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नया विनियम ऐसे भेदभाव को समाप्त कर सभी वर्गों को समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यह नियम केवल एससी-एसटी तक सीमित नहीं है बल्कि महिलाओं, दिव्यांगजनों एवं धर्म के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकने का भी प्रावधान करता है। ऐसे में इसे किसी एक वर्ग विशेष तक सीमित बताना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं है।
महिलाओं और दिव्यांगजनों में सभी वर्गों के लोग शामिल हैं। इसलिए यह विनियम व्यापक सामाजिक न्याय की भावना को मजबूत करता है। सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि भारत एक पंथनिरपेक्ष राष्ट्र है और शिक्षा संस्थानों में सम्मानजनक, निष्पक्ष व समावेशी वातावरण का निर्माण समय की आवश्यकता है। हर विद्यार्थी को उसकी पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर आगे बढ़ने और सफल होने का समान अवसर मिलना चाहिए। अंत में सभा ने केंद्र सरकार से मांग की कि विनियम 2026 को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए तथा किसी भी दबाव में आकर इसे कमजोर न किया जाए।