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Rewari News: आज से पानी की घरों में होगी नियमित सप्लाई, रोटेशन से प्रभावित थी आपूर्ति
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रेवाड़ी में नहर में पानी आने के बाद गांव कालाका स्थित वाटर टैंकों को भरा जा रहा। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। पिछले एक माह से पेयजल की राशनिंग से जूझ रहे शहरवासियों को आज से नियमित रूप से पेयजल मिलेगा। सोनीपत के खूबडू हेड से 19 अप्रैल को रेवाड़ी के लिए पानी छोड़ा गया था।
अगर पानी नहीं छोड़ा गया होता तो कुछ दिन बाद ही तीन दिन छोड़कर जलापूर्ति करने की नौबत आ जाती। वहीं जेएलएन नहर में पानी पहुंचते ही कालाका और लिसाना में बने वॉटर टैंकों को भरा जा रहा है। इन टैंकों के भरने के बाद लोगों को 14 दिनों तक पानी दिया जा सकेगा।
शहर में पिछले एक माह से अल्टरनेट डे पर पानी की सप्लाई की जा रही है। नहर में पानी के रोटेशन के कारण पहले ही आपूर्ति प्रभावित थी लेकिन अब शेड्यूल में एक सप्ताह की देरी ने जनस्वास्थ्य विभाग के पास विकल्पों को सीमित कर दिया है। जेएलएन नहर का मौजूदा शेड्यूल 14 दिन चालू और 24 दिन बंद रहने का है।
वाटर टैंकों में 15 से 20 दिन का पानी हो सकता है स्टोरेज
शहर की पेयजल सप्लाई नहरी पानी पर आधारित है। सोनीपत के खुबडू हेड से पानी छोड़ा जाता है और जेएलएन से होते हुए कालाका में 5 व लिसाना में 3 वाटर टैंकों में पानी का स्टोरेज किया जाता है। लिसाना में अतिरिक्त पानी का स्टोरेज हो जाता है लेकिन कालाका में अतिरिक्त पानी जमा नहीं हो पाता।
यहां से अधिकतम 15 से 20 दिन ही पानी की नियमित आपूर्ति हो सकती है। इसलिए शेड्यूल बदलते ही पानी की समस्या गहरा गई थी।
दो दशक के बाद भी नहीं बन सके अतिरिक्त जलघर
शहर में पेयजल के लिए अतिरिक्त जलघर की दो दशक से जरूरत है। इसके लिए जमीन की तलाश की जा रही है लेकिन अभी तक नहीं मिल सकी है। ई-भूमि पोर्टल के जरिए भी जमीन देखी गई। जमीन पोर्टल पर तो डाली गई है जो केस बनाकर सरकार के पास भेजा हुआ है। अभी योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। जमीन मिलने पर ही वाटर टैंक का समाधान हो सकता है।
पानी की गुणवत्ता खराब होने से लोग रहते हैं परेशान
कुतुबपुर निवासी सुनील कुमार ने बताया कि पानी आता तो है लेकिन पानी की गुणवत्ता बहुत खराब होती है। इस बार नियमित पानी की सप्लाई से काफी हद तक राहत मिलेगी। बल्लुवाड़ा निवासी राजेश यादव ने बताया कि गर्मी के मौसम में पानी एक दिन छोड़कर मिलना एक बड़ी समस्या है।
वर्जन:
बुधवार से पानी की शहर में नियमित सप्लाई की जाएगी। लोगों से अपील है कि पानी को व्यर्थ न बहाएं। जितना हो सके पानी की बचत करें।
- हेमंत कुमार, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग
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रेवाड़ी। पिछले एक माह से पेयजल की राशनिंग से जूझ रहे शहरवासियों को आज से नियमित रूप से पेयजल मिलेगा। सोनीपत के खूबडू हेड से 19 अप्रैल को रेवाड़ी के लिए पानी छोड़ा गया था।
अगर पानी नहीं छोड़ा गया होता तो कुछ दिन बाद ही तीन दिन छोड़कर जलापूर्ति करने की नौबत आ जाती। वहीं जेएलएन नहर में पानी पहुंचते ही कालाका और लिसाना में बने वॉटर टैंकों को भरा जा रहा है। इन टैंकों के भरने के बाद लोगों को 14 दिनों तक पानी दिया जा सकेगा।
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शहर में पिछले एक माह से अल्टरनेट डे पर पानी की सप्लाई की जा रही है। नहर में पानी के रोटेशन के कारण पहले ही आपूर्ति प्रभावित थी लेकिन अब शेड्यूल में एक सप्ताह की देरी ने जनस्वास्थ्य विभाग के पास विकल्पों को सीमित कर दिया है। जेएलएन नहर का मौजूदा शेड्यूल 14 दिन चालू और 24 दिन बंद रहने का है।
वाटर टैंकों में 15 से 20 दिन का पानी हो सकता है स्टोरेज
शहर की पेयजल सप्लाई नहरी पानी पर आधारित है। सोनीपत के खुबडू हेड से पानी छोड़ा जाता है और जेएलएन से होते हुए कालाका में 5 व लिसाना में 3 वाटर टैंकों में पानी का स्टोरेज किया जाता है। लिसाना में अतिरिक्त पानी का स्टोरेज हो जाता है लेकिन कालाका में अतिरिक्त पानी जमा नहीं हो पाता।
यहां से अधिकतम 15 से 20 दिन ही पानी की नियमित आपूर्ति हो सकती है। इसलिए शेड्यूल बदलते ही पानी की समस्या गहरा गई थी।
दो दशक के बाद भी नहीं बन सके अतिरिक्त जलघर
शहर में पेयजल के लिए अतिरिक्त जलघर की दो दशक से जरूरत है। इसके लिए जमीन की तलाश की जा रही है लेकिन अभी तक नहीं मिल सकी है। ई-भूमि पोर्टल के जरिए भी जमीन देखी गई। जमीन पोर्टल पर तो डाली गई है जो केस बनाकर सरकार के पास भेजा हुआ है। अभी योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। जमीन मिलने पर ही वाटर टैंक का समाधान हो सकता है।
पानी की गुणवत्ता खराब होने से लोग रहते हैं परेशान
कुतुबपुर निवासी सुनील कुमार ने बताया कि पानी आता तो है लेकिन पानी की गुणवत्ता बहुत खराब होती है। इस बार नियमित पानी की सप्लाई से काफी हद तक राहत मिलेगी। बल्लुवाड़ा निवासी राजेश यादव ने बताया कि गर्मी के मौसम में पानी एक दिन छोड़कर मिलना एक बड़ी समस्या है।
वर्जन:
बुधवार से पानी की शहर में नियमित सप्लाई की जाएगी। लोगों से अपील है कि पानी को व्यर्थ न बहाएं। जितना हो सके पानी की बचत करें।
- हेमंत कुमार, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग

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