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Rewari News: तीन बार बैठक होने पर ग्रामसभा में कोरम पूरा करना बना चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 03 Feb 2026 12:44 AM IST
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विधायक कृष्ण कुमार को ज्ञापन सौंपते सरपंच। स्रोत : एसोसिएशन
- फोटो : शॉर्ट सर्किट से चूड़ी के गोदाम में लगी आग। वीडियो ग्रैव
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रेवाड़ी। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से विशेष ग्रामसभाओं के आयोजन के निर्देश दिए गए हैं लेकिन यह व्यवस्था व्यावहारिक रूप से बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।
सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार विशेष ग्रामसभा में 40 प्रतिशत, 30 प्रतिशत और 20 प्रतिशत ग्रामसभा सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है, मगर हकीकत यह है कि ब्लॉक की लगभग किसी भी ग्राम पंचायत में यह कोरम पूरा नहीं हो सका।
ब्लॉक खोल की सभी पंचायतों ने नियमों के अनुसार तीनों विशेष ग्रामसभाओं का आयोजन तो किया, लेकिन बार-बार प्रयास के बावजूद निर्धारित उपस्थिति का आंकड़ा हासिल नहीं हो पाया।
पंचायतों का कहना है कि ग्रामसभा को सफल बनाने के लिए मुनादी करवाई गई, सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया गया और कई जगहों पर व्यक्तिगत स्तर पर ग्रामीणों को सूचना भी दी गई, इसके बावजूद ग्रामसभा में लोगों की उपस्थिति बेहद कम रही।
सरपंच एसोसिएशन ब्लॉक खोल ने इस समस्या को गंभीर बताते हुए कहा है कि यदि कोरम पूरा न होने के कारण ग्रामसभाएं अमान्य मानी जाती रहीं, तो पंचायतों के कई जरूरी कार्य प्रभावित होंगे। विकास कार्यों की स्वीकृति, योजनाओं पर चर्चा और सरकारी निर्देशों के पालन में अनावश्यक देरी होगी, जिसका सीधा असर गांवों के विकास पर पड़ेगा।
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बावल विधायक डॉ. कृष्ण कुमार को ज्ञापन सौंपा
धारूहेड़ा, किशनपुर, नंगली गोधा, ढाणी राधा, भांडौर, चिमनाबास, ठोठवाल, आसरा का माजरा के सरंपचों ने इसे लेकर बावल विधायक डॉ. कृष्ण कुमार को सोमवार को ज्ञापन भी सौंपा है। कहना है कि वर्तमान समय में ग्रामीण क्षेत्रों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति काफी बदल चुकी है। गांवों के अधिकांश लोग रोजगार, नौकरी और व्यवसाय के सिलसिले में सुबह गांव से बाहर निकल जाते हैं और देर शाम ही वापस लौट पाते हैं। कई युवा पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में रहते हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग औद्योगिक क्षेत्रों या निजी कंपनियों में कार्यरत हैं। ऐसे में दिन के समय ग्रामसभा में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना लगभग असंभव हो जाता है। सरपंचों ने सुझाव दिया कि या तो उपस्थिति का प्रतिशत कम किया जाए, या फिर ग्रामसभा के आयोजन के समय और तरीकों में लचीलापन लाया जाए।
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सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार विशेष ग्रामसभा में 40 प्रतिशत, 30 प्रतिशत और 20 प्रतिशत ग्रामसभा सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है, मगर हकीकत यह है कि ब्लॉक की लगभग किसी भी ग्राम पंचायत में यह कोरम पूरा नहीं हो सका।
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ब्लॉक खोल की सभी पंचायतों ने नियमों के अनुसार तीनों विशेष ग्रामसभाओं का आयोजन तो किया, लेकिन बार-बार प्रयास के बावजूद निर्धारित उपस्थिति का आंकड़ा हासिल नहीं हो पाया।
पंचायतों का कहना है कि ग्रामसभा को सफल बनाने के लिए मुनादी करवाई गई, सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया गया और कई जगहों पर व्यक्तिगत स्तर पर ग्रामीणों को सूचना भी दी गई, इसके बावजूद ग्रामसभा में लोगों की उपस्थिति बेहद कम रही।
सरपंच एसोसिएशन ब्लॉक खोल ने इस समस्या को गंभीर बताते हुए कहा है कि यदि कोरम पूरा न होने के कारण ग्रामसभाएं अमान्य मानी जाती रहीं, तो पंचायतों के कई जरूरी कार्य प्रभावित होंगे। विकास कार्यों की स्वीकृति, योजनाओं पर चर्चा और सरकारी निर्देशों के पालन में अनावश्यक देरी होगी, जिसका सीधा असर गांवों के विकास पर पड़ेगा।
बावल विधायक डॉ. कृष्ण कुमार को ज्ञापन सौंपा
धारूहेड़ा, किशनपुर, नंगली गोधा, ढाणी राधा, भांडौर, चिमनाबास, ठोठवाल, आसरा का माजरा के सरंपचों ने इसे लेकर बावल विधायक डॉ. कृष्ण कुमार को सोमवार को ज्ञापन भी सौंपा है। कहना है कि वर्तमान समय में ग्रामीण क्षेत्रों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति काफी बदल चुकी है। गांवों के अधिकांश लोग रोजगार, नौकरी और व्यवसाय के सिलसिले में सुबह गांव से बाहर निकल जाते हैं और देर शाम ही वापस लौट पाते हैं। कई युवा पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में रहते हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग औद्योगिक क्षेत्रों या निजी कंपनियों में कार्यरत हैं। ऐसे में दिन के समय ग्रामसभा में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना लगभग असंभव हो जाता है। सरपंचों ने सुझाव दिया कि या तो उपस्थिति का प्रतिशत कम किया जाए, या फिर ग्रामसभा के आयोजन के समय और तरीकों में लचीलापन लाया जाए।
