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Rewari News: बारिश से आबोहवा में घुली ताज़गी, वायु गुणवत्ता सुधरी
Thu, 23 Jul 2026 11:40 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 23 Jul 2026 11:40 PM IST
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रेवाड़ी। लगातार हो रही बारिश से एक्यूआई का स्तर सुधरा है जिससे जिले की आबोहवा में ताजगी घुल गई है। छह महीनों में जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। इस माह एक्यूआई 40 से 90 के बीच दर्ज किया गया है। बारिश से वातावरण में मौजूद धूल नीचे बैठ गए हैं जिससे हवा स्वच्छ हो गई है।
बीते कुछ वर्षों में रेवाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और वाहनों की संख्या बढ़ने से प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ा है। विशेषकर सर्दियों और गर्मियों के दौरान हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच जाती है।
इस वर्ष भी जनवरी से जून के बीच कई बार एक्यूआई 250 से अधिक दर्ज किया गया, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। हालांकि जुलाई में मानसून सक्रिय होने के बाद स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार जनवरी, फरवरी, मार्च और जून के दौरान जिले का एक्यूआई कई दिनों तक 250 से ऊपर रहा। मार्च में यह 290 तक पहुंच गया था जबकि अप्रैल में 300 के आसपास एक्यूआई दर्ज किया गया।
जून में हुई हल्की बारिश से प्रदूषण के स्तर में गिरावट शुरू हुई और जुलाई में लगातार बारिश होने से एक्यूआई तेजी से नीचे आ गया। वर्तमान में जिले का एक्यूआई अधिकांश दिनों में 40 से 90 के बीच दर्ज किया जा रहा है जो संतोषजनक है।
पिछले एक सप्ताह के दौरान यह 80 से 130 के बीच बना रहा। बुधवार को एक्यूआई 67 और वीरवार को एक्यूआई 65 दर्ज किया गया है।
अगस्त तक एक्यूआई 150 से नीचे रहने के आसार
पर्यावरण एवं मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि बारिश से सूक्ष्म धूल कण नीचे बैठ जाते हैं जिससे हवा शुद्ध हो जाती है। इसी लिए जुलाई और अगस्त को सबसे स्वच्छ महीनों में गिना जाता है। यदि मानसूनी गतिविधियां इसी तरह जारी रहीं तो अगस्त तक जिले का एक्यूआई 150 से बने रहने की संभावना है। स्वच्छ हवा का सबसे अधिक लाभ बच्चों, बुजुर्गों और दमा, एलर्जी तथा अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को मिलता है। चिकित्सकों के अनुसार हवा में प्रदूषण कम होने से सांस लेने में राहत मिलती है और श्वसन संबंधी रोगों के मरीजों की परेशानी भी घटती है।
नियमित वर्षा और हवा से प्रदूषण का स्तर होता है कम
डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि मानसून के दौरान नियमित वर्षा और हवा के कारण प्रदूषण का स्तर कम हो जाता है। मानसून समाप्त होने के बाद वाहनों के धुएं, औद्योगिक उत्सर्जन और धूल के कारण एक्यूआई फिर बढ़ सकता है। कहा कि केवल बारिश के भरोसे प्रदूषण नियंत्रण संभव नहीं है। इसके लिए वाहन प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण, औद्योगिक इकाइयों के उत्सर्जन की नियमित निगरानी, निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के उपाय और अधिकाधिक पौधरोपण जैसे कदम उठाने होंगे। यदि इन उपायों पर गंभीरता से अमल किया जाए तो मानसून के बाद भी जिले की हवा स्वच्छ रखी जा सकती है।
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बीते कुछ वर्षों में रेवाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और वाहनों की संख्या बढ़ने से प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ा है। विशेषकर सर्दियों और गर्मियों के दौरान हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच जाती है।
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इस वर्ष भी जनवरी से जून के बीच कई बार एक्यूआई 250 से अधिक दर्ज किया गया, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। हालांकि जुलाई में मानसून सक्रिय होने के बाद स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार जनवरी, फरवरी, मार्च और जून के दौरान जिले का एक्यूआई कई दिनों तक 250 से ऊपर रहा। मार्च में यह 290 तक पहुंच गया था जबकि अप्रैल में 300 के आसपास एक्यूआई दर्ज किया गया।
जून में हुई हल्की बारिश से प्रदूषण के स्तर में गिरावट शुरू हुई और जुलाई में लगातार बारिश होने से एक्यूआई तेजी से नीचे आ गया। वर्तमान में जिले का एक्यूआई अधिकांश दिनों में 40 से 90 के बीच दर्ज किया जा रहा है जो संतोषजनक है।
पिछले एक सप्ताह के दौरान यह 80 से 130 के बीच बना रहा। बुधवार को एक्यूआई 67 और वीरवार को एक्यूआई 65 दर्ज किया गया है।
अगस्त तक एक्यूआई 150 से नीचे रहने के आसार
पर्यावरण एवं मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि बारिश से सूक्ष्म धूल कण नीचे बैठ जाते हैं जिससे हवा शुद्ध हो जाती है। इसी लिए जुलाई और अगस्त को सबसे स्वच्छ महीनों में गिना जाता है। यदि मानसूनी गतिविधियां इसी तरह जारी रहीं तो अगस्त तक जिले का एक्यूआई 150 से बने रहने की संभावना है। स्वच्छ हवा का सबसे अधिक लाभ बच्चों, बुजुर्गों और दमा, एलर्जी तथा अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को मिलता है। चिकित्सकों के अनुसार हवा में प्रदूषण कम होने से सांस लेने में राहत मिलती है और श्वसन संबंधी रोगों के मरीजों की परेशानी भी घटती है।
नियमित वर्षा और हवा से प्रदूषण का स्तर होता है कम
डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि मानसून के दौरान नियमित वर्षा और हवा के कारण प्रदूषण का स्तर कम हो जाता है। मानसून समाप्त होने के बाद वाहनों के धुएं, औद्योगिक उत्सर्जन और धूल के कारण एक्यूआई फिर बढ़ सकता है। कहा कि केवल बारिश के भरोसे प्रदूषण नियंत्रण संभव नहीं है। इसके लिए वाहन प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण, औद्योगिक इकाइयों के उत्सर्जन की नियमित निगरानी, निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के उपाय और अधिकाधिक पौधरोपण जैसे कदम उठाने होंगे। यदि इन उपायों पर गंभीरता से अमल किया जाए तो मानसून के बाद भी जिले की हवा स्वच्छ रखी जा सकती है।