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पौधों के बीच समय बिताने से मिलता है सुकून : अंजलि
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अंजलि
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रेवाड़ी।
राजीव नगर निवासी अंजलि (46) ने घर के आंगन को एक सुंदर बगिया में बदलकर न केवल खूबसूरती बढ़ाई है बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी एक प्रेरणा प्रस्तुत की है। करीब 10 वर्षों से बगिया लगा रहीं अंजलि का कहना है कि पौधों के बीच समय बिताने से उन्हें मानसिक शांति और सुकून मिलता है।
अंजलि गृहिणी हैं। घर के काम निपटाने के बाद पौधों की देखभाल में समय बीताती हैं। अंजलि के छोटे से आंगन का हर कोना हरियाली और रंग-बिरंगे फूलों से भरा हुआ नजर आता है। उनकी बगिया में गुलाब, गेंदा, गुड़हल, पिटूनिया जैसे कई प्रकार के फूल खिले हैं जो पूरे वातावरण को सुगंधित बना देते हैं।
सुबह-शाम जब ये फूल महकते हैं तो घर का माहौल भी सकारात्मक और ताजगी भरा हो जाता है।
अंजलि बताती हैं कि उन्होंने बगिया की शुरुआत शौक के तौर पर की थी लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गया। वह कहती हैं कि जब मैं पौधों की देखभाल करती हूं तो दिनभर की थकान अपने आप दूर हो जाती है। फूलों की महक और हरियाली मन को संतुष्टि देती है।
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किचन वेस्ट का करती हैं इस्तेमाल
अंजलि अपनी बगिया में पूरी तरह से प्राकृतिक तरीके अपनाती हैं। वह किचन वेस्ट का इस्तेमाल खाद के रूप में करती हैं। इसके अलावा गोबर की खाद भी पौधों में डालती हैं जिससे पौधे स्वस्थ और तेजी से बढ़ते हैं। उनका मानना है कि रासायनिक खाद के बजाय जैविक खाद का उपयोग पर्यावरण के लिए भी बेहतर होता है और पौधों के लिए भी। बगिया पर सुबह शाम 1-1 घंटा देती हैं। अगर हर घर में थोड़ी-सी जगह पर भी पौधे लगाए जाएं तो पर्यावरण को काफी फायदा हो सकता है।
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गमलों को ऐसी जगह रखें जहां हल्की छाया मिलती रहे : सुनील
बावल मार्ग स्थित नर्सरी के संचालक सुनील कुमार ने बताया कि गर्मी में पौधों का सही तरीके से ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। तेज धूप और अधिक तापमान से पौधे जल्दी सूख सकते हैं, इसलिए उन्हें सुबह या शाम के समय ही पानी देना चाहिए। दोपहर में पानी देने से पौधों की जड़ें प्रभावित हो सकती हैं। गमलों को ऐसी जगह रखें जहां हल्की छाया मिलती रहे। मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए सूखी पत्तियां या घास डाल सकते हैं। समय-समय पर गोबर की खाद या किचन वेस्ट से बनी जैविक खाद डालें। सूखी और खराब पत्तियों को हटाते रहें ताकि पौधे स्वस्थ और हरे-भरे बने रहें।
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अंजलि गृहिणी हैं। घर के काम निपटाने के बाद पौधों की देखभाल में समय बीताती हैं। अंजलि के छोटे से आंगन का हर कोना हरियाली और रंग-बिरंगे फूलों से भरा हुआ नजर आता है। उनकी बगिया में गुलाब, गेंदा, गुड़हल, पिटूनिया जैसे कई प्रकार के फूल खिले हैं जो पूरे वातावरण को सुगंधित बना देते हैं।
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सुबह-शाम जब ये फूल महकते हैं तो घर का माहौल भी सकारात्मक और ताजगी भरा हो जाता है।
अंजलि बताती हैं कि उन्होंने बगिया की शुरुआत शौक के तौर पर की थी लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गया। वह कहती हैं कि जब मैं पौधों की देखभाल करती हूं तो दिनभर की थकान अपने आप दूर हो जाती है। फूलों की महक और हरियाली मन को संतुष्टि देती है।
किचन वेस्ट का करती हैं इस्तेमाल
अंजलि अपनी बगिया में पूरी तरह से प्राकृतिक तरीके अपनाती हैं। वह किचन वेस्ट का इस्तेमाल खाद के रूप में करती हैं। इसके अलावा गोबर की खाद भी पौधों में डालती हैं जिससे पौधे स्वस्थ और तेजी से बढ़ते हैं। उनका मानना है कि रासायनिक खाद के बजाय जैविक खाद का उपयोग पर्यावरण के लिए भी बेहतर होता है और पौधों के लिए भी। बगिया पर सुबह शाम 1-1 घंटा देती हैं। अगर हर घर में थोड़ी-सी जगह पर भी पौधे लगाए जाएं तो पर्यावरण को काफी फायदा हो सकता है।
गमलों को ऐसी जगह रखें जहां हल्की छाया मिलती रहे : सुनील
बावल मार्ग स्थित नर्सरी के संचालक सुनील कुमार ने बताया कि गर्मी में पौधों का सही तरीके से ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। तेज धूप और अधिक तापमान से पौधे जल्दी सूख सकते हैं, इसलिए उन्हें सुबह या शाम के समय ही पानी देना चाहिए। दोपहर में पानी देने से पौधों की जड़ें प्रभावित हो सकती हैं। गमलों को ऐसी जगह रखें जहां हल्की छाया मिलती रहे। मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए सूखी पत्तियां या घास डाल सकते हैं। समय-समय पर गोबर की खाद या किचन वेस्ट से बनी जैविक खाद डालें। सूखी और खराब पत्तियों को हटाते रहें ताकि पौधे स्वस्थ और हरे-भरे बने रहें।

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