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Rewari News: फैक्टरी एक्ट के उल्लंघन पर कोर्ट ने कंपनी पर लगाया 5 हजार रुपये का जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 08 Feb 2026 12:11 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) डॉ. रेनू सोलखे की अदालत ने फैक्टरी एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में बावल स्थित सिया ऑटोमोबाइल्स लिमिटेड को दोषी ठहराते हुए 5 हजार रुपये जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। जुर्माने की राशि मौके पर ही जमा कर दी गई।
मामले के अनुसार औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के सहायक निदेशक ने 29 सितंबर 2025 को कंपनी के परिसर का निरीक्षण किया गया था। इस दौरान फैक्टरी एक्ट 1948 की विभिन्न धाराओं के उल्लंघन पाए गए।
इसके आधार पर विभाग की ओर से अदालत में शिकायत दायर की गई। शिकायत में बताया गया कि कंपनी ने धारा 7ए, 34, 44 और 87 का उल्लंघन किया है जो कि धारा 92 के अंतर्गत दंडनीय अपराध हैं।
अदालत ने शिकायत और रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद 2 जनवरी 2026 को कंपनी को समन जारी किया। समन की पालना में कंपनी की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि अदालत में उपस्थित हुए। उन्हें नियमानुसार शिकायत की प्रति और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
सुनवाई के दौरान कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि ने अदालत के समक्ष यह स्वीकार किया कि वह कंपनी की ओर से दोष स्वीकार करना चाहते हैं और मुकदमे का सामना नहीं करना चाहते। अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि दोष स्वीकार करना स्वेच्छा से किया गया है और इसमें किसी प्रकार का दबाव या प्रलोभन नहीं है। इसके बाद अदालत ने कंपनी को फैक्ट्री एक्ट के उल्लंघन का दोषी ठहराया।
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प्रत्येक उल्लंघन के लिए लगा जुर्माना
दोष सिद्ध होने के बाद अदालत ने सजा पर सुनवाई की। इस दौरान यह तथ्य सामने आया कि कंपनी ने निरीक्षण में पाई गई कमियों को दूर कर लिया है और भविष्य में सभी नियमों का पालन करने का आश्वासन दिया है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने कंपनी पर प्रत्येक उल्लंघन के लिए 1 हजार रुपये, कुल 5 उल्लंघनों के लिए 5 हजार रुपये जुर्माना लगाने का आदेश दिया।
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रेवाड़ी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) डॉ. रेनू सोलखे की अदालत ने फैक्टरी एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में बावल स्थित सिया ऑटोमोबाइल्स लिमिटेड को दोषी ठहराते हुए 5 हजार रुपये जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। जुर्माने की राशि मौके पर ही जमा कर दी गई।
मामले के अनुसार औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के सहायक निदेशक ने 29 सितंबर 2025 को कंपनी के परिसर का निरीक्षण किया गया था। इस दौरान फैक्टरी एक्ट 1948 की विभिन्न धाराओं के उल्लंघन पाए गए।
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इसके आधार पर विभाग की ओर से अदालत में शिकायत दायर की गई। शिकायत में बताया गया कि कंपनी ने धारा 7ए, 34, 44 और 87 का उल्लंघन किया है जो कि धारा 92 के अंतर्गत दंडनीय अपराध हैं।
अदालत ने शिकायत और रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद 2 जनवरी 2026 को कंपनी को समन जारी किया। समन की पालना में कंपनी की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि अदालत में उपस्थित हुए। उन्हें नियमानुसार शिकायत की प्रति और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
सुनवाई के दौरान कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि ने अदालत के समक्ष यह स्वीकार किया कि वह कंपनी की ओर से दोष स्वीकार करना चाहते हैं और मुकदमे का सामना नहीं करना चाहते। अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि दोष स्वीकार करना स्वेच्छा से किया गया है और इसमें किसी प्रकार का दबाव या प्रलोभन नहीं है। इसके बाद अदालत ने कंपनी को फैक्ट्री एक्ट के उल्लंघन का दोषी ठहराया।
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प्रत्येक उल्लंघन के लिए लगा जुर्माना
दोष सिद्ध होने के बाद अदालत ने सजा पर सुनवाई की। इस दौरान यह तथ्य सामने आया कि कंपनी ने निरीक्षण में पाई गई कमियों को दूर कर लिया है और भविष्य में सभी नियमों का पालन करने का आश्वासन दिया है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने कंपनी पर प्रत्येक उल्लंघन के लिए 1 हजार रुपये, कुल 5 उल्लंघनों के लिए 5 हजार रुपये जुर्माना लगाने का आदेश दिया।