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Rewari News: ऑक्सीजन प्लांट को खुद ऑक्सीजन की दरकार, कोरोना काल की बाइक एंबुलेंस भी फांक रही धूल
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 08 Feb 2026 12:17 AM IST
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रेवाड़ी। नागरिक अस्पताल में धूल फांक रही मोबाइल एम्बुलेंस। संवाद
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रेवाड़ी। कोरोना महामारी के दौरान जिले को मिली स्वास्थ्य सुविधाएं अब दयनीय स्थिति में हैं। उस समय मरीजों की जान बचाने के लिए उपलब्ध कराई गई 2 बाइक एंबुलेंस धूल फांक रही हैं। 1 हजार एलपीएम क्षमता का एक ऑक्सीजन प्लांट पूरी तरह बंद पड़ा है। ऐसे में ऑक्सीजन प्लांट को खुद ऑक्सीजन की दरकार है। कई संसाधन दोबारा इस्तेमाल होने से पहले मेंटेनेंस के मोहताज हो चुके हैं।
कोरोना काल के दौरान जुलाई 2021 में नागरिक अस्पताल के परिसर में ऑक्सीजन संकट को देखते हुए दो ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। इनमें से एक 500 एलपीएम क्षमता का प्लांट राज्य सरकार और दूसरा 1 हजार एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट पीएम केयर फंड की मदद से स्थापित किया गया था।
इसके अलावा बावल और कोसली में भी 250-250 एलपीएम क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। मौजूदा स्थिति यह है कि 1 हजार एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट पूरी तरह बंद पड़ा है जबकि 500 एलपीएम का प्लांट चालू है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 1 हजार एलपीएम का प्लांट चालू करने के लिए बूस्टर की आवश्यकता है जिसे लगाने के लिए टेंडर जारी किया गया है। ये बूस्टर करीब 6 माह पहले ही बंद हुआ था।
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आईसीयू के 18 बेड इस्तेमाल में लाए जा रहे
कोरोना काल में मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिले में 18 आईसीयू बेड स्थापित किए गए थे। इनमें से छह बच्चों के लिए और 12 बेड वयस्कों के लिए थे। आईसीयू बेड इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं। कोरोना के दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में कुल 29 एंबुलेंस लगाई गई थीं। इनमें छह एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट), छह बीएलएस (बेसिक लाइफ सपोर्ट), 17 पीटीए (पेशेंट ट्रांसफर एंबुलेंस) और एक बैक होम एंबुलेंस शामिल थी। बैक होम एंबुलेंस का उपयोग नवजात शिशुओं और उनके परिजनों को सुरक्षित घर तक पहुंचाने के लिए किया जाता था।
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जो उपकरण कार्य के नहीं, उनकी मेंटनेंस नहीं हो रही
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो उपकरण उपयोग में नहीं हैं, उनकी अभी किसी प्रकार की जरूरत भी नहीं है। अभी 500 एलपीएम के ऑक्सीजन प्लांट से ही कार्य चल रहा है। ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत भी नहीं है। ऐसे में अगर 1 हजार एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट चालू भी हो जाता है तो उसका उपयोग नहीं है। उधर, सवाल ये उठ रहा है कि जो उपकरण कार्य के नहीं हैं, उनकी मेंटनेंस क्यों नहीं करवाई जा रही है।
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वह दौर कभी ना भूलने वाला था : डॉ. विजय प्रकाश
कोरोना काल के नोडल अधिकारी व पूर्व डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. विजय प्रकाश ने बताया कि कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन की कमी हो गई थी। तब दो प्लांट लगाए थे। इनमें से एक 500 एलपीएम क्षमता का प्लांट राज्य सरकार और दूसरा 1 हजार एलपीएम क्षमता का प्लांट पीएम केयर फंड की मदद से स्थापित किया गया था। जो उपकरण थे, वह अभी भी मौजूद हैं। हो सकता है कि कोई उपकरण की जरूरत ना होती हो, वह बिना इस्तेमाल का पड़ा रहता हो। वह दौर कभी नहीं भूलने वाला था।
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वर्जन
कोरोना काल में मिले जिन उपकरणों का उपयोग नहीं हो रहा है, उसकी जानकारी मुख्यालय को दी जा चुकी है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से तैयार है।-डॉ. नरेंद्र दहिया, सिविल सर्जन रेवाड़ी।
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इसके अलावा बावल और कोसली में भी 250-250 एलपीएम क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। मौजूदा स्थिति यह है कि 1 हजार एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट पूरी तरह बंद पड़ा है जबकि 500 एलपीएम का प्लांट चालू है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 1 हजार एलपीएम का प्लांट चालू करने के लिए बूस्टर की आवश्यकता है जिसे लगाने के लिए टेंडर जारी किया गया है। ये बूस्टर करीब 6 माह पहले ही बंद हुआ था।
आईसीयू के 18 बेड इस्तेमाल में लाए जा रहे
कोरोना काल में मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिले में 18 आईसीयू बेड स्थापित किए गए थे। इनमें से छह बच्चों के लिए और 12 बेड वयस्कों के लिए थे। आईसीयू बेड इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं। कोरोना के दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में कुल 29 एंबुलेंस लगाई गई थीं। इनमें छह एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट), छह बीएलएस (बेसिक लाइफ सपोर्ट), 17 पीटीए (पेशेंट ट्रांसफर एंबुलेंस) और एक बैक होम एंबुलेंस शामिल थी। बैक होम एंबुलेंस का उपयोग नवजात शिशुओं और उनके परिजनों को सुरक्षित घर तक पहुंचाने के लिए किया जाता था।
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जो उपकरण कार्य के नहीं, उनकी मेंटनेंस नहीं हो रही
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो उपकरण उपयोग में नहीं हैं, उनकी अभी किसी प्रकार की जरूरत भी नहीं है। अभी 500 एलपीएम के ऑक्सीजन प्लांट से ही कार्य चल रहा है। ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत भी नहीं है। ऐसे में अगर 1 हजार एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट चालू भी हो जाता है तो उसका उपयोग नहीं है। उधर, सवाल ये उठ रहा है कि जो उपकरण कार्य के नहीं हैं, उनकी मेंटनेंस क्यों नहीं करवाई जा रही है।
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वह दौर कभी ना भूलने वाला था : डॉ. विजय प्रकाश
कोरोना काल के नोडल अधिकारी व पूर्व डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. विजय प्रकाश ने बताया कि कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन की कमी हो गई थी। तब दो प्लांट लगाए थे। इनमें से एक 500 एलपीएम क्षमता का प्लांट राज्य सरकार और दूसरा 1 हजार एलपीएम क्षमता का प्लांट पीएम केयर फंड की मदद से स्थापित किया गया था। जो उपकरण थे, वह अभी भी मौजूद हैं। हो सकता है कि कोई उपकरण की जरूरत ना होती हो, वह बिना इस्तेमाल का पड़ा रहता हो। वह दौर कभी नहीं भूलने वाला था।
वर्जन
कोरोना काल में मिले जिन उपकरणों का उपयोग नहीं हो रहा है, उसकी जानकारी मुख्यालय को दी जा चुकी है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से तैयार है।-डॉ. नरेंद्र दहिया, सिविल सर्जन रेवाड़ी।

रेवाड़ी। नागरिक अस्पताल में धूल फांक रही मोबाइल एम्बुलेंस। संवाद