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Rewari News: सड़क हादसे में मृत महिला के परिजनों को मिलेगा 7.60 लाख मुआवजा
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रेवाड़ी। सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाली महिला के परिजनों को मुआवजा देने का मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के अध्यक्ष नरेंद्र पाल ने आदेश दिया है। 5 मार्च को दिए आदेश में परिजनों को 7 लाख 60 हजार रुपये का मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।
14 जून 2024 को एक सड़क हादसे में बावल निवासी विमला की मौत हो गई थी। आरोप था कि ट्रॉला चालक ने तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाते हुए दुर्घटना को अंजाम दिया। हादसे के बाद मृतका के बेटे जगमोहन सहित परिवार के पांच सदस्यों ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी।
याचिका में चालक, वाहन मालिक और बीमा कंपनी को प्रतिवादी बनाया गया था। परिजनों का कहना था कि हादसे में परिवार की मुखिया की मौत से उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से भारी क्षति हुई है। इसलिए उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।
सुनवाई के दौरान पक्षकारों के बीच डेली लोक अदालत में आपसी सहमति बन गई। समझौते के तहत वाहन की बीमा कंपनी ने मृतका के परिजनों को 7 लाख 60 हजार रुपये देने की पेशकश की जिसे याचिकाकर्ताओं ने वकील के माध्यम से स्वीकार कर लिया।
इसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों के समझौते को रिकॉर्ड में लेते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया और बीमा कंपनी को निर्धारित मुआवजा राशि देने का आदेश जारी किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी को यह राशि दो महीने के भीतर अदा करनी होगी। यदि निर्धारित समयावधि में भुगतान नहीं किया गया तो दावेदारी याचिका दाखिल होने की तारीख से भुगतान की तारीख तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ राशि देनी होगी।
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मुआवजा राशि के वितरण को लेकर भी निर्देश जारी
अदालत ने मुआवजा राशि के वितरण को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। कुल मुआवजा राशि को मृतका के पांचों दावेदारों के बीच बराबर बांटा जाएगा। साथ ही प्रत्येक दावेदार को मिलने वाली राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा तुरंत जारी किया जाएगा जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि उनके नाम से किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में दो वर्ष की अवधि के लिए सावधि जमा (एफडीआर) के रूप में जमा कराई जाएगी। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि बीमा कंपनी मुआवजा राशि सीधे दावेदारों के बैंक खातों में जमा कराएगी और इसकी सूचना अदालत को भी देगी। वहीं दावेदारों को अपने-अपने बैंक खातों का विवरण बीमा कंपनी को उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है ताकि भुगतान प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।
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14 जून 2024 को एक सड़क हादसे में बावल निवासी विमला की मौत हो गई थी। आरोप था कि ट्रॉला चालक ने तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाते हुए दुर्घटना को अंजाम दिया। हादसे के बाद मृतका के बेटे जगमोहन सहित परिवार के पांच सदस्यों ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी।
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याचिका में चालक, वाहन मालिक और बीमा कंपनी को प्रतिवादी बनाया गया था। परिजनों का कहना था कि हादसे में परिवार की मुखिया की मौत से उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से भारी क्षति हुई है। इसलिए उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।
सुनवाई के दौरान पक्षकारों के बीच डेली लोक अदालत में आपसी सहमति बन गई। समझौते के तहत वाहन की बीमा कंपनी ने मृतका के परिजनों को 7 लाख 60 हजार रुपये देने की पेशकश की जिसे याचिकाकर्ताओं ने वकील के माध्यम से स्वीकार कर लिया।
इसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों के समझौते को रिकॉर्ड में लेते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया और बीमा कंपनी को निर्धारित मुआवजा राशि देने का आदेश जारी किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी को यह राशि दो महीने के भीतर अदा करनी होगी। यदि निर्धारित समयावधि में भुगतान नहीं किया गया तो दावेदारी याचिका दाखिल होने की तारीख से भुगतान की तारीख तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ राशि देनी होगी।
मुआवजा राशि के वितरण को लेकर भी निर्देश जारी
अदालत ने मुआवजा राशि के वितरण को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। कुल मुआवजा राशि को मृतका के पांचों दावेदारों के बीच बराबर बांटा जाएगा। साथ ही प्रत्येक दावेदार को मिलने वाली राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा तुरंत जारी किया जाएगा जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि उनके नाम से किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में दो वर्ष की अवधि के लिए सावधि जमा (एफडीआर) के रूप में जमा कराई जाएगी। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि बीमा कंपनी मुआवजा राशि सीधे दावेदारों के बैंक खातों में जमा कराएगी और इसकी सूचना अदालत को भी देगी। वहीं दावेदारों को अपने-अपने बैंक खातों का विवरण बीमा कंपनी को उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है ताकि भुगतान प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।