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Rewari News: दो और मलेरिया के मरीज मिले, पांच हुई संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 18 May 2026 11:53 PM IST
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लार्वा की जांच करते स्वास्थ्य कर्मी। संवाद
- फोटो : घटना के बाद मौके पर मौजूद नसीरपुर पुलिस। स्रोत पुलिस
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रेवाड़ी। जिले में मलेरिया के दो और नए मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। अब जिले में मलेरिया संक्रमित मरीजों की संख्या 5 हो गई है। राहत की बात यह है कि अभी तक डेंगू का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार गर्मी और बदलते मौसम के बीच मच्छरों की संख्या बढ़ने से मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए विभाग पहले से ही एहतियाती कदम उठा रहा है।
प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा सर्वे किया जा रहा है। लोगों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ मच्छरों की रोकथाम के लिए जरूरी उपाय भी किए जा रहे हैं।
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विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले वर्ष जिले में मलेरिया के कुल 25 मामले दर्ज किए गए थे। ऐसे में इस साल शुरुआती समय में ही पांच मरीज मिलना स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में लोगों को घर और आसपास साफ-सफाई रखने, पानी जमा नहीं होने देने और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
नोडल अधिकारी डॉ. जोगेंद्र तंवर ने बताया कि मलेरिया एक मच्छरजनित बीमारी है जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। उन्होंने कहा कि मलेरिया के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, सिर दर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी, अत्यधिक पसीना आना और थकान शामिल हैं। कई मामलों में मरीज को बार-बार बुखार आने की शिकायत भी होती है।
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घरों के आसपास पानी जमा न होने दें
डॉ. जोगेंद्र तंवर ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि घरों के आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने का सबसे बड़ा कारण बनता है। कूलर, गमले, टायर और पानी की टंकियों को नियमित रूप से साफ करें। रात के समय मच्छरदानी का प्रयोग करें और पूरी बाजू के कपड़े पहनें। उन्होंने कहा कि समय रहते सावधानी और जागरूकता ही मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार गर्मी और बदलते मौसम के बीच मच्छरों की संख्या बढ़ने से मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए विभाग पहले से ही एहतियाती कदम उठा रहा है।
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प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा सर्वे किया जा रहा है। लोगों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ मच्छरों की रोकथाम के लिए जरूरी उपाय भी किए जा रहे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में लोगों को घर और आसपास साफ-सफाई रखने, पानी जमा नहीं होने देने और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
नोडल अधिकारी डॉ. जोगेंद्र तंवर ने बताया कि मलेरिया एक मच्छरजनित बीमारी है जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। उन्होंने कहा कि मलेरिया के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, सिर दर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी, अत्यधिक पसीना आना और थकान शामिल हैं। कई मामलों में मरीज को बार-बार बुखार आने की शिकायत भी होती है।
घरों के आसपास पानी जमा न होने दें
डॉ. जोगेंद्र तंवर ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि घरों के आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने का सबसे बड़ा कारण बनता है। कूलर, गमले, टायर और पानी की टंकियों को नियमित रूप से साफ करें। रात के समय मच्छरदानी का प्रयोग करें और पूरी बाजू के कपड़े पहनें। उन्होंने कहा कि समय रहते सावधानी और जागरूकता ही मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।