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विश्व दुग्ध दिवस: दूध उत्पादन में चमका रेवाड़ी, टॉप-10 जिलों में बनाई जगह
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 31 May 2026 11:44 PM IST
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रेवाड़ी। दूध उत्पादन और उपलब्धता के मामले में रेवाड़ी ने हरियाणा में मजबूत पहचान बनाई है। यह जिला उन शीर्ष 10 जिलों में शामिल है जहां दूध उत्पादन की वृद्धि दर राज्य औसत से अधिक है। जिले में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 1136 ग्राम दूध उपलब्ध है जो राज्य औसत 1081 ग्राम से काफी ज्यादा है। इसी उपलब्धि को देखते हुए सरकार ने यहां बड़े मिल्क प्लांट की स्थापना की घोषणा की है।
रेवाड़ी की दूध उत्पादन वृद्धि दर 3.78 प्रतिशत है जबकि राज्य का औसत 3.07 प्रतिशत है। जिला राज्य के उन 13 जिलों में शामिल है, जिनमें राज्य औसत से अधिक प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता है। इसी को देखते हुए हरियाणा सरकार ने बजट में 300 करोड़ की लागत से 5 लाख लीटर क्षमता का मिल्क प्लांट स्थापित करने की घोषणा की गई थी। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
आंकड़ों के अनुसार जिले में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 1136 ग्राम प्रतिदिन है, जबकि हरियाणा का औसत 1081 ग्राम है। जिले का कुल दूध उत्पादन 4.34 लाख टन है, जो राज्य के कुल 116.29 लाख टन दूध उत्पादन का लगभग 3.73 प्रतिशत है।
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पशुपालन विभाग के अनुसार जिले में विदेशी नस्ल की गायों का औसत दैनिक दूध उत्पादन 11.37 किलोग्राम, संकर गायों का 9.97 किलोग्राम, देशी गायों का 6.86 किलोग्राम तथा अप्रजाति गायों का 5.92 किलोग्राम है। वहीं देशी भैंसों का औसत दूध उत्पादन 10.54 किलोग्राम और अप्रजाति भैंसों का 8.83 किलोग्राम प्रतिदिन आंका गया है।
रेवाड़ी की भौगोलिक स्थिति भी डेयरी व्यवसाय के लिए लाभदायक साबित हो रही है। जिला राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली और गुरुग्राम के निकट स्थित है, जहां हरियाणा की देसी नस्ल की गाय और भैंस के दूध की अच्छी मांग रहती है।
गाय और भैंस खरीदने पर अनुदान दिया जा रहा
डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत नाबार्ड की ओर से पशुपालकों को गाय और भैंस खरीदने पर अनुदान दिया जा रहा है। सामान्य वर्ग के पशुपालकों को 25 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति वर्ग के पशुपालकों को 33.33 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। वर्तमान में जिले के बावल क्षेत्र में 14, कोसली में 5 और रेवाड़ी में 25 डेयरी यूनिट स्थापित की जा चुकी हैं। इन यूनिटों के माध्यम से पशुपालकों की आय में वृद्धि हो रही है और जिले में डेयरी व्यवसाय को नई मजबूती मिल रही है।
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एकीकृत पशुधन बीमा योजना के तहत 32, 633 पशुओं का किया बीमा
दूध उत्पादन के मामले में जिले को अग्रणी बनाने के लिए उठाए गए कदम के सकारात्मक परिणाम आने लगे हैं। डेयरी उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए जिले के पशुपालकों न केवल रुचि लेते हुए मिनी डेयरी स्थापित की बल्कि रेवाड़ी को दूध उत्पादन के मामले में प्रदेश में आगे ले जाने की दिशा में नई पहल की। एकीकृत पशुधन बीमा योजना के तहत जिलाभर में 32 हजार 633 पशुओं का बीमा किया गया है, ताकि पशुधन को जोखिम फ्री किया जा सके। इनमें अनुसूचित जाति वर्ग के पशुपालकों के 3027 पशु भी शामिल हैं। डेयरी उद्यमिता के तहत कोई भी बेरोजगार युवक या पशुपालन व्यवसाय शुरू करने वाले नागरिक इस योजना का फायदा ले सकता है।
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नई नस्लों की जानकारी के लिए होती है स्पर्धा
पशुपालकों को पशुधन के मामले में जागरूक करने के लिए पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग की ओर से राज्य स्तरीय पशु मेला एवं प्रदर्शनियों का आयोजन कराया जाता है, ताकि नई नस्लों की जानकारी से पशुपालक जागरूक हो सकें। जिले में बावल में 11, कोसली व रेवाड़ी क्षेत्र में 38 दुग्ध प्रतियोगिताएं कराई गई हैं, उच्च नस्ल के पशुओं की पहचान की जा सके। इनमें पशुपालकों को इनाम राशि देकर सम्मानित करने की पहल भी है।
रेवाड़ी की दूध उत्पादन वृद्धि दर 3.78 प्रतिशत है जबकि राज्य का औसत 3.07 प्रतिशत है। जिला राज्य के उन 13 जिलों में शामिल है, जिनमें राज्य औसत से अधिक प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता है। इसी को देखते हुए हरियाणा सरकार ने बजट में 300 करोड़ की लागत से 5 लाख लीटर क्षमता का मिल्क प्लांट स्थापित करने की घोषणा की गई थी। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
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आंकड़ों के अनुसार जिले में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 1136 ग्राम प्रतिदिन है, जबकि हरियाणा का औसत 1081 ग्राम है। जिले का कुल दूध उत्पादन 4.34 लाख टन है, जो राज्य के कुल 116.29 लाख टन दूध उत्पादन का लगभग 3.73 प्रतिशत है।
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पशुपालन विभाग के अनुसार जिले में विदेशी नस्ल की गायों का औसत दैनिक दूध उत्पादन 11.37 किलोग्राम, संकर गायों का 9.97 किलोग्राम, देशी गायों का 6.86 किलोग्राम तथा अप्रजाति गायों का 5.92 किलोग्राम है। वहीं देशी भैंसों का औसत दूध उत्पादन 10.54 किलोग्राम और अप्रजाति भैंसों का 8.83 किलोग्राम प्रतिदिन आंका गया है।
रेवाड़ी की भौगोलिक स्थिति भी डेयरी व्यवसाय के लिए लाभदायक साबित हो रही है। जिला राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली और गुरुग्राम के निकट स्थित है, जहां हरियाणा की देसी नस्ल की गाय और भैंस के दूध की अच्छी मांग रहती है।
गाय और भैंस खरीदने पर अनुदान दिया जा रहा
डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत नाबार्ड की ओर से पशुपालकों को गाय और भैंस खरीदने पर अनुदान दिया जा रहा है। सामान्य वर्ग के पशुपालकों को 25 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति वर्ग के पशुपालकों को 33.33 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। वर्तमान में जिले के बावल क्षेत्र में 14, कोसली में 5 और रेवाड़ी में 25 डेयरी यूनिट स्थापित की जा चुकी हैं। इन यूनिटों के माध्यम से पशुपालकों की आय में वृद्धि हो रही है और जिले में डेयरी व्यवसाय को नई मजबूती मिल रही है।
एकीकृत पशुधन बीमा योजना के तहत 32, 633 पशुओं का किया बीमा
दूध उत्पादन के मामले में जिले को अग्रणी बनाने के लिए उठाए गए कदम के सकारात्मक परिणाम आने लगे हैं। डेयरी उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए जिले के पशुपालकों न केवल रुचि लेते हुए मिनी डेयरी स्थापित की बल्कि रेवाड़ी को दूध उत्पादन के मामले में प्रदेश में आगे ले जाने की दिशा में नई पहल की। एकीकृत पशुधन बीमा योजना के तहत जिलाभर में 32 हजार 633 पशुओं का बीमा किया गया है, ताकि पशुधन को जोखिम फ्री किया जा सके। इनमें अनुसूचित जाति वर्ग के पशुपालकों के 3027 पशु भी शामिल हैं। डेयरी उद्यमिता के तहत कोई भी बेरोजगार युवक या पशुपालन व्यवसाय शुरू करने वाले नागरिक इस योजना का फायदा ले सकता है।
नई नस्लों की जानकारी के लिए होती है स्पर्धा
पशुपालकों को पशुधन के मामले में जागरूक करने के लिए पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग की ओर से राज्य स्तरीय पशु मेला एवं प्रदर्शनियों का आयोजन कराया जाता है, ताकि नई नस्लों की जानकारी से पशुपालक जागरूक हो सकें। जिले में बावल में 11, कोसली व रेवाड़ी क्षेत्र में 38 दुग्ध प्रतियोगिताएं कराई गई हैं, उच्च नस्ल के पशुओं की पहचान की जा सके। इनमें पशुपालकों को इनाम राशि देकर सम्मानित करने की पहल भी है।