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Rohtak News: एआई से मिनटों में चुनावी पोस्टर और गीत तैयार करा रहे उम्मीदवार
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रामभज दलाल
सांपला। नगर पालिका चुनाव में इस बार प्रचार का स्वरूप पूरी तरह बदला नजर आ रहा है। पारंपरिक बैनर पोस्टर और स्थानीय कलाकारों की जगह अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानि एआई ने तेजी से अपनी पकड़ बना ली है। उम्मीदवार एआई से मिनटों में चुनावी पोस्टर और गीत तैयार करा रहे हैं जिससे उनका समय और पैसा दोनों बच रहा है।
10 मई को होने वाले नगरपालिका चुनाव में चेयरमैन पद के लिए 10 उम्मीदवार और पार्षद के 16 वार्डों से 44 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला रोचक बनता जा रहा है। वहीं प्रचार का तरीका भी अत्याधुनिक हो गया है। पहले उम्मीदवार को चुनावी पोस्टर तैयार करने और लोक कलाकारों से गीत रिकॉर्ड करने में भी कई दिन का समय लग जाता था।
एआई आधारित साधनों से यह काम कुछ मिनट में हो रहा है। अब उम्मीदवार अपनी तस्वीर अपलोड कर आकर्षक पोस्टर वीडियो और चुनावी गीत तुरंत तैयार कर रहे हैं।
कई उम्मीदवारों ने अपने नाम और चुनाव चिह्न के साथ विशेष थीम गीत भी बनवाए हैं जो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। संवाद
सोशल मीडिया बना प्रचार का प्रभावी माध्यम
इस बार चुनावी प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम सोशल मीडिया बन चुका है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे मंचों पर एआई से निर्मित तस्वीर और वीडियो व्यापक रूप से साझा किए जा रहे हैं। इनमें से कई वीडियो इतने वास्तविक लगते हैं कि आमजन के लिए असली और नकली में अंतर कर पाना कठिन हो जाता है। इससे प्रत्याशियों को कम लागत में अधिक लोगों तक पहुंच बनाने का अवसर मिल रहा है।
उम्मीदवार कम खर्च और कम समय में अधिक सामग्री तैयार कर रहे
स्थानीय कलाकार जगबीर सिंह, शिवकुमार ने बताया कि इस आधुनिक दौर में स्थानीय कलाकारों और डिजाइनर के व्यवसाय पर भी स्पष्ट रूप से असर दिखाई दे रहा है। पहले चुनावी मौसम में पोस्टर डिजाइनर रिकॉर्डिंग स्टूडियो और स्थानीय कलाकारों की मांग बढ़ जाती थी। अब उनका काम सीमित होता जा रहा है। कलाकारों का कहना है कि एआई के कारण उनके रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उम्मीदवार कम खर्च और कम समय में अधिक सामग्री तैयार कर पा रहे हैं।
एआई से चुनाव प्रचार में भ्रामक सामग्री के प्रसार का खतरा
एआई आधारित प्रचार में युवा प्रत्याशी अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस नई तकनीक का ज्ञान होने के कारण नए-नए प्रयोग कर अपने प्रचार अभियान को अधिक आकर्षक बना रहे हैं। वहीं पारंपरिक तरीकों पर निर्भर उम्मीदवार भी इस बदलते रुझान को अपनाने लगे हैं। बुद्धिजीवियों का कहना है कि एआई से चुनाव प्रचार में भ्रामक और फर्जी सामग्री के प्रसार का खतरा है।
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सांपला। नगर पालिका चुनाव में इस बार प्रचार का स्वरूप पूरी तरह बदला नजर आ रहा है। पारंपरिक बैनर पोस्टर और स्थानीय कलाकारों की जगह अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानि एआई ने तेजी से अपनी पकड़ बना ली है। उम्मीदवार एआई से मिनटों में चुनावी पोस्टर और गीत तैयार करा रहे हैं जिससे उनका समय और पैसा दोनों बच रहा है।
10 मई को होने वाले नगरपालिका चुनाव में चेयरमैन पद के लिए 10 उम्मीदवार और पार्षद के 16 वार्डों से 44 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला रोचक बनता जा रहा है। वहीं प्रचार का तरीका भी अत्याधुनिक हो गया है। पहले उम्मीदवार को चुनावी पोस्टर तैयार करने और लोक कलाकारों से गीत रिकॉर्ड करने में भी कई दिन का समय लग जाता था।
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एआई आधारित साधनों से यह काम कुछ मिनट में हो रहा है। अब उम्मीदवार अपनी तस्वीर अपलोड कर आकर्षक पोस्टर वीडियो और चुनावी गीत तुरंत तैयार कर रहे हैं।
कई उम्मीदवारों ने अपने नाम और चुनाव चिह्न के साथ विशेष थीम गीत भी बनवाए हैं जो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। संवाद
सोशल मीडिया बना प्रचार का प्रभावी माध्यम
इस बार चुनावी प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम सोशल मीडिया बन चुका है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे मंचों पर एआई से निर्मित तस्वीर और वीडियो व्यापक रूप से साझा किए जा रहे हैं। इनमें से कई वीडियो इतने वास्तविक लगते हैं कि आमजन के लिए असली और नकली में अंतर कर पाना कठिन हो जाता है। इससे प्रत्याशियों को कम लागत में अधिक लोगों तक पहुंच बनाने का अवसर मिल रहा है।
उम्मीदवार कम खर्च और कम समय में अधिक सामग्री तैयार कर रहे
स्थानीय कलाकार जगबीर सिंह, शिवकुमार ने बताया कि इस आधुनिक दौर में स्थानीय कलाकारों और डिजाइनर के व्यवसाय पर भी स्पष्ट रूप से असर दिखाई दे रहा है। पहले चुनावी मौसम में पोस्टर डिजाइनर रिकॉर्डिंग स्टूडियो और स्थानीय कलाकारों की मांग बढ़ जाती थी। अब उनका काम सीमित होता जा रहा है। कलाकारों का कहना है कि एआई के कारण उनके रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उम्मीदवार कम खर्च और कम समय में अधिक सामग्री तैयार कर पा रहे हैं।
एआई से चुनाव प्रचार में भ्रामक सामग्री के प्रसार का खतरा
एआई आधारित प्रचार में युवा प्रत्याशी अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस नई तकनीक का ज्ञान होने के कारण नए-नए प्रयोग कर अपने प्रचार अभियान को अधिक आकर्षक बना रहे हैं। वहीं पारंपरिक तरीकों पर निर्भर उम्मीदवार भी इस बदलते रुझान को अपनाने लगे हैं। बुद्धिजीवियों का कहना है कि एआई से चुनाव प्रचार में भ्रामक और फर्जी सामग्री के प्रसार का खतरा है।
