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Rohtak News: किसानों की मेहनत पर फिरा पानी, खेत में फसलें सूखी
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01-किसान राजू
- फोटो : samvad
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अभिषेक कीरत
रोहतक। मानसून की सुस्त चाल के कारण जिले के किसानों की मेहनत पर पानी फिरने लगा है। कम बारिश के कारण किसानों की फसलें सूखने लगी हैं। सिंचाई के अभाव में खेतों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। किसानों ने दिन-रात मेहनत कर खेतों में धान की फसल लगाई थी लेकिन क्या पता था कि बाद में इन फसलों की जुताई की नौबत आ जाएगी।
कृषि विभाग के अनुसार पिछले साल की अपेक्षा धान का बुआई क्षेत्र भी 12,848 हेक्टेयर तक घट गया है। 2025 में 77,050 हेक्टेयर में धान की रोपाई हुई थी। इस वर्ष 64,202 हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो पाई है। ऐसे में पीआर व बासमती किस्म की धान का उत्पादन भी घट सकता है।
पिछले दो साल से लगातार बुआई क्षेत्र घट रहा है। ऐसे में अन्नदाता पर मौसम की मार पड़ती नजर आ रही है। जब किसानों से इसको लेकर बात की तो उन्होंने खुलकर अपनी पीड़ा सुनाई। हालांकि, विभाग के पास फिलहाल नुकसान की कोई शिकायत नहीं पहुंची है। संवाद
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2023 से 2026 में यूं बदला फसलों की बुआई क्षेत्र (हेक्टेयर में)
फसल 2023 2024 2025 2026
धान 75,660 77,221 77,050 64,202
ज्वार चरी 8,060 5,730 4,792 7,140
बाजरा 7,300 7,120 8,000 4,440
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17 क्विंटल प्रति एकड़ से आठ क्विंटल तक रह सकती है बासमती धान की पैदावार
कृषि विभाग में कार्यरत तकनीकी सहायक डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि जिले में खेतों की सिंचाई मानसून या नहरी पानी पर निर्भर है। ऐसे में बारिश ने किसानों का हाल बिगाड़ा है। यही हाल रहा तो पीआर धान की फसल की पैदावार 35-40 क्विंटल प्रति एकड़ से घटकर 30-32 क्विंटल प्रति एकड़ रह सकती है। बासमती किस्म की पैदावार भी 17 क्विंटल प्रति एकड़ से घटकर आठ क्विंटल तक रह सकती है। हालांकि, ये बारिश के अनुसार बदल भी सकता है। मानसून सीजन की फसलों की बुआई के लिए जून व जुलाई उपयुक्त होता है। जून धान की नर्सरी तैयार करने व जुलाई तैयार नर्सरी से धान लगाने के लिए सही माना जाता है।
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किसानों ने जाहिर की पीड़ा
हाल में हुई बारिश से कोई राहत नहीं मिली। देरी से आए मानसून के कारण खेतों में फसलें सूख गई। इससे दस एकड़ भूमि में लगी फसल खराब हो गई। करीब तीन लाख रुपये की लागत आई थी। अब दोबारा फसल लगानी पड़ेगी।
-अशोक, किसान, मकड़ौली
चार एकड़ में धान की फसल लगाई हुई है। पानी की कमी के कारण खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। फसल तो लगा दी लेकिन पानी कहां से लेकर आएं। सूखने की नौबत आ रही है।
- रामनिवास, किसान, चिड़ी
मानसून का कोई असर नहीं दिख रहा। हल्की बारिश से धान की फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। फसल सूखने लगी है। खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं।
- राजू, किसान, मकड़ौली
रोहतक। मानसून की सुस्त चाल के कारण जिले के किसानों की मेहनत पर पानी फिरने लगा है। कम बारिश के कारण किसानों की फसलें सूखने लगी हैं। सिंचाई के अभाव में खेतों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। किसानों ने दिन-रात मेहनत कर खेतों में धान की फसल लगाई थी लेकिन क्या पता था कि बाद में इन फसलों की जुताई की नौबत आ जाएगी।
कृषि विभाग के अनुसार पिछले साल की अपेक्षा धान का बुआई क्षेत्र भी 12,848 हेक्टेयर तक घट गया है। 2025 में 77,050 हेक्टेयर में धान की रोपाई हुई थी। इस वर्ष 64,202 हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो पाई है। ऐसे में पीआर व बासमती किस्म की धान का उत्पादन भी घट सकता है।
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पिछले दो साल से लगातार बुआई क्षेत्र घट रहा है। ऐसे में अन्नदाता पर मौसम की मार पड़ती नजर आ रही है। जब किसानों से इसको लेकर बात की तो उन्होंने खुलकर अपनी पीड़ा सुनाई। हालांकि, विभाग के पास फिलहाल नुकसान की कोई शिकायत नहीं पहुंची है। संवाद
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2023 से 2026 में यूं बदला फसलों की बुआई क्षेत्र (हेक्टेयर में)
फसल 2023 2024 2025 2026
धान 75,660 77,221 77,050 64,202
ज्वार चरी 8,060 5,730 4,792 7,140
बाजरा 7,300 7,120 8,000 4,440
17 क्विंटल प्रति एकड़ से आठ क्विंटल तक रह सकती है बासमती धान की पैदावार
कृषि विभाग में कार्यरत तकनीकी सहायक डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि जिले में खेतों की सिंचाई मानसून या नहरी पानी पर निर्भर है। ऐसे में बारिश ने किसानों का हाल बिगाड़ा है। यही हाल रहा तो पीआर धान की फसल की पैदावार 35-40 क्विंटल प्रति एकड़ से घटकर 30-32 क्विंटल प्रति एकड़ रह सकती है। बासमती किस्म की पैदावार भी 17 क्विंटल प्रति एकड़ से घटकर आठ क्विंटल तक रह सकती है। हालांकि, ये बारिश के अनुसार बदल भी सकता है। मानसून सीजन की फसलों की बुआई के लिए जून व जुलाई उपयुक्त होता है। जून धान की नर्सरी तैयार करने व जुलाई तैयार नर्सरी से धान लगाने के लिए सही माना जाता है।
किसानों ने जाहिर की पीड़ा
हाल में हुई बारिश से कोई राहत नहीं मिली। देरी से आए मानसून के कारण खेतों में फसलें सूख गई। इससे दस एकड़ भूमि में लगी फसल खराब हो गई। करीब तीन लाख रुपये की लागत आई थी। अब दोबारा फसल लगानी पड़ेगी।
-अशोक, किसान, मकड़ौली
चार एकड़ में धान की फसल लगाई हुई है। पानी की कमी के कारण खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। फसल तो लगा दी लेकिन पानी कहां से लेकर आएं। सूखने की नौबत आ रही है।
- रामनिवास, किसान, चिड़ी
मानसून का कोई असर नहीं दिख रहा। हल्की बारिश से धान की फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। फसल सूखने लगी है। खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं।
- राजू, किसान, मकड़ौली

01-किसान राजू- फोटो : samvad

01-किसान राजू- फोटो : samvad