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Rohtak News: कैसे मिले स्वच्छ पेयजल, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में ही जमी काई और गाद
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27...रोहतक के मानसरोवर पार्क स्थित प्रथम जलघर के डब्ल्यूटीपी जमी काई और आती दुर्गंध। संवाद
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रोहतक। गंदे पानी की सप्लाई से शहरवासी लगातार सवाल उठा रहे हैं कि जब जलघरों व वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों (डब्ल्यूटीपी) की स्थिति ठीक नहीं होगी तो कैसे शुद्ध पेयजल की सप्लाई होगी। मानसरोवर पार्क स्थित प्रथम जलघर व झज्जर रोड स्थित द्वितीय जलघर के डब्ल्यूटीपी ही गंदगी से अटे पड़े हैं।
सवाल यह भी है कि प्लांटों की ही समय पर सफाई व गाद नहीं निकाली जाएगी तो लोगों को स्वच्छ पेयजल कैसे मिल सकता है। यहां प्लांटों पर पीएसी पाउडर (पॉलीलुमिनियम क्लोराइड) के ढेर लगे हुए हैं लेकिन उनका इस्तेमाल कैसे और कब किया जा रहा है, यह कोई कर्मचारी स्पष्ट तक नहीं कर पा रहा है।
शहर में चार जलघर हैं। इन जलघरों में डब्ल्यूटीपी पानी की शुद्धता के लिए काम करते हैं। शनिवार को टीम ने जलघरों में पानी शुद्धता करने की प्रक्रिया देखी। सबसे पहले प्रथम जलघर में देखा गया है। यहां तीन डब्ल्यूटीपी 80 से अधिक कॉलोनियों की एक लाख आबादी के लिए 495 लाख
लीटर प्रतिदिन पेयजल साफ करते हैं।
प्रथम जलघर के दो डब्ल्यूटीपी 1960 के दशक के हैं जबकि एक नगर निगम की ओर से अमृत योजना के तहत बनाया गया है। पुराने डब्ल्यूटीपी की वर्षों से सफाई नहीं की गई और यही पानी कॉलोनियों में सप्लाई हो रहा हो। इनमें अंदर जमी गाद और काई से दुर्गंध तक आ रही थी। इन्हीं के साथ में क्लोरीन के सिलिंडर भी लगे हुए लेकिन दोपहर तीन बजे के बाद चालू अवस्था में नहीं मिले।
जेएलएन नहर स्थित जलघर तीन में दो डब्ल्यूटीपी हैं। ये करीब 1.5 लाख आबादी के लिए 405 लाख लीटर प्रतिदिन पानी साफ करने की क्षमता रखते हैं। इसमें 2024 में गाद निकालने व सफाई का काम किया गया था। यहां कोई दिक्कत नहीं है। चौथे जलघर में एक ही डब्ल्यूटीपी है और तीन कॉलोनियों की 30 हजार में पानी को सप्लाई किया जाता है।
द्वितीय जलघर के प्लांट भी जर्जर, रिसाव कर रहा शुद्ध पानी
झज्जर रोड स्थित द्वितीय जलघर के चार डब्ल्यूटीपी में 475 लाख लीटर प्रतिदिन पेयजल साफ करते हैं। यह पानी 79 कॉलोनियों की करीब 1.75 लाख आबादी को सप्लाई किया जाता है। पानी साफ होने के बाद भी डब्ल्यूटीपी गाद से भरे हैं। दो डब्ल्यूटीपी का ढांचा जर्जर हो चुका है। बड़े टैंकों के पास बने दो डब्ल्यूटीपी जर्जर हाल हैं। इनसे शुद्ध हुअ पानी रिसाव कर रहा है। हालांकि, यहां मौजूद बेलदार का कहना था पानी को सप्लाई के दौरान टेस्ट किया जाता है। कहा, डब्ल्यूटीपी में वॉल अधिक खुलने से पानी ओवरफ्लो होता है। यह पानी वापस टैंक में ही पहुंच जाता है।
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वर्जन
नहर से मिलने वाला पानी टैंकों में स्टोर किया जाता है। इसके बाद फिटकरी डालकर पानी से मिट्टी को अलग किया जाता है जिससे मिट्टी नीचे बैठ जाती है। बाद में पानी डब्ल्यूटीपी में पहुंचकर फिल्टर होता है। जलघरों में पानी सप्लाई के समय क्लोरीन सिलिंडर व ब्लीचिंग पाउडर का भी इस्तेमाल किया जाता है ताकि बैक्टीरिया को पूरी तरह नष्ट किया जा सके। पानी की शुद्ध करके ही सप्लाई की जा रहा है। समय-समय पर सैंपल भी लिए जा रहे हैं।
- शिवराज चौहान, अधीक्षण अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग
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जलघरों में ही सफाई पर ध्यान नहीं होगा तो आमजन को कैसे साफ पानी मिलेगा। हमने जलघरों व टैंकों हालत देखी है जिसमें कई बार तो काई की दुर्गंध भी आती है।
- जसबीर कुमार, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी
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कॉलोनी में दूषित जलापूर्ति का निवारण नहीं हो रहा है। मकानों में गंदा व काला पानी सप्लाई हो रहा है। विभाग को 8 से अधिक बार लिखित शिकायत दे चुके हैं।
- राजबीर सिवाच, प्रेम नगर।
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सवाल यह भी है कि प्लांटों की ही समय पर सफाई व गाद नहीं निकाली जाएगी तो लोगों को स्वच्छ पेयजल कैसे मिल सकता है। यहां प्लांटों पर पीएसी पाउडर (पॉलीलुमिनियम क्लोराइड) के ढेर लगे हुए हैं लेकिन उनका इस्तेमाल कैसे और कब किया जा रहा है, यह कोई कर्मचारी स्पष्ट तक नहीं कर पा रहा है।
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शहर में चार जलघर हैं। इन जलघरों में डब्ल्यूटीपी पानी की शुद्धता के लिए काम करते हैं। शनिवार को टीम ने जलघरों में पानी शुद्धता करने की प्रक्रिया देखी। सबसे पहले प्रथम जलघर में देखा गया है। यहां तीन डब्ल्यूटीपी 80 से अधिक कॉलोनियों की एक लाख आबादी के लिए 495 लाख
लीटर प्रतिदिन पेयजल साफ करते हैं।
प्रथम जलघर के दो डब्ल्यूटीपी 1960 के दशक के हैं जबकि एक नगर निगम की ओर से अमृत योजना के तहत बनाया गया है। पुराने डब्ल्यूटीपी की वर्षों से सफाई नहीं की गई और यही पानी कॉलोनियों में सप्लाई हो रहा हो। इनमें अंदर जमी गाद और काई से दुर्गंध तक आ रही थी। इन्हीं के साथ में क्लोरीन के सिलिंडर भी लगे हुए लेकिन दोपहर तीन बजे के बाद चालू अवस्था में नहीं मिले।
जेएलएन नहर स्थित जलघर तीन में दो डब्ल्यूटीपी हैं। ये करीब 1.5 लाख आबादी के लिए 405 लाख लीटर प्रतिदिन पानी साफ करने की क्षमता रखते हैं। इसमें 2024 में गाद निकालने व सफाई का काम किया गया था। यहां कोई दिक्कत नहीं है। चौथे जलघर में एक ही डब्ल्यूटीपी है और तीन कॉलोनियों की 30 हजार में पानी को सप्लाई किया जाता है।
द्वितीय जलघर के प्लांट भी जर्जर, रिसाव कर रहा शुद्ध पानी
झज्जर रोड स्थित द्वितीय जलघर के चार डब्ल्यूटीपी में 475 लाख लीटर प्रतिदिन पेयजल साफ करते हैं। यह पानी 79 कॉलोनियों की करीब 1.75 लाख आबादी को सप्लाई किया जाता है। पानी साफ होने के बाद भी डब्ल्यूटीपी गाद से भरे हैं। दो डब्ल्यूटीपी का ढांचा जर्जर हो चुका है। बड़े टैंकों के पास बने दो डब्ल्यूटीपी जर्जर हाल हैं। इनसे शुद्ध हुअ पानी रिसाव कर रहा है। हालांकि, यहां मौजूद बेलदार का कहना था पानी को सप्लाई के दौरान टेस्ट किया जाता है। कहा, डब्ल्यूटीपी में वॉल अधिक खुलने से पानी ओवरफ्लो होता है। यह पानी वापस टैंक में ही पहुंच जाता है।
वर्जन
नहर से मिलने वाला पानी टैंकों में स्टोर किया जाता है। इसके बाद फिटकरी डालकर पानी से मिट्टी को अलग किया जाता है जिससे मिट्टी नीचे बैठ जाती है। बाद में पानी डब्ल्यूटीपी में पहुंचकर फिल्टर होता है। जलघरों में पानी सप्लाई के समय क्लोरीन सिलिंडर व ब्लीचिंग पाउडर का भी इस्तेमाल किया जाता है ताकि बैक्टीरिया को पूरी तरह नष्ट किया जा सके। पानी की शुद्ध करके ही सप्लाई की जा रहा है। समय-समय पर सैंपल भी लिए जा रहे हैं।
- शिवराज चौहान, अधीक्षण अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग
जलघरों में ही सफाई पर ध्यान नहीं होगा तो आमजन को कैसे साफ पानी मिलेगा। हमने जलघरों व टैंकों हालत देखी है जिसमें कई बार तो काई की दुर्गंध भी आती है।
- जसबीर कुमार, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी
कॉलोनी में दूषित जलापूर्ति का निवारण नहीं हो रहा है। मकानों में गंदा व काला पानी सप्लाई हो रहा है। विभाग को 8 से अधिक बार लिखित शिकायत दे चुके हैं।
- राजबीर सिवाच, प्रेम नगर।

27...रोहतक के मानसरोवर पार्क स्थित प्रथम जलघर के डब्ल्यूटीपी जमी काई और आती दुर्गंध। संवाद

27...रोहतक के मानसरोवर पार्क स्थित प्रथम जलघर के डब्ल्यूटीपी जमी काई और आती दुर्गंध। संवाद

27...रोहतक के मानसरोवर पार्क स्थित प्रथम जलघर के डब्ल्यूटीपी जमी काई और आती दुर्गंध। संवाद

27...रोहतक के मानसरोवर पार्क स्थित प्रथम जलघर के डब्ल्यूटीपी जमी काई और आती दुर्गंध। संवाद