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हरियाणा में सिनेमा के क्षेत्र में विकसित हो सकती हैं नई संभावनाएं : अनिल
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Mon, 22 Jun 2026 07:44 AM IST
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25 रोहतक के दादा लख्मी चंद विश्वविद्यालय के सभागार में संगोष्ठी कार्यक्रम के दौरान मौजूद मुख्य
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फोटो : 25
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र प्रचार प्रमुख अनिल कुमार ने कहा कि हरियाणा में संस्कृति, लोककला, सिनेमा और रचनात्मक अभिव्यक्तियों के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। वह दादा लख्मी चंद विश्वविद्यालय के सभागार में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन विषय पर आयोजित एक दिवसीय विचार-मंथन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि समाज के छोटे-छोटे अनुभवों, लोक परंपराओं, लोकनायकों और जनजीवन से जुड़ी कहानियों को फिल्मों, डिजिटल माध्यमों तथा अन्य रचनात्मक मंचों के जरिए व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इससे भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि लोककला, लोकभाषा, लोकसंगीत और सामाजिक मूल्यों के क्षेत्र में प्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान रहा है लेकिन समय के साथ इसके कई सकारात्मक पहलुओं को अपेक्षित पहचान नहीं मिल सकी है।
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कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रतिभागियों को चार प्रमुख समूहों में विभाजित किया गया। इन समूहों में विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा और विचार-विमर्श किया गया।
समापन सत्र में दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमित आर्य ने कहा कि विश्वविद्यालय कला, संस्कृति और सृजनात्मक अभिव्यक्तियों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सके।
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र प्रचार प्रमुख अनिल कुमार ने कहा कि हरियाणा में संस्कृति, लोककला, सिनेमा और रचनात्मक अभिव्यक्तियों के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। वह दादा लख्मी चंद विश्वविद्यालय के सभागार में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन विषय पर आयोजित एक दिवसीय विचार-मंथन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि समाज के छोटे-छोटे अनुभवों, लोक परंपराओं, लोकनायकों और जनजीवन से जुड़ी कहानियों को फिल्मों, डिजिटल माध्यमों तथा अन्य रचनात्मक मंचों के जरिए व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इससे भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकेगा।
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उन्होंने कहा कि लोककला, लोकभाषा, लोकसंगीत और सामाजिक मूल्यों के क्षेत्र में प्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान रहा है लेकिन समय के साथ इसके कई सकारात्मक पहलुओं को अपेक्षित पहचान नहीं मिल सकी है।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रतिभागियों को चार प्रमुख समूहों में विभाजित किया गया। इन समूहों में विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा और विचार-विमर्श किया गया।
समापन सत्र में दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमित आर्य ने कहा कि विश्वविद्यालय कला, संस्कृति और सृजनात्मक अभिव्यक्तियों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सके।