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Rohtak News: डॉ. रमन सुखीजा की बगिया में खुशबू का बसेरा

संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Mon, 22 Jun 2026 06:07 AM IST
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Dr. Raman Sukhija's garden is a haven of fragrance
01-बगिया में पौधों की देखभाल करती संंतनगर निवासी डॉ. रमन सुखीजा। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी

रोहतक । संंत नगर की रहने वाली डॉ. रमन सुखीजा की बगिया में खुशबू का बसेरा है। करीब 10 साल पहले आंगन में उन्होंने ये बगिया बनाई थी। अब उसमें 200 से ज्यादा पौधे लहलहा रहे हैं। बगिया में फूलदार, सजावटी व औषधीय पौधे भी संख्या काफी है। ये पौधे सहज की लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
एमबीबीएस, एमडी पैथोलॉजी डॉ. रमन बताती हैं कि 1993 में उनकी शादी रोहतक निवासी डॉ. सुरेंद्र सुखीजा से हुई थी। करनाल की बेटी रमन को बचपन से ही पेड़-पौधों का शौक है। करीब 10 साल पहले उन्होंने यहां संत नगर में नया मकान बनाया तो उसके आंगन में बगिया भी बनाई।
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उनके घर के बाहर से लेकर आंगन, मुख्य द्वार व छत तक कई पौधे लगाए हुए हैं। बड़े पौधों से वे छोटे पौधे तैयार करती हैं। उनको वह अपने रिश्तेदारों व जानकारों को गिफ्ट में भी देती हैं। वे कहती हैं कि पौधों से घर में सकारात्मक उर्जा का प्रवाह बना रहता है। सुबह योग भी वे बगिया के बीच ही करती हैं।
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जेड-जेड प्लांट है यादगार
उनके लिए जेड-जेड प्लांट यादगार है। डॉ. सुखीजा बताती हैं वह वह एक साल पहले नोएडा में रहने वाली अपनी दोस्त उर्वशी के पास गई हुई थीं। उनके घर में लगा जेड-जेड प्लांट ग्रोथ नहीं कर रहा था। उर्वशी ने वह पौधा उन्हें दे दिया था। वह पौधे को लाकर अपने घर में लगाईं तो अच्छी तरह से ग्रोथ करने लगा है।
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बगिया में इन प्रजातियों के पौधे
डॉ. सुखीजा की बगिया में बोगनवेलिया के पीले, गुलाबी, सफेद, हल्का गुलाबी, गहरा लाल, केसरिया आदि रंगों के फूल वाले पौधे हैं। गुलाब व गुड़हल की भी अलग अलग प्रजातियां हैं। काला गुलाब का पौधा भी लगाया हुआ है। पीस लिली, मॉर्निंग ग्लोरी, स्पाइडर प्लांट, रात की रानी, क्रोटन, तुलसी, पालक, धनिया, पुदीना, एलोवेरा, ग्वारपाठा, पाम, पोनी टेल पाम, मनी प्लांट, ब्लैक मनी प्लांट, जेड प्लांट, स्नैक प्लांट, रबड़ प्लांट, सांग ऑफ इंडिया, फाइकस के अलावा कैक्टस की भी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए हैं।
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बगिया की खुद करती हैं देखभाल
बगिया में लगाए पौधों की देखभाल डॉ. सुखीजा अकसर खुद करती हैं। इस काम में उनके पति डॉ. सुरेंद्र भी सहयोग करते हैं। घर की रसोई से निकले वेस्ट से वह खाद तैयार करती हैं। पौधों में पानी भी देती हैं। इसके अलावा उनकी कटिंग कर मनचाहा आकार भी देती हैं। उनका मानना है कि हम प्रकृति के जितना नजदीक रहेंगे उतना की हमारे लिए बेहतर होगा।
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