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Rohtak News: रोजाना 99 लोगों को चोटिल कर अस्पताल पहुंचा रहे लावारिस पशु
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17-जिला सांख्यिकी अधिकारी नवदीप।
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अभिषेक कीरत
रोहतक। जिले में रोजाना 99 लोग लावारिस पशुओं से चोटिल होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें से 60 प्रतिशत केस कुत्ते व बंदर के काटने के हैं। शेष में अन्य जानवरों के काटने, नोचने, टक्कर मारने या अन्य कारणों से आने वाले केस शामिल हैं।
अस्पतालों में बढ़ती इन चोटिल लोगों की संख्या ने सुरक्षा संबंधी चिंता बढ़ा दी है। इधर, नगर निगम न तो बंदर पकड़ पा रहा है और न ही कुत्ते। कुत्तों का बधियाकरण भी फिलहाल बंद है। इनके लिए शेल्टर होम बनाने की प्रक्रिया भी धीमी रफ्तार से चल रही है। ऐसे में जनता खुद के बचाव के सहारे है।
पिछले चार माह में लावारिस पशुओं से चोट या दुर्घटना होने पर मुआवजे के लिए शुरू हुई दयालु योजना-दो का लाभ पीड़ितों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसकी बड़ी वजह जागरूकता की कमी बताई जा रही है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार माह में केवल 50 पीड़ितों ने ही मुआवजे के लिए आवेदन किया है। इनमें से भी 26 आवेदन छोटी-मोटी चोट लगने के हैं।
यही नहीं, व्यक्ति की मौत के मामले में 24 आवेदन आए हैं। इनमें से भी जांच में महज एक आवेदन सही मिला है। ऐसे में अब तक योजना का एक ही लाभपात्र नजर आया है। शेष मामलों में या तो आवेदन ही गलत है या जरूरी दस्तावेज संलग्न नहीं हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में हर माह औसतन 1700 केस जानवरों के काटने के बाद उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। पीजीआई की ओपीडी में भी हर माह लावारिस पशुओं के कारण करीब 1316 लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। संवाद
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आवेदन में मिल रहीं ये खामियां
दस्तावेजों में पात्रता संबंधी खामियाें में एफआईआर नहीं होने, प्राकृतिक मौत को दुर्घटना बताना, सार्वजनिक स्थल की जगह घर में ही जानवर ने काट लिया, 90 दिन बाद आवेदन करना शामिल हैं।
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वर्जन
अब तक केवल एक पीड़ित योजना के तहत पात्र मिला है। कमेटी मीटिंग कर ऐसे अपात्र लोगों के आवेदन रद्द करेगी। जांच प्रक्रिया के दौरान पाया गया कि सामान्य मौत को भी दुर्घटना बताकर मुआवजे के लिए आवेदन किया गया है। अधिकांश आवेदनों में पात्रता संबंधी खामियां मिली हैं। - नवदीप, जिला सांख्यिकी अधिकारी
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वर्जन
कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाया जाना प्रस्तावित है। पहरावर के पास जमीन चिह्नित की गई है। शेल्टर होम निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। इसके बनने के बाद कुत्तों को वहां रखा जाएगा। -डॉ. आनंद शर्मा, आयुक्त, नगर निगम
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यह है योजना
मृत्यु या दिव्यांगता (70 प्रतिशत या अधिक) की स्थिति में 12 वर्ष तक दो लाख रुपये, 12 से 18 वर्ष तक दो लाख व आयु 18 से 25 वर्ष तक तीन लाख रुपये, 25 से 45 वर्ष तक पांच लाख रुपये व 45 से अधिक उम्र पर 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान है। मामूली चोट की स्थिति में 10 हजार रुपये, कुत्ते के प्रत्येक दांत के निशान पर 10 हजार रुपये व घाव के प्रत्येक 0.2 सेमी पर न्यूनतम 20 हजार रुपये का प्रावधान है।
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रोहतक। जिले में रोजाना 99 लोग लावारिस पशुओं से चोटिल होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें से 60 प्रतिशत केस कुत्ते व बंदर के काटने के हैं। शेष में अन्य जानवरों के काटने, नोचने, टक्कर मारने या अन्य कारणों से आने वाले केस शामिल हैं।
अस्पतालों में बढ़ती इन चोटिल लोगों की संख्या ने सुरक्षा संबंधी चिंता बढ़ा दी है। इधर, नगर निगम न तो बंदर पकड़ पा रहा है और न ही कुत्ते। कुत्तों का बधियाकरण भी फिलहाल बंद है। इनके लिए शेल्टर होम बनाने की प्रक्रिया भी धीमी रफ्तार से चल रही है। ऐसे में जनता खुद के बचाव के सहारे है।
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पिछले चार माह में लावारिस पशुओं से चोट या दुर्घटना होने पर मुआवजे के लिए शुरू हुई दयालु योजना-दो का लाभ पीड़ितों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसकी बड़ी वजह जागरूकता की कमी बताई जा रही है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार माह में केवल 50 पीड़ितों ने ही मुआवजे के लिए आवेदन किया है। इनमें से भी 26 आवेदन छोटी-मोटी चोट लगने के हैं।
यही नहीं, व्यक्ति की मौत के मामले में 24 आवेदन आए हैं। इनमें से भी जांच में महज एक आवेदन सही मिला है। ऐसे में अब तक योजना का एक ही लाभपात्र नजर आया है। शेष मामलों में या तो आवेदन ही गलत है या जरूरी दस्तावेज संलग्न नहीं हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में हर माह औसतन 1700 केस जानवरों के काटने के बाद उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। पीजीआई की ओपीडी में भी हर माह लावारिस पशुओं के कारण करीब 1316 लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। संवाद
आवेदन में मिल रहीं ये खामियां
दस्तावेजों में पात्रता संबंधी खामियाें में एफआईआर नहीं होने, प्राकृतिक मौत को दुर्घटना बताना, सार्वजनिक स्थल की जगह घर में ही जानवर ने काट लिया, 90 दिन बाद आवेदन करना शामिल हैं।
वर्जन
अब तक केवल एक पीड़ित योजना के तहत पात्र मिला है। कमेटी मीटिंग कर ऐसे अपात्र लोगों के आवेदन रद्द करेगी। जांच प्रक्रिया के दौरान पाया गया कि सामान्य मौत को भी दुर्घटना बताकर मुआवजे के लिए आवेदन किया गया है। अधिकांश आवेदनों में पात्रता संबंधी खामियां मिली हैं। - नवदीप, जिला सांख्यिकी अधिकारी
वर्जन
कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाया जाना प्रस्तावित है। पहरावर के पास जमीन चिह्नित की गई है। शेल्टर होम निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। इसके बनने के बाद कुत्तों को वहां रखा जाएगा। -डॉ. आनंद शर्मा, आयुक्त, नगर निगम
यह है योजना
मृत्यु या दिव्यांगता (70 प्रतिशत या अधिक) की स्थिति में 12 वर्ष तक दो लाख रुपये, 12 से 18 वर्ष तक दो लाख व आयु 18 से 25 वर्ष तक तीन लाख रुपये, 25 से 45 वर्ष तक पांच लाख रुपये व 45 से अधिक उम्र पर 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान है। मामूली चोट की स्थिति में 10 हजार रुपये, कुत्ते के प्रत्येक दांत के निशान पर 10 हजार रुपये व घाव के प्रत्येक 0.2 सेमी पर न्यूनतम 20 हजार रुपये का प्रावधान है।

17-जिला सांख्यिकी अधिकारी नवदीप।