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Rohtak News: टीईटी छूट की मांगों को लेकर शिक्षकों ने विधायकों को सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Mon, 27 Apr 2026 04:37 AM IST
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14-रोहतक में महम विधायक बलराम दांगी को ज्ञापन देते हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के प्राध्यापक।
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रोहतक। टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) में छूट की मांगों को लेकर शिक्षकों ने रविवार को विधायक शकुंतला खटक, विधायक भारत भूषण बत्रा, विधायक एवं पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा व विधायक बलराम दांगी ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों का कहना है कि वर्ष 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से पूर्ण रूप से छूट प्रदान की जानी चाहिए।
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ ने राज्य प्रधान प्रभु सिंह व उपप्रधान कृष्ण नैन के नेतृत्व में विधायकों के आवास पर पहुंचकर टीईटी के विरोध में पत्र दिया। इस दौरान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षकों से जुड़े अहम मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार तक उनकी आवाज पहुंचाने की अपील की।
राज्य प्रधान प्रभु सिंह ने कहा कि संघ का तर्क है कि 3 अगस्त 2010 से पहले नियुक्ति के दौरान टीईटी अनिवार्य नहीं था और बाद में नियमों में बदलाव के कारण पुराने शिक्षकों पर यह शर्त लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
इससे न केवल शिक्षकों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है बल्कि उनके रोजगार पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यदि इन पर टीईटी की अनिवार्यता लागू की जाती है तो इससे बड़ी संख्या में शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है।
यही नहीं इससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी और अधिक बढ़ेगी व शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी। विधायकों से यह मांग की गई है कि इस विषय को संसद के आगामी सत्र में उठाया जाए।
कहा कि सरकार पर आवश्यक संशोधन करने के लिए दबाव बनाया जाए ताकि 2009 के अधिनियम में संशोधन कर 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को स्थायी रूप से टीईटी से छूट दी जा सके। इस अवसर पर कृष्ण नैन, निशा, धर्मेंद्र, राजेश, जय कुंवार, बिजेंद्र, सुनील, विनोद, आनंद आदि उपस्थित रहे।
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हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ ने राज्य प्रधान प्रभु सिंह व उपप्रधान कृष्ण नैन के नेतृत्व में विधायकों के आवास पर पहुंचकर टीईटी के विरोध में पत्र दिया। इस दौरान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षकों से जुड़े अहम मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार तक उनकी आवाज पहुंचाने की अपील की।
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राज्य प्रधान प्रभु सिंह ने कहा कि संघ का तर्क है कि 3 अगस्त 2010 से पहले नियुक्ति के दौरान टीईटी अनिवार्य नहीं था और बाद में नियमों में बदलाव के कारण पुराने शिक्षकों पर यह शर्त लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
इससे न केवल शिक्षकों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है बल्कि उनके रोजगार पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यदि इन पर टीईटी की अनिवार्यता लागू की जाती है तो इससे बड़ी संख्या में शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है।
यही नहीं इससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी और अधिक बढ़ेगी व शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी। विधायकों से यह मांग की गई है कि इस विषय को संसद के आगामी सत्र में उठाया जाए।
कहा कि सरकार पर आवश्यक संशोधन करने के लिए दबाव बनाया जाए ताकि 2009 के अधिनियम में संशोधन कर 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को स्थायी रूप से टीईटी से छूट दी जा सके। इस अवसर पर कृष्ण नैन, निशा, धर्मेंद्र, राजेश, जय कुंवार, बिजेंद्र, सुनील, विनोद, आनंद आदि उपस्थित रहे।

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