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Rohtak News: नाटक से दिया मनुष्य की खोती वास्तविक पहचान का संदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 11 Jun 2026 08:55 PM IST
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38-सुपवा में नाटक बियोंड द इमेजिनेशन का मंचन करते छात्र। स्रोत : सुपवा
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स में गुरुवार को नाटक ‘बियोंड द इमेजिनेशन’ के तीन दिवसीय मंचन का सफल समापन हुआ। फिल्म एवं टेलीविजन फैकल्टी के एक्टिंग विभाग के विद्यार्थियों ने अपने प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से आधुनिक जीवन में मनुष्य के अपनी वास्तविक पहचान से दूर होते जाने की संवेदनशीलता प्रस्तुति की। नाटक का मंचन विश्वविद्यालय के मिनी ऑडिटोरियम में किया गया।
समापन अवसर पर नागेंद्र शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. अमित आर्य तथा रजिस्ट्रार डॉ. गुंजन मलिक मनोचा ने छात्र कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। नाटक के तीन दिनों में कुल पांच शो आयोजित किए गए।
यह प्रस्तुति प्रसिद्ध मराठी नाटक प्रतिबिंब पर आधारित थी, जिसे विख्यात साहित्यकार महेश एलकुंचवार ने लिखा है। नाटक में दर्शाया गया कि आधुनिक जीवन की भागदौड़, सामाजिक दबाव और बढ़ती अपेक्षाओं के बीच व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप और अस्तित्व से दूर होता जा रहा है। इसके माध्यम से चिंता, आत्मपहचान और जीवन के अर्थ की खोज जैसे गंभीर विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
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चौथे सेमेस्टर के छात्र भारती, प्रिंस और पुष्कर ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। नाटक का निर्देशन सुशील कांत ने किया, जबकि प्रोडक्शन डिजाइन की जिम्मेदारी बिपिन गोबाले ने संभाली। कॉस्ट्यूम डिजाइन पाली फुकॉन ने तैयार किया।
हिंदी अनुवाद वसंत देव द्वारा किया गया तथा साउंड डिजाइन का कार्य दीपा वर्मा ने संभाला। मुंबई से आए विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और लगातार रिहर्सल का प्रभाव छात्र कलाकारों की प्रस्तुति में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
रोहतक। दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स में गुरुवार को नाटक ‘बियोंड द इमेजिनेशन’ के तीन दिवसीय मंचन का सफल समापन हुआ। फिल्म एवं टेलीविजन फैकल्टी के एक्टिंग विभाग के विद्यार्थियों ने अपने प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से आधुनिक जीवन में मनुष्य के अपनी वास्तविक पहचान से दूर होते जाने की संवेदनशीलता प्रस्तुति की। नाटक का मंचन विश्वविद्यालय के मिनी ऑडिटोरियम में किया गया।
समापन अवसर पर नागेंद्र शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. अमित आर्य तथा रजिस्ट्रार डॉ. गुंजन मलिक मनोचा ने छात्र कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। नाटक के तीन दिनों में कुल पांच शो आयोजित किए गए।
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यह प्रस्तुति प्रसिद्ध मराठी नाटक प्रतिबिंब पर आधारित थी, जिसे विख्यात साहित्यकार महेश एलकुंचवार ने लिखा है। नाटक में दर्शाया गया कि आधुनिक जीवन की भागदौड़, सामाजिक दबाव और बढ़ती अपेक्षाओं के बीच व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप और अस्तित्व से दूर होता जा रहा है। इसके माध्यम से चिंता, आत्मपहचान और जीवन के अर्थ की खोज जैसे गंभीर विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
चौथे सेमेस्टर के छात्र भारती, प्रिंस और पुष्कर ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। नाटक का निर्देशन सुशील कांत ने किया, जबकि प्रोडक्शन डिजाइन की जिम्मेदारी बिपिन गोबाले ने संभाली। कॉस्ट्यूम डिजाइन पाली फुकॉन ने तैयार किया।
हिंदी अनुवाद वसंत देव द्वारा किया गया तथा साउंड डिजाइन का कार्य दीपा वर्मा ने संभाला। मुंबई से आए विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और लगातार रिहर्सल का प्रभाव छात्र कलाकारों की प्रस्तुति में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।