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Sirsa News: पति की मौत के 26 साल बाद पीड़ित महिला को मिला इंसाफ
Sat, 01 Aug 2026 10:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 01 Aug 2026 10:55 PM IST
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सिरसा। सड़क दुर्घटना में पति की मौत के करीब 26 वर्ष बाद एक पीड़ित महिला को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से न्याय मिला है। हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवीर सिंह राठौर ने मुआवजे की राशि बढ़ाई। पीड़ित परिवार को 8 लाख 60 हजार 580 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।
कोर्ट ने यह राशि वर्ष 2001 से 9 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित बस चालक और बस मालिक से अदा करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला 1 सितंबर 2000 का है। सिरसा जिले के गांव मौजूखेड़ा निवासी बलबीर सिंह स्कूटर पर जा रहे थे। एक बस ने स्कूटर को टक्कर मार दी, जिससे बलबीर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। उनकी पत्नी गुरमीत कौर ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण में मुआवजे का दावा दायर किया।
न्यायाधिकरण ने वर्ष 2001 में 2 लाख 30 हजार 400 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। गुरमीत कौर को यह मुआवजा अपर्याप्त लगा। उन्होंने वर्ष 2001 में ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दायर कर मुआवजा बढ़ाने की मांग की।
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कानूनी प्रक्रिया में बाधाएं
हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही थी। 30 जनवरी 2011 को हाईकोर्ट के रिकॉर्ड रूम में भीषण आग लग गई। इस आग में 25 हजार से अधिक सिविल रिवीजन व मोटर दुर्घटना दावों से संबंधित फाइलें जलकर नष्ट हो गईं। इससे इस मामले की सुनवाई भी प्रभावित हुई। बाद में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने सुरक्षित रिकॉर्ड की प्रतियां प्रस्तुत कीं, जिससे दोबारा सुनवाई शुरू हो सकी।
हाईकोर्ट का अंतिम फैसला
करीब 25 वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया चली। 23 जुलाई 2026 को न्यायाधीश यशवीर सिंह राठौर ने पीड़ित परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने मुआवजे की राशि बढ़ाकर 8 लाख 60 हजार 580 रुपये कर दी। साथ ही वर्ष 2001 से 9 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित भुगतान का आदेश दिया।
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कोर्ट ने यह राशि वर्ष 2001 से 9 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित बस चालक और बस मालिक से अदा करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला 1 सितंबर 2000 का है। सिरसा जिले के गांव मौजूखेड़ा निवासी बलबीर सिंह स्कूटर पर जा रहे थे। एक बस ने स्कूटर को टक्कर मार दी, जिससे बलबीर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। उनकी पत्नी गुरमीत कौर ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण में मुआवजे का दावा दायर किया।
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न्यायाधिकरण ने वर्ष 2001 में 2 लाख 30 हजार 400 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। गुरमीत कौर को यह मुआवजा अपर्याप्त लगा। उन्होंने वर्ष 2001 में ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दायर कर मुआवजा बढ़ाने की मांग की।
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कानूनी प्रक्रिया में बाधाएं
हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही थी। 30 जनवरी 2011 को हाईकोर्ट के रिकॉर्ड रूम में भीषण आग लग गई। इस आग में 25 हजार से अधिक सिविल रिवीजन व मोटर दुर्घटना दावों से संबंधित फाइलें जलकर नष्ट हो गईं। इससे इस मामले की सुनवाई भी प्रभावित हुई। बाद में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने सुरक्षित रिकॉर्ड की प्रतियां प्रस्तुत कीं, जिससे दोबारा सुनवाई शुरू हो सकी।
हाईकोर्ट का अंतिम फैसला
करीब 25 वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया चली। 23 जुलाई 2026 को न्यायाधीश यशवीर सिंह राठौर ने पीड़ित परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने मुआवजे की राशि बढ़ाकर 8 लाख 60 हजार 580 रुपये कर दी। साथ ही वर्ष 2001 से 9 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित भुगतान का आदेश दिया।