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क्षेत्रीय दलों के दम पर भाजपा का मुकाबला संभव नहीं : बृजेंद्र सिंह

संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Sun, 22 Mar 2026 11:33 PM IST
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brijendra singh sadbhawana yatra
सद्भावना यात्रा के दौरान पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह ओर जिलाध्याक्ष संतोष  बैनीवाल व अन्य कार्यकर
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प्रदेश में क्षेत्रीय दल कमजोर हो चुके हैं, दो बड़ी पार्टियों में सीधा मुकाबला है
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की सद्भावना यात्रा रविवार को 169वें दिन ऐलनाबाद के चोपटा क्षेत्र पहुंची। चोपटा के गांव दड़बा कलां में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने उनका स्वागत किया।
यात्रा की शुरुआत ऐलनाबाद हलके के गांव दड़बा कलां से कांग्रेस अध्यक्ष संतोष बेनीवाल की अगुवाई में शुरू हुई। इसके बाद गांव चोपटा, गांव नाथूसरी, गांव गिगोरानी से होते हुए गांव कागदाना में संपन्न हुई।
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पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह ने कहा कि क्षेत्रीय दलों के सहारे बीजेपी का मुकाबला करना संभव नहीं है क्योंकि क्षेत्रीय दल समाज के एक वर्ग तक सीमित होते हैं। सिर्फ कांग्रेस ही बीजेपी का मुकाबला कर सकती है जो सभी वर्गों को साथ लेकर चलती हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी कभी भी क्षेत्रीय दलों को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी नहीं मानती। संसद में भी बीजेपी नेताओं का हमला ज्यादातर कांग्रेस और गांधी परिवार पर ही केंद्रित रहता है। बीजेपी को सबसे ज्यादा खतरा कांग्रेस से ही महसूस होता है।

पूर्व सांसद ने कहा कि प्रदेश में एक समय ऐसा था जब प्रदेश में क्षेत्रीय दल काफी मजबूत स्थिति में थे। ये दल एक ही राजनीतिक धारा के हिस्सा थे। सत्ता के लिए सीधा मुकाबला करते थे लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। ये क्षेत्रीय दल काफी कमजोर हो गए हैं जिससे प्रदेश में सीधा मुकाबला दो राष्ट्रीय दलों बीजेपी और कांग्रेस के बीच रह गया है। राज्यसभा चुनाव पर बिजेंद्र सिंह ने कहा कि पहले इस तरह के चुनाव काफी सरल होते थे और विधायकों की संख्या के आधार पर सीटें तय हो जाती थीं। अब इसमें साम, दाम, दंड, भेद जैसी राजनीति खुलकर सामने आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी और लगभग अपना लक्ष्य हासिल कर लिया था लेकिन एक वोट रद्द हो जाने के कारण उनकी योजना पूरी तरह सफल नहीं हो सकी।
कांग्रेस की चुनौतियां और कमजोरियां
बृजेंद्र सिंह ने स्वीकार किया कि कांग्रेस के भीतर भी कई कमजोरियां आई हैं। उन्होंने कहा कि लगातार तीन बार सत्ता में न आने से पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर पड़ता है। 11 साल तक सत्ता से बाहर रहने के बाद अनिश्चितता बढ़ जाती है जिससे इस तरह की राजनीतिक घटनाएं देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा कि जनता कांग्रेस को सत्ता में लाना चाहती थी और बीजेपी को हटाने का मन बना चुकी थी लेकिन पार्टी अपनी कमियों के कारण उस मौके का फायदा नहीं उठा पाई।
इस दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष संतोष बेनीवाल, सुभाष सरपंच गांव मखोसरानी , प्रधान सैनी समाज गजानंद सोनी, केसीसी कांग्रेस उपाध्यक्ष वेदपाल ढिल्लों, परवीन ढिल्लों, डॉ. ओम प्रकाश बेनीवाल, सुरेंद्र बिश्नोई, ओम प्रकाश दड़वा मौजूद रहे।
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