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Sirsa News: मानसून में सूखी घग्गर नदी से बढ़ा सिंचाई संकट, खरीफ फसलों पर मंडराया नुकसान का खतरा
Tue, 28 Jul 2026 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Tue, 28 Jul 2026 12:50 AM IST
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मानसून के मौसम में उफान पर रहने वाली यह वहीं घग्गर नंदी है। जो इस मानसून पूरी तरह से शांत है।
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पिछले साल जुलाई में खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी घग्गर, इस बार घग्गर के पानी और बारिश को तरस रहे किसान
फोटो - रानियां 05,06,07 सूखी पड़ी ओटू झील व करीब चैनल तथा ओटू हेड का दृश्य।
संवाद न्यूज एजेंसी
रानियां। जुलाई के महीने में मानसून सबसे ज्यादा सक्रिय और ताकतवर बना रहता है। इस बार न तो बरसात हुई और न ही घग्गर नदी में बरसात का पानी पहुंचा। जुलाई महीने में घग्गर नदी का सूखा पड़ा होना रानियां क्षेत्र के किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
पिछले वर्ष इन दिनों घग्गर नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी। क्षेत्र में 200 एमएम से अधिक वर्षा दर्ज की गई थी। वहीं, इस बार जुलाई का अंतिम सप्ताह समाप्त होने को है लेकिन नदी में बरसात का बिल्कुल भी पानी भी नहीं है।
लगातार कमजोर मानसून और पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान सहित खरीफ की अन्य फसलों की सिंचाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। खेतों में लगाया गया धान मुरझाने लगा है जबकि नरमा, कपास, मूंग और तिल की फसलें भी नमी के अभाव में सूखने होने लगी हैं।
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बारिश की कमी के चलते इस बार ग्वार व बाजरे की फसलों की बिजाई भी नहीं हो सकी। घग्गर नदी के साथ लगते गांव बनसुधार, चामल, धनूर, ओटू, रानियां, फिरोजाबाद, थेड़ी मोहर सिंह, रामपुर थेड़ी, जीवननगर, दमदमा, करीवाला और बणी सहित दर्जनों गांवों में बड़े पैमाने पर धान की खेती होती है।
घग्गर नदी में पानी नहीं आने से किसानों की सैकड़ों एकड़ धान की बिजाई प्रभावित हुई है तो वहीं आगत किस्म के धान की फसल की सिंचाई महंगे डीजल और बिजली खर्च के बावजूद ट्यूबवेलों से करने को मजबूर हैं। जिन किसानों के पास पर्याप्त सिंचाई साधन नहीं हैं उनके खेतों में धान की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है।
इससे किसानों की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है जबकि अच्छी पैदावार की उम्मीद भी कमजोर पड़ती जा रही है। पर्याप्त मात्रा में बारिश और घग्गर नदी में बरसाती पानी न होने से नदी से निकलने वाली मम्मड़ खेड़ा, सदैवा, नाईवाला, रत्ताखेड़ा तथा अन्य खरीफ चैनलों में भी पानी नहीं पहुंचा।
इन चैनलों से गांव झोरड़नाली, खारियां, चक्कां, भुना, मेहणा खेड़ा, खाजा खेड़ा, कुस्सर, सादेवाला, रिसालिया खेड़ा, खाई शेरगढ़, नुहियांवाली, बनवाला, घुंकावाली, जोधपुरिया, शेखुपुरिया और पीरखेड़ा सहित अन्य दर्जनों गांवों की हजारों एकड़ भूमि सिंचित होती है।
इन क्षेत्रों का भूमिगत पानी अधिक लवणीय होने के कारण किसान सिंचाई के लिए मुख्य रूप से घग्गर के पानी पर ही निर्भर रहते हैं। नदी सूखी रहने से इन गांवों में खरीफ फसलों के उत्पादन पर संकट गहराता जा रहा है।
किसानों का कहना है कि समय पर वर्षा नहीं होने के कारण ग्वार और बाजरे की बिजाई भी कई स्थानों पर प्रभावित हुई है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई या घग्गर में पानी नहीं आता है तो खरीफ सीजन की फसल को भारी नुकसान होगा और किसान आढ़तियों के कर्जदार हो जाएंगे।
किसान सुखविंदर सिंह, बलजीत सिंह, करमजीत सिंह, बुधराम, रामकुमार, लेखराज और प्रेमचंद ने बताया कि खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं और सिंचाई पर होने वाला अतिरिक्त खर्च उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर रहा है।
1 साल में बदली घग्गर नदी की तस्वीर
जुलाई 2025 में घग्गर नदी उफान पर थी। नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण कई स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बन गए थे और किसानों को जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ा था। इस वर्ष तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। इस बार नदी का अधिकांश हिस्सा सूखा पड़ा है। किसान पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान हैं। मौसम के इस बड़े बदलाव ने कृषि पर बढ़ते जल संकट की चिंता को और गहरा कर दिया है।
बारिश के दिनों में ओटू झील पूरी तरह सूखी
मानसून सीजन के दौरान सिरसा जिला का पर्यटन स्थल कहे जाने वाली ओटू झील पूरी तरह से सूखी हुई है। हालांकि, बीते सालों में जुलाई और अगस्त महीने में यह खतरे के निशान से ऊपर बहती रही है। इसे देखने के लिए प्रदेश सहित राजस्थान व पंजाब के लोग यहां पहुंचते हैं। इस बार झील में पानी न होने से रेहड़ी पर अपना व्यवसाय चलाने वाले लोगों का रोजगार बिल्कुल ठप है। किसानों की फसल सूख रही है।
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फोटो - रानियां 05,06,07 सूखी पड़ी ओटू झील व करीब चैनल तथा ओटू हेड का दृश्य।
संवाद न्यूज एजेंसी
रानियां। जुलाई के महीने में मानसून सबसे ज्यादा सक्रिय और ताकतवर बना रहता है। इस बार न तो बरसात हुई और न ही घग्गर नदी में बरसात का पानी पहुंचा। जुलाई महीने में घग्गर नदी का सूखा पड़ा होना रानियां क्षेत्र के किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
पिछले वर्ष इन दिनों घग्गर नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी। क्षेत्र में 200 एमएम से अधिक वर्षा दर्ज की गई थी। वहीं, इस बार जुलाई का अंतिम सप्ताह समाप्त होने को है लेकिन नदी में बरसात का बिल्कुल भी पानी भी नहीं है।
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लगातार कमजोर मानसून और पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान सहित खरीफ की अन्य फसलों की सिंचाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। खेतों में लगाया गया धान मुरझाने लगा है जबकि नरमा, कपास, मूंग और तिल की फसलें भी नमी के अभाव में सूखने होने लगी हैं।
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बारिश की कमी के चलते इस बार ग्वार व बाजरे की फसलों की बिजाई भी नहीं हो सकी। घग्गर नदी के साथ लगते गांव बनसुधार, चामल, धनूर, ओटू, रानियां, फिरोजाबाद, थेड़ी मोहर सिंह, रामपुर थेड़ी, जीवननगर, दमदमा, करीवाला और बणी सहित दर्जनों गांवों में बड़े पैमाने पर धान की खेती होती है।
घग्गर नदी में पानी नहीं आने से किसानों की सैकड़ों एकड़ धान की बिजाई प्रभावित हुई है तो वहीं आगत किस्म के धान की फसल की सिंचाई महंगे डीजल और बिजली खर्च के बावजूद ट्यूबवेलों से करने को मजबूर हैं। जिन किसानों के पास पर्याप्त सिंचाई साधन नहीं हैं उनके खेतों में धान की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है।
इससे किसानों की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है जबकि अच्छी पैदावार की उम्मीद भी कमजोर पड़ती जा रही है। पर्याप्त मात्रा में बारिश और घग्गर नदी में बरसाती पानी न होने से नदी से निकलने वाली मम्मड़ खेड़ा, सदैवा, नाईवाला, रत्ताखेड़ा तथा अन्य खरीफ चैनलों में भी पानी नहीं पहुंचा।
इन चैनलों से गांव झोरड़नाली, खारियां, चक्कां, भुना, मेहणा खेड़ा, खाजा खेड़ा, कुस्सर, सादेवाला, रिसालिया खेड़ा, खाई शेरगढ़, नुहियांवाली, बनवाला, घुंकावाली, जोधपुरिया, शेखुपुरिया और पीरखेड़ा सहित अन्य दर्जनों गांवों की हजारों एकड़ भूमि सिंचित होती है।
इन क्षेत्रों का भूमिगत पानी अधिक लवणीय होने के कारण किसान सिंचाई के लिए मुख्य रूप से घग्गर के पानी पर ही निर्भर रहते हैं। नदी सूखी रहने से इन गांवों में खरीफ फसलों के उत्पादन पर संकट गहराता जा रहा है।
किसानों का कहना है कि समय पर वर्षा नहीं होने के कारण ग्वार और बाजरे की बिजाई भी कई स्थानों पर प्रभावित हुई है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई या घग्गर में पानी नहीं आता है तो खरीफ सीजन की फसल को भारी नुकसान होगा और किसान आढ़तियों के कर्जदार हो जाएंगे।
किसान सुखविंदर सिंह, बलजीत सिंह, करमजीत सिंह, बुधराम, रामकुमार, लेखराज और प्रेमचंद ने बताया कि खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं और सिंचाई पर होने वाला अतिरिक्त खर्च उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर रहा है।
1 साल में बदली घग्गर नदी की तस्वीर
जुलाई 2025 में घग्गर नदी उफान पर थी। नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण कई स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बन गए थे और किसानों को जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ा था। इस वर्ष तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। इस बार नदी का अधिकांश हिस्सा सूखा पड़ा है। किसान पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान हैं। मौसम के इस बड़े बदलाव ने कृषि पर बढ़ते जल संकट की चिंता को और गहरा कर दिया है।
बारिश के दिनों में ओटू झील पूरी तरह सूखी
मानसून सीजन के दौरान सिरसा जिला का पर्यटन स्थल कहे जाने वाली ओटू झील पूरी तरह से सूखी हुई है। हालांकि, बीते सालों में जुलाई और अगस्त महीने में यह खतरे के निशान से ऊपर बहती रही है। इसे देखने के लिए प्रदेश सहित राजस्थान व पंजाब के लोग यहां पहुंचते हैं। इस बार झील में पानी न होने से रेहड़ी पर अपना व्यवसाय चलाने वाले लोगों का रोजगार बिल्कुल ठप है। किसानों की फसल सूख रही है।