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Sirsa News: बाढ़ का पानी बने जीवनधारा, पश्चिमी हरियाणा को मिले जल का सहारा, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री संग बैठक में सांसद कुमारी सैलजा ने उठाए जल संकट
Fri, 07 Aug 2026 10:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Fri, 07 Aug 2026 10:38 PM IST
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सिरसा। हरियाणा में मानसून के दौरान बाढ़ और गर्मी के मौसम में जल संकट की स्थिति को देखते हुए सिरसा की सांसद एवं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव कुमारी सैलजा ने समग्र जल प्रबंधन नीति बनाने की मांग उठाई। हरियाणा भवन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के साथ लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की बैठक में उन्होंने पश्चिमी हरियाणा के जल संकट से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे रखे।
सैलजा ने कहा कि प्रदेश के अनेक जिलों में पेयजल और सिंचाई का संकट लगातार गहरा रहा है। कई गांवों और शहरों में स्वच्छ पेयजल की कमी है। वहीं नहरों, माइनरों और रजबहों के अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य केवल पाइपलाइन बिछाना नहीं बल्कि प्रत्येक परिवार तक नियमित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है।
यमुना का अतिरिक्त पानी घग्गर तक पहुंचाने का सुझाव
उन्होंने केंद्र सरकार की नदी जोड़ो योजना के तहत यमुना-घग्गर लिंक की संभावनाओं पर गंभीरता से कार्य करने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि मानसून में यमुना के अतिरिक्त पानी को वैज्ञानिक तरीके से घग्गर तक पहुंचाया जाए। इससे बाढ़ का खतरा कम होगा और सिरसा, फतेहाबाद सहित पश्चिमी हरियाणा में सिंचाई, जल भंडारण व भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा।
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ओटू झील को बनाया जाए पश्चिमी हरियाणा का जल बैंक
सांसद ने ओटू झील के पुनर्जीवन की भी मांग की। उन्होंने कहा कि झील की गाद निकालकर उसकी जलधारण क्षमता बढ़ाई जाए। साथ ही अधिग्रहित भूमि का नया राजस्व एवं तकनीकी सर्वे कर इसे पश्चिमी हरियाणा के बड़े जल भंडार के रूप में विकसित किया जाए, ताकि मानसून के अतिरिक्त पानी का उपयोग बाद में कृषि और पेयजल जरूरतों के लिए किया जा सके।
घग्गर की सफाई और जल वहन क्षमता बढ़ाने पर जोर
कुमारी सैलजा ने घग्गर नदी की सफाई, गाद निकासी और तटबंधों को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने नदी की जल वहन क्षमता बढ़ाने, भाखड़ा से हरियाणा को मिलने वाले हिस्से के पानी का पूरा उपयोग सुनिश्चित करने व सिरसा ब्रांच सहित पुराने नहरी नेटवर्क के आधुनिकीकरण की मांग की। उन्होंने कहा कि पानी केवल नहरों तक नहीं बल्कि अंतिम छोर के गांवों और खेतों तक समान रूप से पहुंचे, इसके लिए आधुनिक निगरानी प्रणाली अपनाई जानी चाहिए।
सैलजा ने कहा कि बाढ़, पेयजल संकट और सिंचाई की समस्या का समाधान अलग-अलग नहीं बल्कि एकीकृत जल प्रबंधन नीति के तहत किया जाना चाहिए। यदि बरसात के अतिरिक्त पानी का वैज्ञानिक संरक्षण किया जाए तो यही जल भविष्य में हरियाणा की पेयजल सुरक्षा, कृषि और जल संरक्षण का मजबूत आधार बन सकता है।
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सैलजा ने कहा कि प्रदेश के अनेक जिलों में पेयजल और सिंचाई का संकट लगातार गहरा रहा है। कई गांवों और शहरों में स्वच्छ पेयजल की कमी है। वहीं नहरों, माइनरों और रजबहों के अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य केवल पाइपलाइन बिछाना नहीं बल्कि प्रत्येक परिवार तक नियमित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है।
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यमुना का अतिरिक्त पानी घग्गर तक पहुंचाने का सुझाव
उन्होंने केंद्र सरकार की नदी जोड़ो योजना के तहत यमुना-घग्गर लिंक की संभावनाओं पर गंभीरता से कार्य करने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि मानसून में यमुना के अतिरिक्त पानी को वैज्ञानिक तरीके से घग्गर तक पहुंचाया जाए। इससे बाढ़ का खतरा कम होगा और सिरसा, फतेहाबाद सहित पश्चिमी हरियाणा में सिंचाई, जल भंडारण व भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा।
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ओटू झील को बनाया जाए पश्चिमी हरियाणा का जल बैंक
सांसद ने ओटू झील के पुनर्जीवन की भी मांग की। उन्होंने कहा कि झील की गाद निकालकर उसकी जलधारण क्षमता बढ़ाई जाए। साथ ही अधिग्रहित भूमि का नया राजस्व एवं तकनीकी सर्वे कर इसे पश्चिमी हरियाणा के बड़े जल भंडार के रूप में विकसित किया जाए, ताकि मानसून के अतिरिक्त पानी का उपयोग बाद में कृषि और पेयजल जरूरतों के लिए किया जा सके।
घग्गर की सफाई और जल वहन क्षमता बढ़ाने पर जोर
कुमारी सैलजा ने घग्गर नदी की सफाई, गाद निकासी और तटबंधों को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने नदी की जल वहन क्षमता बढ़ाने, भाखड़ा से हरियाणा को मिलने वाले हिस्से के पानी का पूरा उपयोग सुनिश्चित करने व सिरसा ब्रांच सहित पुराने नहरी नेटवर्क के आधुनिकीकरण की मांग की। उन्होंने कहा कि पानी केवल नहरों तक नहीं बल्कि अंतिम छोर के गांवों और खेतों तक समान रूप से पहुंचे, इसके लिए आधुनिक निगरानी प्रणाली अपनाई जानी चाहिए।
सैलजा ने कहा कि बाढ़, पेयजल संकट और सिंचाई की समस्या का समाधान अलग-अलग नहीं बल्कि एकीकृत जल प्रबंधन नीति के तहत किया जाना चाहिए। यदि बरसात के अतिरिक्त पानी का वैज्ञानिक संरक्षण किया जाए तो यही जल भविष्य में हरियाणा की पेयजल सुरक्षा, कृषि और जल संरक्षण का मजबूत आधार बन सकता है।